Indore में भाजयुमो और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पथराव
Indore में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच विवादास्पद झड़प हुई। यह घटना दिल्ली में हुए भारत AI समिट (Bharat AI Summit 2026) के दौरान कांग्रेसियों द्वारा किए प्रदर्शन के विरोध में हुई। भाजयुमो कार्यकर्ता इंदौर कांग्रेस कार्यालय और गांधी भवन के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और एक-दूसरे पर पत्थर, संतरे, टमाटर और पानी की बोतलें फेंकी गईं। घटना के दौरान हालात पूरी तरह से बेकाबू हो गए, जिससे पुलिस को वाटर कैनन का उपयोग करना पड़ा और बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की गई।
SI आरएस बघेल घायल
इस पथराव के दौरान पुलिस की तरफ से मोर्चा संभालने वाले सब-इंस्पेक्टर आरएस बघेल (SI RS Baghel) घायल हो गए। जानकारी के अनुसार उनके सीने पर एक बड़ा पत्थर लगा, जिससे उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। घायल होने के बाद उनके स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए मेडिकल टीम ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया।
एसआई आरएस बघेल के घायल होने की खबर से पूरे इलाके में तनाव फैल गया। मौके पर मौजूद कई पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने देखा कि दोनों पक्ष आपस में भिड़ते रहे और पुलिस उन्हें नियंत्रित करने के लिए सक्रिय रही।
विरोध प्रदर्शन की वजह
बीते 20 फरवरी को दिल्ली में भारत AI समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इवेंट स्थल में अर्धनग्न प्रदर्शन किया था। इसके विरोध में आज देशभर में भाजयुमो विरोध प्रदर्शन कर रही थी। इंदौर में यह प्रदर्शन विशेष रूप से कांग्रेस कार्यालय और गांधी भवन के बाहर आयोजित किया गया।
भाजयुमो कार्यकर्ताओं का कहना था कि कांग्रेस द्वारा यह प्रदर्शन अनुचित और आपत्तिजनक था, जिससे युवा संगठन को आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ा। कार्यकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन से कहा कि वे इस तरह के किसी भी विरोध या प्रदर्शन को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
पुलिस का कार्य और नियंत्रण
घटना के दौरान इंदौर पुलिस ने मौके पर तेजी से कार्रवाई की। बैरिकेडिंग लगाकर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया और सुरक्षा के लिए वाटर कैनन का उपयोग किया गया। पुलिस का उद्देश्य था कि प्रदर्शन हिंसक रूप न ले और नागरिकों तथा अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति गंभीर थी क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पथराव कर रहे थे। इसी दौरान एसआई आरएस बघेल घायल हो गए। पुलिस ने घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया और तनाव को नियंत्रित करने के लिए आसपास के मार्गों को भी बंद किया।
भाजपा युवा मोर्चा का बयान
भाजयुमो नेताओं ने कहा कि वे देशभर में कांग्रेस के अर्धनग्न प्रदर्शन के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। उनका कहना था कि इस प्रकार के प्रदर्शन से समाज में अशांति फैलती है और युवा मोर्चा इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगा।
भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को धन्यवाद दिया कि उन्होंने हिंसा को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे प्रदर्शन को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा युवा मोर्चा द्वारा हिंसक प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके अनुसार, राजनीतिक विरोध का सही तरीका शांतिपूर्ण ढंग से होना चाहिए।
कांग्रेस के नेताओं ने यह भी कहा कि दिल्ली में हुए AI समिट प्रदर्शन का उद्देश्य केवल सामाजिक मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना था और कोई भी व्यक्तिगत या हिंसक इरादा इसमें नहीं था।
घटनास्थल का दृश्य
मौके पर मौजूद नागरिकों और मीडिया कर्मियों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस को वाटर कैनन और बैरिकेडिंग का इस्तेमाल करना पड़ा। पत्थर, संतरे और टमाटर उड़ते रहे और कई लोग मामूली चोटें भी आईं।
स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों ने पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया की सराहना की, क्योंकि तेजी से नियंत्रण न होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
भविष्य के लिए प्रशासनिक योजना
इंदौर पुलिस ने इस घटना के बाद चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसे प्रदर्शन और हिंसक झड़प को रोकने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। प्रशासन ने घोषणा की कि प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रमों के लिए सभी पक्षों को पहले अनुमति लेनी होगी और नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
एसआई आरएस बघेल के घायल होने की घटना को लेकर भी जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
Indore में भाजपा युवा मोर्चा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प ने यह दिखाया कि राजनीतिक विरोध और प्रदर्शन को नियंत्रित करना कितना महत्वपूर्ण है। एसआई आरएस बघेल के घायल होने की घटना ने प्रशासन और सुरक्षा बलों की चुनौतियों को उजागर किया।
इस घटना ने यह भी संकेत दिया कि देशभर में राजनीतिक प्रदर्शन और विरोध की स्थिति कभी-कभी हिंसक रूप ले सकती है, जिससे पुलिस और प्रशासन की सक्रिय भूमिका आवश्यक हो जाती है।
