CBI अधिकारी सीमा पाहुजा को सौंपी गई दिशा सालियान मौत मामले की जांच, जानिए कौन हैं तेजतर्रार अफसर
हाथरस, आरजी कर और कोटखाई ‘गुड़िया’ जैसे संवेदनशील मामलों की जांच में निभा चुकी हैं अहम भूमिका; गवाहों और फोरेंसिक साक्ष्यों की नए सिरे से होगी पड़ताल
नेशनल डेस्क। वर्ष 2020 में हुई सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो की वरिष्ठ अधिकारी सीमा पाहुजा की निगरानी में की जाएगी। सीमा पाहुजा वर्तमान में दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय की स्पेशल क्राइम यूनिट में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों की जांच का लंबा अनुभव है।
सीबीआई ने 13 सितंबर 2026 को दिशा सालियान की मौत के संबंध में एफआईआर दर्ज की थी। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद की गई। सीमा पाहुजा जांच की निगरानी करेंगी, जबकि डिप्टी एसपी पूरन कुमार को जांच अधिकारी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। उनके साथ केंद्रीय एजेंसी के अन्य अधिकारी भी जांच टीम में शामिल रहेंगे।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में एफआईआर में दर्ज लोगों अथवा आरोपों को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं। जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, इसलिए सीबीआई की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
आठ जून 2020 को हुई थी दिशा सालियान की मौत
दिशा सालियान की आठ जून 2020 को मुंबई के मलाड स्थित एक आवासीय इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर रह चुकी थीं। दिशा की मौत के कुछ दिनों बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित आवास पर मृत पाए गए थे।
मुंबई पुलिस ने दिशा की मौत के मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट दर्ज कर जांच की थी। दिशा के पिता सतीश सालियान ने बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए बेटी की मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया और स्वतंत्र जांच की मांग की।
हाईकोर्ट ने सितंबर 2026 में सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया। इसके बाद सतीश सालियान का बयान दर्ज किया गया और 13 सितंबर को केंद्रीय एजेंसी ने प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ की।
जांच के केंद्र में रहेगी आठ जून की रात
सीबीआई की जांच का मुख्य केंद्र आठ जून 2020 की रात हुई घटनाएं रहेंगी। जांच एजेंसी उस रात दिशा के मंगेतर रोहन रॉय के मुंबई स्थित आवास पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर सकती है।
सीबीआई यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि घटना से पहले दिशा ने किन लोगों से बात की थी, वह किस मानसिक स्थिति में थीं और इमारत में मौजूद लोगों ने क्या देखा अथवा सुना था। मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल संवाद और अन्य उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा सकता है।
घटनास्थल से संबंधित रिकॉर्ड, इमारत की सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश रजिस्टर और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी। घटना को छह वर्ष से अधिक समय बीतने के कारण जांच टीम के सामने पुराने रिकॉर्ड और साक्ष्यों को एकत्र करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
मुंबई पुलिस की पुरानी जांच भी जांचेगी CBI
केंद्रीय जांच एजेंसी मुंबई पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के दस्तावेजों की समीक्षा करेगी। इसमें आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट, गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।
प्रारंभिक जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाने की संभावना है। सीबीआई यह देखेगी कि उस समय सभी जरूरी साक्ष्य एकत्र किए गए थे या नहीं और जांच प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था अथवा नहीं।
एजेंसी पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों और फोरेंसिक विशेषज्ञों से भी जानकारी प्राप्त कर सकती है। उपलब्ध चिकित्सा और फोरेंसिक साक्ष्यों को जोड़कर दिशा की मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा।
कौन हैं सीमा पाहुजा?
सीमा पाहुजा सीबीआई की अनुभवी अधिकारियों में शामिल हैं। वर्तमान में वह सीबीआई मुख्यालय की स्पेशल क्राइम-II यूनिट में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वह इससे पहले गाजियाबाद स्थित सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में भी सेवाएं दे चुकी हैं।
संवेदनशील आपराधिक मामलों की जांच में उनके कार्य को देखते हुए उन्हें वर्ष 2014 में पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। जांच एजेंसी में सीमा पाहुजा को कठिन परिस्थितियों में साक्ष्य जुटाने और जटिल मामलों की जांच करने वाली अधिकारी के रूप में जाना जाता है।
हाथरस मामले की जांच टीम का किया नेतृत्व
उत्तर प्रदेश के वर्ष 2020 के हाथरस प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी जाने के बाद सीमा पाहुजा ने 14 सदस्यीय विशेष टीम का नेतृत्व किया था। जांच टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ गवाहों और पीड़ित परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए थे।
सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद दिसंबर 2020 में चार आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र प्रस्तुत किया था। इसलिए इस मामले में सीमा पाहुजा की भूमिका को जांच टीम का नेतृत्व करने के रूप में लिखा जाना अधिक उचित है; अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय ने सुनाया था।
आरजी कर मामले की जांच में भी रहीं शामिल
सीमा पाहुजा को वर्ष 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रशिक्षु महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या की जांच करने वाली सीबीआई टीम में भी शामिल किया गया था।
कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद केंद्रीय एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम कोलकाता पहुंची थी। सीमा पाहुजा ने गवाहों से पूछताछ, फोरेंसिक साक्ष्यों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कोटखाई ‘गुड़िया’ मामले का भी अनुभव
हिमाचल प्रदेश के चर्चित कोटखाई ‘गुड़िया’ दुष्कर्म एवं हत्या मामले की जांच का दायित्व भी सीमा पाहुजा को सौंपा गया था। इस मामले में सीबीआई टीम ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया था।
इन मामलों के अलावा सीमा पाहुजा ने कई अन्य संवेदनशील आपराधिक मामलों में भी जांच संबंधी जिम्मेदारियां संभाली हैं। इसी अनुभव को देखते हुए दिशा सालियान प्रकरण की निगरानी उन्हें सौंपे जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
साक्ष्य के आधार पर आगे बढ़ेगी जांच
सीबीआई सबसे पहले उपलब्ध दस्तावेजों, पुरानी पुलिस जांच और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। इसके बाद संबंधित गवाहों, पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और अन्य लोगों के बयान लिए जा सकते हैं।
जांच का उद्देश्य यह निर्धारित करना होगा कि दिशा सालियान की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या प्रारंभिक जांच में कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट गया था। आरोपों की पुष्टि होने पर एजेंसी आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है। आरोप प्रमाणित नहीं होने पर उसकी जानकारी भी जांच रिपोर्ट में दर्ज की जाएगी।
फिलहाल यह मामला जांच के चरण में है। किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता या आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर होगा
