जबलपुर में कांग्रेस का Central Government पर तीखा हमला: मनरेगा का नाम बदलना रोजगार योजना खत्म करने की साजिश – रागिनी नायक
Central Government द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने के फैसले पर देशभर में सियासत तेज हो गई है। इसी कड़ी में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। रागिनी नायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “नाम वही लोग बदलते हैं, जो खुद कोई काम के नहीं होते।” उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा का नाम बदलना केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी रोजगार देने वाली योजना को कमजोर कर धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश है।
नाम बदलने की राजनीति पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रागिनी नायक ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी वास्तव में जमीनी स्तर पर काम कर रहे होते, तो योजनाओं के नाम बदलने में ऊर्जा खर्च नहीं करते। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं के नाम बदले हैं, लेकिन उनके मूल उद्देश्य और क्रियान्वयन में कोई ठोस सुधार नहीं दिखा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि निर्मल भारत अभियान का नाम बदलकर स्वच्छ भारत अभियान कर दिया गया, नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन को दीनदयाल योजना बना दिया गया, नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी को मेक इन इंडिया कहा गया और स्वावलंबन योजना को अटल पेंशन योजना में बदल दिया गया। अब मनरेगा का नाम बदलना उसी श्रृंखला की एक और कड़ी है।
रागिनी नायक ने कहा कि योजनाओं के नाम बदलने से न तो बेरोजगारी खत्म होती है और न ही गरीबों की जिंदगी में कोई वास्तविक बदलाव आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल ब्रांडिंग की राजनीति है, जिससे सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है।
मनरेगा को खत्म करने की साजिश का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू से ही मनरेगा के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी विदेश दौरों के दौरान महात्मा गांधी की मूर्तियों के सामने नतमस्तक होते हैं, लेकिन देश में गांधी जी के नाम से जुड़ी सबसे बड़ी रोजगार योजना को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। रागिनी नायक ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के लिए जीवन रेखा है।
उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा संविधान के तहत मजदूरों को रोजगार का अधिकार देता है। अनुच्छेद 21 और उससे जुड़े प्रावधानों के तहत गरिमापूर्ण जीवन और रोजगार हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन केंद्र सरकार इस अधिकार को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है।
बजट का बहाना और राज्यों पर बढ़ता बोझ
रागिनी नायक ने Central Government पर आरोप लगाया कि वह बजट का बहाना बनाकर मनरेगा को कंडीशनल बना रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय मनरेगा को 100 प्रतिशत बजट दिया जाता था, ताकि किसी भी राज्य में मजदूरों को काम और मजदूरी के लिए संघर्ष न करना पड़े। लेकिन मौजूदा सरकार ने नए प्रावधानों के जरिए राज्यों पर लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल दिया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर राज्यों के पास पर्याप्त बजट नहीं होगा, तो वे मनरेगा जैसी बड़ी योजना को कैसे चला पाएंगे। इसका सीधा असर गरीब मजदूरों पर पड़ेगा, जिन्हें काम नहीं मिलेगा या मजदूरी में देरी होगी। रागिनी नायक ने कहा कि सरकार बजट का रोना रोकर इस योजना को धीरे-धीरे बंद करने की जमीन तैयार कर रही है।
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योजना का तकनीकीकरण और गरीबों का मजाक
कांग्रेस प्रवक्ता ने मनरेगा के बढ़ते तकनीकीकरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि योजना को पूरी तरह तकनीकी बना देना गरीबों और ग्रामीण मजदूरों का मजाक उड़ाने जैसा है। देश के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल साक्षरता की भारी कमी है। ऐसे में ऑनलाइन उपस्थिति, डिजिटल भुगतान और तकनीकी प्रक्रियाओं को अनिवार्य करना मजदूरों के लिए नई परेशानियां खड़ी कर रहा है।
रागिनी नायक ने कहा कि तकनीक सुविधा के लिए होनी चाहिए, न कि गरीबों को योजना से बाहर करने का हथियार। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता नहीं, बल्कि मजदूरों की संख्या कम दिखाना और खर्च घटाना है।
नेशनल हेराल्ड केस पर केंद्र को घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रागिनी नायक ने नेशनल हेराल्ड केस को लेकर भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह मामला कांग्रेस की छवि खराब करने के लिए जानबूझकर उछाला गया था, लेकिन अदालत में बीजेपी का झूठ पूरी तरह बेनकाब हो गया है। उन्होंने कहा कि स्पेशल कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले में नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।
ईडी की भूमिका पर गंभीर सवाल
रागिनी नायक ने ईडी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार ने जांच एजेंसियों को विपक्ष के खिलाफ हथियार बना लिया है। उन्होंने दावा किया कि ईडी का कन्विक्शन रेट महज एक प्रतिशत है, जो इसकी कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में ईडी द्वारा दर्ज किए गए मामलों में से करीब 95 प्रतिशत मामले कांग्रेस नेताओं के खिलाफ हैं, लेकिन उनमें से केवल दो मामलों में ही आरोप सिद्ध हो सके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी को राजनीतिक बदले की भावना से इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका उद्देश्य विपक्षी नेताओं को डराना और दबाव में रखना है।
कांग्रेस का स्पष्ट संदेश
रागिनी नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में कहा कि कांग्रेस मनरेगा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की रक्षा के लिए पूरी ताकत से संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी सड़क से संसद तक केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करती रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा जैसी योजना को कमजोर करना देश के करोड़ों गरीब परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कांग्रेस इस साजिश को सफल नहीं होने देगी और हर मंच पर इसकी आवाज उठाएगी।
