सारंगपुर उप जेल में ब्रह्माकुमारी बहनों ने मनाया अलौकिक रक्षाबंधन
संवाददाता :मनोज कुमार पुष्पद
बंदी भाइयों को राखी बांधकर दिलाया बुराइयों से दूर रहने का संकल्प
सारंगपुर। रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर सारंगपुर उप जेल में ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा विशेष आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्था की स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी बहन एवं ब्रह्माकुमारी प्रीति बहन ने उप जेल में निरुद्ध बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उन्हें आत्मिक प्रेम, भाईचारे, शांति तथा सकारात्मक जीवन का संदेश दिया।
कार्यक्रम को सामान्य रक्षाबंधन से अलग आध्यात्मिक भाव के साथ आयोजित किया गया। ब्रह्माकुमारी बहनों ने बंदी भाइयों को समझाया कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व नहीं है, बल्कि यह स्वयं को जीवन की बुराइयों, नकारात्मक विचारों और विकारों से दूर रखने का संकल्प लेने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि मनुष्य चाहे जिस परिस्थिति में हो, अपने विचारों और संस्कारों में सकारात्मक परिवर्तन लाकर जीवन को नई दिशा दे सकता है।
आत्मिक प्रेम और भाईचारे का दिया संदेश
रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी बहनों ने बंदी भाइयों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि राखी का धागा केवल एक पारंपरिक प्रतीक नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, आत्मीयता और जिम्मेदारी की भावना का प्रतीक है।
उन्होंने बंदियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में आने वाली परिस्थितियां हमेशा मनुष्य के नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन उन परिस्थितियों के प्रति व्यक्ति का दृष्टिकोण उसके अपने हाथ में होता है। यदि कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच बनाए रखी जाए तो व्यक्ति अपने जीवन में परिवर्तन की शुरुआत कर सकता है।
ब्रह्माकुमारी बहनों ने कहा कि मन में प्रेम, शांति, सद्भाव और सकारात्मक विचारों को स्थान देने से व्यक्ति के व्यवहार और जीवनशैली में भी बदलाव आता है। इसी सकारात्मक सोच के माध्यम से समाज में बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकता है।
बंदी भाइयों की कलाई पर बांधी राखी
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी बहनों ने एक-एक कर बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान उन्होंने सभी के सुखद और शांतिपूर्ण भविष्य की कामना की। बंदियों ने भी पूरे सम्मान और आत्मीयता के साथ इस आयोजन में भाग लिया।
राखी बांधने के दौरान बंदी भाइयों को बुरी आदतों और नकारात्मक सोच से दूर रहने तथा अच्छे संस्कारों को अपनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे मानवता, संवेदना और आध्यात्मिकता से जुड़ा आयोजन बताया।
बंदियों के लिए जेल परिसर में इस तरह का कार्यक्रम भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा। रक्षाबंधन के अवसर पर उन्हें समाज और परिवार से जुड़े रिश्तों की आत्मीयता का अनुभव कराने का प्रयास किया गया।
जेलर और अधिकारियों ने भी बंधवाई राखी
इस अवसर पर सारंगपुर उप जेल के जेलर भ्राता विकास जैन, अनुविभागीय अधिकारी सहित जेल के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भी ब्रह्माकुमारी बहनों से राखी बंधवाई।
जेल प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए रक्षाबंधन के आध्यात्मिक संदेश को स्वीकार किया। इस दौरान ब्रह्माकुमारी बहनों का जेल प्रशासन एवं स्टाफ द्वारा स्वागत किया गया।
अधिकारियों ने संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि जेल में इस तरह के आध्यात्मिक और सकारात्मक कार्यक्रम बंदियों के मानसिक एवं सामाजिक परिवर्तन की दिशा में प्रेरणादायी भूमिका निभा सकते हैं।
बुराइयों और विकारों से दूर रहने की प्रेरणा
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदी भाइयों को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना रहा। ब्रह्माकुमारी बहनों ने कहा कि व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद नकारात्मक विचारों और गलत आदतों को पहचानकर उनसे दूर होने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने समझाया कि मनुष्य की सोच उसके व्यवहार को प्रभावित करती है। सकारात्मक विचारों को अपनाने से व्यक्ति के व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन आता है। इसलिए जीवन को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले विचारों को बेहतर बनाना आवश्यक है।
