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BSE मार्केट कैप में 6.83 लाख करोड़ रुपये की कमी, अमेरिकी बाजार का भी प्रभाव

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Published On: 13 February 2026
BSE Market Cap Drops by ₹6.83 Lakh Crore, Impact of US Market Felt
— BSE Market Cap Drops by ₹6.83 Lakh Crore, Impact of US Market Felt

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भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को आई भारी गिरावट, निवेशकों में चिंता

BSE Market Cap Drops by ₹6.83 Lakh Crore : शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों के पोर्टफोलियो को लाल निशान में डाल दिया। अमेरिकी शेयर बाजार में आई भारी गिरावट का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और इसके कारण निवेशकों में डर और असमंजस की स्थिति बन गई। इस गिरावट का असर आईटी सेक्टर, रियल एस्टेट, बैंकिंग, मेटल और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसे प्रमुख सेक्टरों में देखा गया। इस दौरान टीसीएस, इंफोसिस और रिलायंस जैसे बड़े शेयरों ने गिरावट में सबसे ज्यादा योगदान किया।

सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन

शुक्रवार को सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स में 1,048 अंकों या 1.25% की गिरावट दर्ज की गई और यह 82,626 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 336 अंकों या 1.30% की गिरावट देखी गई, जिससे यह 25,471 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी में भी 553 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई।

शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों में दबाव के कारण बाजार गिरा, लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ा, अन्य सेक्टरों में भी बिकवाली शुरू हो गई। मेटल, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रियल एस्टेट, एनर्जी, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में भी भारी गिरावट देखी गई। यह संकेत है कि गिरावट व्यापक स्तर पर हुई और केवल किसी एक सेक्टर या कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रही।

BSE के टॉप 30 शेयरों का हाल

BSE के टॉप 30 शेयरों में से बजाज फाइनेंस और एसबीआई को छोड़कर बाकी सभी 28 शेयर गिरावट पर बंद हुए। सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई हिंदुस्तान यूनिलीवर, एटर्नल, टाइटन, टाटा स्टील और टीसीएस के शेयरों में, जिनकी कीमत करीब 5% तक गिर गई। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी, क्योंकि यह दिखाता है कि केवल आईटी सेक्टर ही नहीं बल्कि अन्य प्रमुख सेक्टर भी वृहद स्तर पर दबाव में हैं।

गिरावट के पीछे का कारण

शेयर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी शेयरों में आई गिरावट का मुख्य कारण एआई (Artificial Intelligence) के तेजी से बढ़ते प्रभाव और तकनीकी व्यवधान से उत्पन्न अनिश्चितता है।

मयूरेश जोशी, इक्विटी रिसर्च प्रमुख, विलियम ओ’नील इंडिया ने बिजनेस टुडे को बताया:

“आईटी सेक्टर में बड़ा बदलाव आ रहा है। बेहतर AI एजेंट और मजबूत एप्लिकेशन लेयर बनाने की होड़ न केवल आईटी सेक्टर में, बल्कि इससे जुड़े उपभोक्ता उद्योगों में भी व्यवधान पैदा कर सकती है। हमें बस कुछ समय के लिए रुककर यह देखना चाहिए कि बदलाव का असर कैसा होगा।”

AI तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने निवेशकों में अनिश्चितता और डर पैदा कर दिया है। निवेशक सोच रहे हैं कि पारंपरिक व्यवसाय मॉडल और आईटी सेक्टर में आने वाले बदलाव उनके निवेश को कैसे प्रभावित करेंगे।

BSE मार्केट कैप में भारी नुकसान

शुक्रवार को बीएसई मार्केट कैप में भी भारी कमी आई। गुरुवार को बीएसई मार्केट कैप 472.48 लाख करोड़ रुपये था, जबकि शुक्रवार को यह 465.31 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। यानी केवल एक दिन में लगभग 6.83 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

यदि अमेरिकी बाजार की बात करें, तोBSE तीन दिनों में वहां लगभग 90 लाख करोड़ रुपये की हानि हुई। यह दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर भी बाजार में अस्थिरता और बेचैनी बनी हुई है। अमेरिका के बाजार में गिरावट का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ा, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

आईटी सेक्टर और AI का प्रभाव

विशेष रूप से आईटी सेक्टर में गिरावट का मुख्य कारण एआई आधारित तकनीकी व्यवधान माना जा रहा है। AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक व्यापार मॉडल को चुनौती दी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI आधारित एप्लिकेशन और एजेंट्स पारंपरिक व्यवसायों के लिए खतरा बन सकते हैं।

इस समय निवेशकों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि AI के इस तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण कंपनियों के राजस्व और मुनाफे पर क्या असर पड़ेगा। यदि कंपनियां समय के साथ AI तकनीक को अपनाने में सक्षम नहीं होती हैं, तो उनके शेयरों में और गिरावट आ सकती है।

निवेशकों के लिए सावधानियाँ

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना चाहिए। तकनीकी बदलाव और AI के बढ़ते प्रभाव से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को निम्नलिखित सावधानियाँ अपनानी चाहिए:

  1. किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले विशेषज्ञ या वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।
  2. IT और AI आधारित सेक्टर में निवेश करते समय दीर्घकालिक प्रभाव और जोखिम को ध्यान में रखें।
  3. बाजार में वृहद स्तर पर बिकवाली के समय धैर्य बनाए रखें और भावनात्मक निर्णय से बचें।
  4. निवेश करते समय पोर्टफोलियो में विविधता रखें ताकि जोखिम कम किया जा सके।

निष्कर्ष

शुक्रवार की भारी गिरावट ने यह साबित किया कि वैश्विक आर्थिक हालात और तकनीकी बदलाव सीधे भारतीय शेयर बाजार पर असर डाल सकते हैं। AI और तकनीकी एजेंट्स के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक व्यापार मॉडल में अनिश्चितता पैदा कर दी है। निवेशकों को अब और अधिक सतर्क रहना होगा और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना होगा।

नोट: किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद लेना बेहद जरूरी है।

भारतीय बाजार की यह गिरावट यह संदेश देती है कि वैश्विक आर्थिक माहौल और तकनीकी परिवर्तन केवल निवेशकों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे उद्योग और आर्थिक संरचना के लिए चुनौती बन सकते हैं। इसलिए निवेशकों को स्थिति को समझकर और सतर्कता के साथ कदम उठाना चाहिए।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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