मुंबई की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव: BMC में महायुति का कब्ज़ा, BJP बनाएगी मेयर
मुंबई। महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने बड़ी जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। देश के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में पहली बार भाजपा की सत्ता तय मानी जा रही है। भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर ठाकरे बंधुओं की शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को करारी शिकस्त दी है।
शुक्रवार रात साढ़े नौ बजे तक के रुझानों के अनुसार, भाजपा 88 वार्डों में जीत या बढ़त बनाए हुए है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना 28 वार्डों में आगे है। वहीं शिवसेना (UBT) 65, कांग्रेस 24 और MNS सिर्फ 6 वार्डों तक सिमटती दिखी। इस जीत के साथ ही बीएमसी में भाजपा का पहला मेयर बनना लगभग तय हो गया है, जो पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले लगभग तीन दशकों से बीएमसी पर ठाकरे परिवार का दबदबा रहा है, लेकिन अब यह दौर समाप्त होता दिख रहा है।
पीएम मोदी के नेतृत्व पर जनता का भरोसा
भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर जनता का भरोसा एक बड़ा कारण माना जा रहा है। बीते एक दशक में भाजपा ने मोदी के नेतृत्व में लगातार चुनावी सफलताएँ हासिल की हैं। लोकसभा चुनावों से लेकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव तक पार्टी ने मजबूत जनादेश प्राप्त किया। बीएमसी चुनाव में भी भाजपा ने विकास और स्थिर नेतृत्व को मुद्दा बनाया, जिसका सीधा लाभ उसे मिला। चुनाव परिणामों के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी जीत का श्रेय पीएम मोदी के विज़न और नेतृत्व को दिया।
शिवसेना में विभाजन से कमजोर हुआ ठाकरे खेमा
भाजपा की जीत की दूसरी बड़ी वजह शिवसेना में हुई टूट है। 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना और भाजपा के रास्ते अलग हो गए थे और उद्धव ठाकरे कांग्रेस व एनसीपी के साथ सरकार में शामिल हुए थे। हालांकि 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना टूट गई और अधिकांश विधायक उनके साथ चले गए। इसके बाद शिंदे गुट को असली शिवसेना का दर्जा मिला। इस विभाजन ने उद्धव ठाकरे की राजनीतिक ताकत को काफी कमजोर कर दिया, जिसका असर बीएमसी चुनाव में भी साफ दिखाई दिया।
MNS गठबंधन से उत्तर भारतीय वोटर हुए नाराज़
बीएमसी चुनाव में शिवसेना (UBT) और MNS का गठबंधन मराठी वोटों को साधने में तो आंशिक रूप से सफल रहा, लेकिन उत्तर भारतीय मतदाताओं का समर्थन भाजपा को मिला। MNS का उत्तर भारतीयों के खिलाफ पुराना रुख इस चुनाव में उद्धव ठाकरे के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। एग्जिट पोल और चुनावी रुझानों से संकेत मिला कि उत्तर भारतीय वोटरों ने बड़ी संख्या में भाजपा को समर्थन दिया, जिससे महायुति को सीधा फायदा हुआ।
BJP का आक्रामक प्रचार और फडणवीस की सक्रिय भूमिका
भाजपा ने बीएमसी चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद प्रचार की कमान संभाली और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व मंत्रियों ने भी ज़मीनी स्तर पर अभियान चलाया। भाजपा और शिंदे शिवसेना का संगठनात्मक ढांचा शिवसेना (UBT) और MNS के मुकाबले अधिक मजबूत नजर आया। हालांकि विपक्षी दलों की रैलियों में भीड़ दिखी, लेकिन वह वोटों में तब्दील नहीं हो सकी।\
तीन दशक की सत्ता से बनी एंटी-इनकमबेंसी
लगभग 30 वर्षों तक बीएमसी पर ठाकरे परिवार के नियंत्रण के कारण शिवसेना (UBT) के खिलाफ एंटी-इनकमबेंसी भी एक बड़ा कारण रही। लंबे समय तक सत्ता में रहने से जनता के एक वर्ग में नाराज़गी बनी, जिसका फायदा भाजपा को मिला। साथ ही, एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन ने भाजपा की स्थिति को और मजबूत कर दिया।
निष्कर्ष
बीएमसी चुनाव के नतीजे मुंबई की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहे हैं। महायुति की जीत ने न केवल ठाकरे परिवार के लंबे वर्चस्व को चुनौती दी है, बल्कि भाजपा को मुंबई जैसे अहम महानगर में निर्णायक ताकत के रूप में स्थापित कर दिया है। आने वाले समय में इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति पर भी गहराई से देखने को मिल सकता है।