बंदियों को यह संदेश दिया गया कि बीते समय में हुई गलतियों से सीख लेकर वर्तमान को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। पुरानी गलतियों को लेकर निराश रहने के बजाय भविष्य के लिए नई दिशा तय करना ही वास्तविक बदलाव है।
परिस्थितियां बदलने के साथ सोच बदलना भी जरूरी
ब्रह्माकुमारी बहनों ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। कभी परिस्थितियां अनुकूल होती हैं तो कभी कठिन समय का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में मनुष्य को परिस्थितियों से हार मानने के बजाय अपनी सोच और दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने बंदी भाइयों से कहा कि वर्तमान समय आत्मचिंतन का अवसर हो सकता है। व्यक्ति अपने जीवन की पिछली घटनाओं से सीख लेकर यह तय कर सकता है कि भविष्य में उसे किस प्रकार का जीवन जीना है।
उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, सकारात्मक सोच, अच्छे संस्कार और सही निर्णय व्यक्ति को जीवन की नई शुरुआत करने की प्रेरणा दे सकते हैं।
बीते समय से सीख लेकर भविष्य सुधारने का संदेश
कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि बीते हुए समय को बदला नहीं जा सकता, लेकिन उससे सीख जरूर ली जा सकती है। व्यक्ति अपने वर्तमान को बेहतर बनाकर भविष्य की दिशा बदल सकता है।
ब्रह्माकुमारी बहनों ने बंदियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में हुई गलतियों को स्वीकार करना और उनसे सीखना सुधार की पहली सीढ़ी है। इसके बाद व्यक्ति को अच्छे विचारों और सकारात्मक व्यवहार के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर बदलाव की क्षमता हमेशा बनी रहती है। जरूरत केवल दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच की होती है।
जेल परिसर में बना सकारात्मक माहौल
रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान सारंगपुर उप जेल परिसर में आत्मीयता और सकारात्मकता का वातावरण देखने को मिला। बंदी भाइयों ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए ब्रह्माकुमारी बहनों से राखी बंधवाई और उनके संदेशों को सुना।
रक्षाबंधन जैसे पर्व के माध्यम से बंदियों को यह अनुभव कराने का प्रयास किया गया कि वे समाज का हिस्सा हैं और उनके जीवन में भी सकारात्मक बदलाव की संभावना हमेशा मौजूद है।
कार्यक्रम में प्रेम, शांति, भाईचारे और सद्भावना की भावना प्रमुख रही। इस दौरान उपस्थित जेल स्टाफ ने भी कार्यक्रम में सहयोग किया।
सामाजिक और आध्यात्मिक पहल की सराहना
उप जेल प्रशासन और स्टाफ ने ब्रह्माकुमारीज संस्था की इस पहल की सराहना की। अधिकारियों का मानना रहा कि जेल में आयोजित होने वाले आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम बंदियों को सकारात्मक वातावरण देने में उपयोगी हो सकते हैं।
ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को आत्मचिंतन करने, अपनी गलतियों से सीखने और भविष्य में बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। रक्षाबंधन के इस आयोजन में धार्मिक भावना के साथ-साथ मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिखाई दिया।
रक्षाबंधन को बनाया आत्म-सुधार का अवसर
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ केवल राखी बांधना नहीं है। यह स्वयं की रक्षा का भी पर्व है—ऐसी रक्षा जिसमें व्यक्ति अपने मन को नकारात्मक विचारों, बुराइयों और गलत आदतों से बचाने का संकल्प ले।
ब्रह्माकुमारी बहनों ने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में प्रेम, शांति, सद्भाव और सकारात्मक सोच को अपनाता है तो उसके जीवन में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
उन्होंने बंदी भाइयों को प्रेरित किया कि वे स्वयं को कमजोर न समझें और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।
आत्मचिंतन और सकारात्मक बदलाव का संदेश
सारंगपुर उप जेल में आयोजित अलौकिक रक्षाबंधन कार्यक्रम का समापन सकारात्मक संदेश के साथ हुआ। ब्रह्माकुमारी बहनों ने सभी बंदी भाइयों, जेल अधिकारियों और कर्मचारियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने सभी से जीवन में प्रेम, शांति, सद्भाव और अच्छे विचारों को अपनाने का आह्वान किया। साथ ही बंदियों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने तथा सत्य और अच्छे संस्कारों के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इस प्रकार सारंगपुर उप जेल में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आत्मचिंतन, आत्म-सुधार और सकारात्मक जीवन की ओर बढ़ने का संदेश देने वाला आयोजन बना। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि मनुष्य चाहे किसी भी परिस्थिति में हो, यदि वह अपने विचारों और संस्कारों में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प ले तो जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।
