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“छतरपुर PWD घोटाला: 9 करोड़ की सरकारी जमीन सिर्फ 84 लाख में बिक गई – धीरेंद्र शास्त्री के करीबी और अधिकारियों की मिलीभगत, सरकार पर सवाल!”

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Published On: 13 October 2025
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छतरपुर PWD घोटाला: 9 करोड़ की सरकारी जमीन 84 लाख में बेची गई, तीन अफसर सस्पेंड, धीरेंद्र शास्त्री के यात्रा प्रभारी से जुड़े गंभीर सवाल – बाबा के करीबी जुड़े या बाबा नहीं?

छतरपुर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) की जमीन से जुड़े घोटाले ने प्रशासन और सरकारी तंत्र में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, विभाग की लगभग 9 करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी जमीन महज 84 लाख रुपए में बेच दी गई, जिसके बाद तीन अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया।

इस घोटाले की जांच में सामने आया है कि जमीन खरीदने वालों में एक नाम धीरेंद्र गौर का भी है, जो बागेश्वर धाम के प्रमुख पं. धीरेंद्र शास्त्री के दिल्ली से वृंदावन यात्रा प्रभारी बताये जा रहे हैं। अब सवाल उठ रहा है – क्या यह फर्जीवाड़ा सीधे बाबा के करीबी से जुड़ा है या यह केवल संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत का मामला है?

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PWD जमीन घोटाला: कैसे हुई 9 करोड़ की संपत्ति 84 लाख में बिक्री?

मामला छतरपुर कोतवाली थाना क्षेत्र में स्थित पीडब्ल्यूडी की जमीन का है। यह जमीन शक्ति मेडिकल स्टोर के पास स्थित है और इसका क्षेत्रफल लगभग 4000 वर्ग फीट है।

स्थानीय बाजार मूल्यांकन के अनुसार, जमीन की वास्तविक कीमत करीब 9 करोड़ रुपए थी, लेकिन जून 2024 में इसे फर्जी दस्तावेजों और गलत कोर्ट डिक्री के आधार पर केवल 84 लाख 54 हजार रुपए में धीरेंद्र गौर और दुर्गेश पटेल के नाम कर दिया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि रजिस्ट्री पूरी तरह फर्जीवाड़ा और नियमों की अनदेखी के आधार पर की गई थी। इसमें नगर पालिका के रजिस्टर में ओवरराइटिंग भी पाई गई, जो प्रक्रिया को पूरी तरह अवैध बनाती है।


तीन अफसर सस्पेंड: प्रशासन ने फर्जीवाड़ा उजागर किया

सागर संभाग के चीफ इंजीनियर ने इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

सस्पेंड किए गए अफसरों में शामिल हैं:

  • कमलेश मिश्रा, प्रभारी SD0

  • विजय कुमार खरे, सहायक ग्रेड-3

  • राजाराम कुशवाहा, कर्मचारी

विभाग ने कहा कि इन अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश को नजरअंदाज किया और इसी लापरवाही की वजह से सरकारी जमीन निजी व्यक्तियों को बेची गई।

निलंबन के बाद, कमलेश मिश्रा का मुख्यालय पन्ना, जबकि विजय कुमार खरे का मुख्यालय नौगांव कार्यालय तय किया गया है। दोनों को जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) दिया जाएगा। वहीं, राजाराम कुशवाहा पर विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

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अनुशासनात्मक कार्रवाई और भोपाल को प्रस्ताव भेजा गया

इस मामले में तत्कालीन इंचार्ज एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आरएस शुक्ला (31 अगस्त 2025 को सेवानिवृत्त) के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भोपाल मुख्यालय भेजा गया है। इसके साथ ही कमलेश मिश्रा के खिलाफ भी जांच प्रस्ताव तैयार किया गया।

कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने तुरंत जांच के आदेश दिए और PWD कार्यपालन यंत्री आशीष भारती को जांच अधिकारी नियुक्त किया।


धीरेंद्र शास्त्री के यात्रा प्रभारी का नाम सामने – सवाल उठते हैं

जांच में यह भी सामने आया कि जमीन खरीदने वाले धीरेंद्र गौर, बागेश्वर धाम के प्रमुख पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दिल्ली से वृंदावन यात्रा प्रभारी हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा वर्षों तक चली लीगल और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। भवन मूलतः छतरपुर महाराज द्वारा सरकार को दिया गया था और नगर पालिका व नजूल रिकॉर्ड में यह अभी भी PWD विभाग के नाम पर दर्ज है।

इस मामले के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं: क्या यह फर्जीवाड़ा सीधे बाबा के करीबी से जुड़ा है या यह केवल संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत का मामला है? प्रशासन ने इस पर साफ तौर पर कहा कि जांच पूरी होने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।


प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया

मामले की जानकारी मिलते ही कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने तुरंत रजिस्ट्री और नामांतरण (mutation) पर रोक लगा दी।

साथ ही रजिस्ट्री करने वाले रजिस्ट्री लेखक रघुनंदन पाठक का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।

एडीएम मिलिंद नागदेवे ने बताया कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हुआ और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी संपत्ति को निजी हाथों में बेचा गया। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह का स्वामित्व परिवर्तन अवैध माना जाएगा।


सरकारी संपत्ति पर कब्जा और फर्जीवाड़ा

इस सरकारी जमीन घोटाले की कीमत करीब 9 करोड़ रुपए बताई गई, लेकिन इसे केवल 84 लाख रुपए में बेचने की योजना बनाई गई।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भवन में पहले किराए पर रहने वाले उपाध्याय परिवार ने भी फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इसके बाद धीरेंद्र गौर और दुर्गेश पटेल ने मिलकर सरकारी संपत्ति को अपने नाम करवा लिया।

इस पूरे मामले ने प्रशासन और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही को उजागर किया है।


PWD विभाग की हाईकोर्ट जाने की तैयारी

इस गंभीर फर्जीवाड़े के बाद PWD विभाग ने उच्च न्यायालय (High Court) जाने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि सरकारी संपत्ति की कीमत और महत्व को देखते हुए इस मामले में सख्त और तत्कालीन कार्रवाई आवश्यक है।


निष्कर्ष: छतरपुर PWD घोटाले से उठते सवाल

छतरपुर PWD घोटाला अब सरकारी संपत्ति फर्जीवाड़ा मामला बन गया है, जिसमें:

  • तीन अधिकारियों की सस्पेंशन

  • रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक

  • High Court जाने की तैयारी

शामिल हैं।

बागेश्वर धाम से जुड़े नाम और PWD अधिकारियों की मिलीभगत ने इस मामले को और संवेदनशील और गंभीर बना दिया है।

मुख्य सवाल अभी भी है: “बाबा के करीबी जुड़े या बाबा नहीं?” – इस प्रश्न का उत्तर केवल जांच पूरी होने पर ही स्पष्ट होगा।

मध्य प्रदेश प्रशासन ने अब तक कई कदम उठाए हैं, लेकिन आगे की जांच से और भी खुलासे होने की संभावना है।

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