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इंदौर BJP किसान मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर घमासान, नामों को लेकर तकरार तेज

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Published On: 28 May 2026
इंदौर BJP किसान मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर घमासान, नामों को लेकर तकरार तेज

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इंदौर BJP किसान मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर घमासान, नामों को लेकर तकरार तेज

इंदौर। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के किसान मोर्चा में अध्यक्ष पद को लेकर इंदौर में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। संगठन के भीतर नेतृत्व चयन को लेकर अलग-अलग गुट आमने-सामने आ गए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। जहां एक ओर किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा अपनी पसंद से इंदौर का अध्यक्ष तय करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर तीन विधायकों सहित कई स्थानीय नेताओं ने एक अलग नाम पर सहमति जताई है।

जयपाल सिंह चावड़ा अपनी पसंद पर अड़े

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा इंदौर किसान मोर्चा अध्यक्ष पद पर अपने करीबी और भरोसेमंद व्यक्ति को जिम्मेदारी देना चाहते हैं। उनका मानना है कि संगठन को मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, इसलिए चयन सोच-समझकर किया जाना चाहिए।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर संगठन के भीतर असहमति भी सामने आ रही है। कुछ नेताओं का कहना है कि चयन प्रक्रिया में स्थानीय कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विधायकों का एकजुट रुख

इधर, इंदौर के तीन विधायकों ने एक ही नाम पर सहमति जताई है और उसी उम्मीदवार को अध्यक्ष बनाए जाने की मांग की है। इन नेताओं का तर्क है कि संबंधित व्यक्ति लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं और कई बार महामंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

विधायकों का कहना है कि अनुभव और संगठनात्मक कार्यों में योगदान को देखते हुए उन्हें अब नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। इस पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भी अपनी राय से अवगत कराया है।

नेतृत्व चयन पर उठे सवाल

प्रदेश अध्यक्ष चावड़ा द्वारा उठाए गए कुछ तर्कों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि जिस नाम पर सहमति बन रही है, वह व्यक्ति सीधे तौर पर किसान पृष्ठभूमि से नहीं आता, इसलिए किसान मोर्चा के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता।

हालांकि, इस तर्क पर विरोधी गुट का कहना है कि संगठन में योग्यता और अनुभव ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, न कि केवल पृष्ठभूमि। उनका यह भी कहना है कि कई पदाधिकारियों की पृष्ठभूमि किसान नहीं है, फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।

रामेश्वर पटेल का नाम भी चर्चा में

इस बीच, इंदौर किसान मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए रामेश्वर पटेल उर्फ गुड्डा का नाम भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि वे वर्तमान नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

उनके समर्थन में यह तर्क दिया जा रहा है कि वे स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं और विभिन्न सामाजिक समीकरणों को साधने में सक्षम हैं। खासकर देपालपुर विधानसभा क्षेत्र में उनका प्रभाव बताया जा रहा है।

अनिल बौरासी सबसे मजबूत दावेदार

हालांकि इस पूरे विवाद में सबसे मजबूत नाम तीन बार के महामंत्री अनिल बौरासी का माना जा रहा है। वे लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं और जमीनी स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ है।

उनके समर्थन में इंदौर के तीन विधायक—महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा और गोलू शुक्ला—भी खुलकर सामने आ चुके हैं। इसके अलावा किसान नेता रवि रावलिया ने भी उनके पक्ष में समर्थन जताया है।

समर्थकों का कहना है कि बौरासी संगठन में वर्षों से कार्यरत हैं और उन्हें अब नेतृत्व का अवसर दिया जाना चाहिए।

राजनीतिक तर्क और गुटबाजी

इस पूरे विवाद में राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एक तरफ संगठन नेतृत्व अपनी पसंद को आगे बढ़ाने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ स्थानीय विधायक और नेता अनुभव को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।

इस टकराव के कारण किसान मोर्चा में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है, जिससे संगठनात्मक एकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

आगे की रणनीति पर नजर

फिलहाल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन की ओर से इंदौर किसान मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान के बीच यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में संगठन का शीर्ष नेतृत्व सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करेगा और आपसी सहमति के आधार पर किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाने की कोशिश करेगा। इस प्रक्रिया में स्थानीय नेताओं, विधायकों और मोर्चा पदाधिकारियों की राय को भी अहम माना जा रहा है।

इंदौर किसान मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर उपजा यह विवाद अब केवल एक सामान्य संगठनात्मक चयन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धीरे-धीरे राजनीतिक शक्ति संतुलन और प्रभाव की लड़ाई का रूप लेता जा रहा है। विभिन्न गुटों की सक्रियता और अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन ने इस मुद्दे को और अधिक जटिल बना दिया है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने संतुलन साधना एक बड़ी चुनौती बन गई है।

निष्कर्ष

इंदौर भाजपा किसान मोर्चा में अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा यह विवाद संगठन के भीतर बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष को उजागर करता है। जहां एक ओर अनुभव और जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर संगठन नेतृत्व अपनी रणनीतिक पसंद को आगे बढ़ाना चाहता है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी हाईकमान किस नाम पर अंतिम मुहर लगाता है और क्या यह विवाद जल्द खत्म हो पाएगा या आगे और गहराएगा।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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