CM के निर्देश पर PWD ENC ने किया निरीक्षण 4 अधिकारियों‑कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस
भोपाल: मध्य प्रदेश के CM डॉ. मोहन यादव के सरकारी कार्यालयों में समय‑बद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्यशैली में बदलाव के प्रयास दिखाई दे रहे हैं। इस दिशा में गुरुवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियर इन चीफ (ENC) केपीएस राणा ने अपने विभागीय कार्यालय का औचक निरीक्षण किया और उन अधिकारियों‑कर्मचारियों को चिन्हित किया जो समय पर कार्यालय नहीं पहुंचे। ऐसे चार कर्मचारियों को ‘कारण बताओ’ नोटिस थमाए गए हैं।
CM के नये निर्देश सुबह 10 बजे समय पर पहुँचना अनिवार्य
CM डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में सभी सरकारी महकमों को निर्देश दिए कि कार्यालय का काम सुबह 10 बजे से शुरू होना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली समेत अन्य तकनीकी उपायों की शुरुआत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि COVID के बाद लागू फाइव‑डे वर्कवीक में कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति और कार्य संस्कृति सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि योजनाओं और सेवाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके
CM ने अधिकारियों से कहा कि समय पर दफ्तर आना और निर्धारित समय तक (शाम 6 बजे तक) काम करना कार्य की प्रभावशीलता को बढ़ाता है और लोगों को सरकारी सेवाओं में सुविधा मिलती है। उन्होंने इस दिशा में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया है।
PWD सख्ती से लागू कर रहा निर्देश
गुरुवार सुबह निर्माण सदन, लोक निर्माण विभाग के मुख्यालय का निरीक्षण करने के लिए PWD के ENC केपीएस राणा समय पर ही अपने कार्यालय पहुंचे। उनका मकसद था यह देखना कि विभाग के अधिकारी‑कर्मचारी कितनी अनुशासनबद्धता से कार्यालय समय का पालन कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान चार ऐसे अधिकारी/कर्मचारी पाए गए जो सुबह 10 बजे तक अपने कार्यस्थल पर उपस्थिति दर्ज नहीं करवा पाए, जबकि उन्हें किसी अन्य निरीक्षण या बैठक में नहीं होना था। इन सभी को तुरंत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया।
आधिकारिक तौर पर बताया गया कि इन कर्मचारियों को चेतावनी के साथ स्पष्ट किया गया है कि सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 10 बजे कार्यालय में होना अनिवार्य है। यदि निर्देश का उल्लंघन दोबारा होता है, तो विभाग कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है, जिसमें वेतन रोकना या अन्य सेवा‑सम्बंधित कार्रवाई भी शामिल है।

मंत्रालय में दिखा प्रभाव
सरकारी तंत्र में यह बदलाव केवल लोक निर्माण विभाग तक सीमित नहीं रहा। मंत्रालयों और अन्य सरकारी महकमों में भी समय से पहले उपस्थिति बढ़ती दिखी। ठंड के मौसम में अक्सर अधिकारी‑कर्मचारी देर से दफ्तर पहुंचते रहे हैं, लेकिन गुरुवार को अधिकांश स्टाफ समय से पहले कार्यालय में नजर आए। इससे संकेत मिलता है कि CM के निर्देश का असर धीरे‑धीरे पूरे प्रशासन में देखने को मिल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ विभागों में कर्मचारियों ने यह भी कहा कि निर्देश के प्रभाव से कार्यालय में कार्य‑संस्कृति और अनुशासन दोनों में सुधार महसूस होने लगा है। इससे न केवल सेवाओं की पहुंच में सुधार होगा, बल्कि जनता को मिलने वाली सुविधाओं में भी तेजी आएगी। हालांकि, कुछ कर्मचारियों ने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसे तकनीकी उपायों के बारे में उचित मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की जरूरत है ताकि यह प्रणाली सुचारु रूप से लागू हो सके।
पिछली स्थिति और शिकायतें
जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय से सरकारी कार्यालयों में 11 बजे या उससे भी बाद में पहुंचना आम समस्या बन गई थी, जिससे दफ्तरों में कार्य समय का पूरा उपयोग नहीं हो पाता था और नागरिकों, ठेकेदारों तथा अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में मुख्यमंत्री के निर्देशों का मकसद यही सुनिश्चित करना है कि नियमित समय पर उपस्थिति और दफ्तर का कामकाज सुचारु ढंग से चले।
PWD जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग में निरीक्षण और नोटिस का यह कदम इस दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। साथ ही यह प्रशासनिक जवाबदेही को भी मजबूत करेगा और सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन में तेजी लाएगा।
आगे की तैयारी
सरकार तय कर रही है कि अगले कुछ सप्ताह में अन्य विभागों में भी इसी तरह के औचक निरीक्षण और निगरानी उपाय लागू किए जाएँ ताकि सरकारी कार्यालयों में समयबद्ध उपस्थिति और कार्य‑संस्कृति को स्थायी रूप से लागू किया जा सके। इससे सरकारी सेवाओं का संचालन और प्रभावशीलता दोनों बढ़ेगी।
यह कदम उन तमाम शिकायतों के मद्देनजर उठाया गया है कि समय‑समय पर सरकारी महकमों में अनुशासनहीनता के कारण योजनाओं और सेवाओं में देरी होती रही है और इससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वर्तमान कार्रवाई से यह संदेश भी दिया जा रहा है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकारी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
