स्थापना दिवस पर विशेष: शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर आज 44 साल का हुआ। जानें कैसे 2 सांसदों से शुरू हुई पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनी।
कम उम्र, बड़ा दबदबा
भोपाल। भारतीय राजनीति के इतिहास में शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। आज यानी 6 अप्रैल, 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपना 44वां स्थापना दिवस मना रही है। यह दिन उस पार्टी के लिए ऐतिहासिक है, जिसकी उम्र भले ही कांग्रेस के मुकाबले आधी हो, लेकिन आकार और प्रभाव में वह न केवल भारत बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय संबोधन से लेकर देशभर के बूथों तक, पार्टी आज अपनी इस यात्रा पर गर्व महसूस कर रही है। लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं था। एक समय था जब भाजपा के पास केवल 2 सांसद थे और आलोचक उसे ‘दो नंबर की पार्टी’ कहकर खारिज कर देते थे। आज वही पार्टी 303 सांसदों के साथ लोकसभा में अपना परचम लहरा रही है।
जनता पार्टी से अलगाव: भाजपा का जन्म कैसे हुआ?
शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर समझने के लिए 1977 के आपातकाल के बाद के दौर को समझना जरूरी है। आपातकाल की विभीषिका के खिलाफ उठे जनाक्रोश ने जनता पार्टी को सत्ता दिलाई, लेकिन यह गठबंधन ज्यादा दिन नहीं टिका। मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली इस सरकार में अंतर्विरोध सतह पर आने लगे।
सबसे बड़ा मुद्दा था ‘दोहरी सदस्यता’। भारतीय जनसंघ के पूर्व सदस्य, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे, उन पर संगठन के प्रति वफादारी सवाल खड़े किए जाने लगे। 4 अप्रैल, 1980 को जनता पार्टी ने स्पष्ट कर दिया कि उसका सदस्य RSS का सदस्य नहीं हो सकता।इसी असंतोष के चलते, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने जनता पार्टी छोड़ने का फैसला किया। 6 अप्रैल, 1980 को एक नए संगठन ‘भारतीय जनता पार्टी’ की घोषणा हुई। अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने। तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर इतना शानदार होगा।
शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर: आंकड़ों की जुबानी
| वर्ष (Year) | लोकसभा सीटें (Seats) | स्थिति (Status) |
|---|---|---|
| 1984 | 2 | भारी हार, ‘शून्य’ के करीब |
| 1989 | 85 | वापसी की शुरुआत |
| 1991 | 120 | मजबूत विपक्ष |
| 1996 | 161 | सबसे बड़ी पार्टी |
| 1998-99 | 182 / 303 | सत्ता में वापसी |
| 2014 | 282 | पूर्ण बहुमत (मोदी लहर) |
| 2019 | 303 | शिखर (अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा) |
1984 के चुनावों में जहां भाजपा सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गई थी, वहीं कांग्रेस ने रिकॉर्ड 404 सीटें जीतीं। उस समय भाजपा के समाप्त होने की अटकलें लगाई जाने लगी थीं। लेकिन सच्चे कार्यकर्ताओं के बल पर, शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर 1989 में 85 सीटों के साथ नए सिरे से शुरू हुआ।
राम मंदिर से लेकर सुशासन तक: विचारधारा की ताकत
शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर सिर्फ राजनीतिक अवसरवाद का नहीं, बल्कि एक सुसंगत विचारधारा का परिणाम है। पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ के सिद्धांतों ने भाजपा को बाकी दलों से अलग किया।जहां अन्य दल ‘विचारधारा शून्यता’ का शिकार हैं और सत्ता के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं, वहीं भाजपा ने ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ को अपनी आत्मा माना। 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन ने पार्टी को जमीनी स्तर पर एक नई पहचान दी। यह आंदोलन सिर्फ एक मस्जिद-मंदिर का विवाद नहीं था, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनः प्राप्त करने का प्रतीक था।
नरेंद्र मोदी का युग: सकारात्मक सुशासन की नई इबारत
2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर ने गति पकड़ी। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” का मंत्र देते हुए, भाजपा सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाया।दस वर्षों से अधिक समय से चल रही यह सरकार जहां जनधन, आवास, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, वहीं कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, राम मंदिर निर्माण और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे ऐतिहासिक फैसले लिए हैं।
निष्कर्ष: विचारधारा शून्यता के बीच एक भरोसेमंद विकल्प
भाजपा की यात्रा भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक है। शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर हमें सिखाता है कि यदि संगठन में दम हो, कार्यकर्ता समर्पित हों और विचारधारा स्पष्ट हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।भले ही पुरानी व्यवस्थाओं की विकृतियों को पूरी तरह खत्म होने में अभी वक्त लगेगा, लेकिन भाजपा ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा में ले जाने का माध्यम है। 44 साल की उम्र में, भाजपा आज दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, और यह शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

