कानपुर दवा कारोबारी हत्याकांड: बेटे सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद बदली जांच की दिशा, पारिवारिक विवाद की पड़ताल जारी
दैनिक स्वराज वाणी | कानपुर
कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की जांच में नया मोड़ आया है। पुलिस ने उनके बेटे सुब्रत को गिरफ्तार किया है। जांच अधिकारियों का आरोप है कि सुब्रत ने पिता की हत्या की साजिश रची और वारदात को अंजाम देने के लिए दो लोगों से संपर्क किया। इससे पहले पुलिस ने मामले में सुब्रत की पत्नी शालू और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अब पुलिस परिवार के भीतर चल रहे विवाद, पैसों के लेनदेन और आरोपियों के बयानों की दोबारा जांच कर रही है। ये जांच के आरोप हैं; किसकी क्या भूमिका थी, इस पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
5 सितंबर को घर में हुई थी हत्या
विनीत मिनोचा की 5 सितंबर को कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र स्थित उनके अपार्टमेंट में हत्या हुई थी। पुलिस जांच के अनुसार, उन पर धारदार हथियार से कई वार किए गए। घटना के बाद यह पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और घर तक पहुंचने के रास्तों की जांच की गई कि हमलावर अंदर कैसे पहुंचे। पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी राज किशोर का नाम सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया।
पहले बहू शालू पर था संदेह
जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने सुब्रत की पत्नी शालू को भी गिरफ्तार किया था। उस समय पूर्व कर्मचारी विशाल के बयान और अन्य जांच बिंदुओं के आधार पर उनकी भूमिका पर संदेह जताया गया। हालांकि, बाद की पूछताछ में जांच की दिशा बदली। पुलिस के अनुसार, अब तक जुटाई गई जानकारी में शालू के खिलाफ पहले लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने वाले साक्ष्य सामने नहीं आए हैं। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें अभी क्लीन चिट नहीं दी गई है और उनकी भूमिका की जांच जारी है।
इस बदलाव के कारण मामले के शुरुआती निष्कर्षों को अंतिम सच मानना उचित नहीं होगा। पुलिस कॉल रिकॉर्ड, बयानों और अन्य साक्ष्यों को मिलाकर घटनाक्रम स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि साजिश में कौन शामिल था और किसकी भूमिका के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण हैं।
पूर्व कर्मचारी के बयान के बाद बेटा गिरफ्तार
रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ के दौरान पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम ने पुलिस से कहा कि सुब्रत ने अपने पिता की हत्या कराने को कहा था और इसके बदले छह लाख रुपये देने की बात की थी। विशाल ने यह दावा भी किया कि पकड़े जाने पर उसे शालू का नाम लेने के लिए कहा गया था। पुलिस ने इस बयान के बाद सुब्रत को गिरफ्तार किया। हालांकि, किसी आरोपी का बयान अकेले पूरे घटनाक्रम का अंतिम प्रमाण नहीं है; जांच एजेंसी उसके दावों की पुष्टि अन्य साक्ष्यों से करेगी।
पारिवारिक तनाव और आर्थिक पहलुओं की जांच
पुलिस जांच में पिता-पुत्र के रिश्तों में तनाव और परिवार के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेद सामने आने की बात कही गई है। कुछ रिपोर्टों में कर्ज तथा कारोबार से जुड़े विवादों का भी उल्लेख है। जांच अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि इन परिस्थितियों का हत्या से कोई संबंध था या नहीं। किसी पारिवारिक विवाद को हत्या का सिद्ध कारण मानने के लिए उसके समर्थन में ठोस साक्ष्य आवश्यक होंगे।
प्रकाशित खबर के शीर्षक में मां के कथित शब्द ‘इनका कुछ करो’ का उल्लेख है। उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टों से इस कथन का संदर्भ और इसका अर्थ स्पष्ट नहीं होता। इसलिए इसे हत्या का निर्देश या साजिश में शामिल होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। परिवार के किसी सदस्य के बारे में निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
अब किन सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस?
जांच के लिए अहम सवाल यह है कि हत्या की योजना किसने बनाई, आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क था और पैसों के लेनदेन के दावे का क्या प्रमाण है। शालू की भूमिका को लेकर शुरुआती और बाद के बयानों में अंतर भी स्पष्ट होना बाकी है। पुलिस जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट अदालत में रखेगी। फिलहाल सुब्रत की गिरफ्तारी जांच का महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन हत्याकांड में सभी आरोपियों की जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है।
