Bilaspur फर्जी स्नेक बाइट पीएम रिपोर्ट मामला: तीन एसडीएम कार्यालय के बाबू गिरफ्तार, 17 एफआईआर दर्ज
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मुआवजा घोटाले की जांच तेज
Bilaspur।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में फर्जी स्नेक बाइट (सांप के काटने) से मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर सरकारी मुआवजा लेने के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इस मामले में सरकंडा थाना पुलिस ने एसडीएम कार्यालय से जुड़े तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मृतकों के परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता का गलत तरीके से लाभ पहुंचाया गया।
इस पूरे मामले में अब तक जिले के अलग-अलग थानों में कुल 17 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस कई मामलों की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
डॉ. प्रियंका सोनी मुख्य आरोपी के रूप में सामने आईं
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मामले में पूर्व सिम्स चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी की भूमिका सबसे प्रमुख रूप से सामने आई है। पुलिस जांच के अनुसार, कई ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई, जिनमें मौत का कारण कथित रूप से स्नेक बाइट बताया गया, जबकि जांच में कई मामलों में यह तथ्य संदिग्ध पाए गए।
डॉ. प्रियंका सोनी को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब उनसे जुड़े अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।
एसडीएम कार्यालय के तीन कर्मचारियों पर कार्रवाई
सरकंडा थाना पुलिस ने इस मामले में एसडीएम कार्यालय और तहसील कार्यालय से जुड़े तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इनकी भूमिका फर्जी मामलों में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया से जुड़ी रही है।
जांच के दौरान पुलिस को संदेह है कि फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सरकारी सहायता राशि जारी कराने में इन कर्मचारियों की भूमिका रही हो सकती है। हालांकि पुलिस ने अभी सभी गिरफ्तार कर्मचारियों के नामों का आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं किया है।
सांप काटने से मौत पर मिलता है सरकारी मुआवजा
सरकार की योजना के तहत सांप के काटने से मौत होने पर मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने का मामला सामने आया है।
जांच में यह बात सामने आई कि कुछ मामलों में मौत का वास्तविक कारण अलग होने के बावजूद उसे स्नेक बाइट बताया गया और इसके आधार पर मुआवजा लेने की कोशिश की गई।
दो मामलों में फर्जी रिपोर्ट का खुलासा
पुलिस के अनुसार, तहसील कार्यालय के नायब नाजिर की शिकायत के बाद महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामलों की जांच शुरू की गई थी।
जांच में सामने आया कि दोनों मामलों में पोस्टमार्टम तत्कालीन सिम्स चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी द्वारा किया गया था और रिपोर्ट में सांप के काटने से मौत होने की बात दर्ज की गई थी। पुलिस को रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
पहले भी कई आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में मृतकों के परिजनों और एक वकील सहित कई लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस ने निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी और वकील रंजीत कुमार चतुर्वेदी को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
वहीं इस पूरे नेटवर्क से जुड़े मुख्य आरोपी बताए जा रहे वकील श्रवण वस्त्रकार की तलाश जारी है।
अन्य डॉक्टर भी जांच के घेरे में
फर्जी स्नेक बाइट रिपोर्ट मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस के अनुसार, करीब 15 संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है। इनमें चार से पांच अन्य डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
पुलिस सभी मामलों में दस्तावेजों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मुआवजा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
सिविल लाइन थाने में भी दर्ज है मामला
डॉ. प्रियंका सोनी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में भी एक अलग मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि तालापारा निवासी पवन यादव की मौत को स्नेक बाइट बताया गया था, जबकि जांच में मौत का कारण हार्ट अटैक सामने आया।
इस मामले में मृतक की पत्नी और एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस आगे की पूछताछ के लिए डॉ. सोनी को प्रोडक्शन वारंट के माध्यम से हिरासत में लेने की तैयारी कर रही है।
16 जुलाई को भी हुई थी कार्रवाई
इससे पहले 16 जुलाई को सरकंडा थाना पुलिस ने फर्जी स्नेक बाइट मामलों में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें वकील हीराप्रसाद खाण्डेकर, बैंककर्मी कुशकुमार गुप्ता, कथित वकील महेंद्र कुमार और तहसीलदार के ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा शामिल थे।
इन सभी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया था।
जांच के बाद और खुलासों की संभावना
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मुआवजा वितरण और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद मामले में और नाम सामने आने तथा अतिरिक्त गिरफ्तारियां होने की संभावना है। बिलासपुर का यह मामला सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े और प्रशासनिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
