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Bihar Tender Scam: 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, रिशु श्री पर टेंडर मैनेजमेंट और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप

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Published On: 24 June 2026
Bihar Tender Scam: 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, रिशु श्री पर टेंडर मैनेजमेंट और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप

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Bihar Tender Scam: 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, रिशु श्री पर टेंडर मैनेजमेंट 

पटना | 24 जून 2026

Bihar Tender Scam :बिहार में सामने आए बहुचर्चित टेंडर घोटाले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 4000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल कर दी है। इस मामले में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें ठेकेदार रिशु श्री और तत्कालीन जल संसाधन विभाग के सचिव IAS संजीव हंस प्रमुख नाम हैं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि पूरे टेंडर सिस्टम को एक संगठित नेटवर्क के जरिए नियंत्रित किया जा रहा था, जिसमें कमीशनखोरी और अफसरों से सांठगांठ के पुख्ता सबूत मिले हैं।

SVU की बड़ी चार्जशीट में कई खुलासे

स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला केवल साधारण अनियमितताओं का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित टेंडर मैनेजमेंट सिस्टम का हिस्सा है, जिसमें योजनाबद्ध तरीके से सरकारी प्रक्रियाओं को प्रभावित किया गया।

SVU के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) पंकज कुमार दरद ने बताया कि जांच के दौरान प्राप्त दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि टेंडर आवंटन प्रक्रिया में हेरफेर कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया जाता था। इसके बदले में मोटे कमीशन की वसूली की जाती थी, जो आगे चलकर विभिन्न स्तरों पर बंटता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर समन्वय स्थापित कर काम किया जाता था, जिससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती थी। एजेंसी का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों ने न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया, बल्कि विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला।

Bihar Tender Scam: रिशु श्री पर मैनेजमेंट रैकेट चलाने का आरोप

जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन रिशु श्री द्वारा किया जा रहा था। वह विभिन्न सरकारी टेंडरों में अपनी पकड़ बनाकर चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाता था।

उदाहरण के तौर पर, एक अहम टेंडर में उसने अहमदाबाद की एक कंपनी को कोसी बैराज परियोजना का ठेका दिलवाया, लेकिन बाद में कार्य को अपनी ही एक अन्य कंपनी को ट्रांसफर कर दिया, जिसमें पवन कुमार डायरेक्टर बताए जाते हैं।

इसी तरह सहरसा में भी तारिणी दास की मदद से लगभग 10 बड़े टेंडर हासिल करने का मामला सामने आया है।

7 से 10 प्रतिशत कमीशन का नेटवर्क

ADG पंकज कुमार दरद के अनुसार, रिशु श्री पसंदीदा कंपनियों से 7 से 10 प्रतिशत तक कमीशन वसूल करता था। इसके बाद इस अवैध कमाई का एक हिस्सा, लगभग 2 से 3.5 प्रतिशत, सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था ताकि पूरे सिस्टम को मैनेज किया जा सके।

जांच एजेंसी का कहना है कि मोबाइल चैट, डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों के रूप में इस लेन-देन के मजबूत सबूत मिले हैं। यह पूरा नेटवर्क केवल एक विभाग तक सीमित नहीं था, बल्कि कई सरकारी विभागों तक फैला हुआ था।

कई विभागों तक फैला नेटवर्क

SVU की जांच में सामने आया है कि यह कथित सिंडिकेट केवल जल संसाधन विभाग तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार वित्त विभाग, भवन निर्माण विभाग और शहरी विकास विभाग तक भी फैले हुए थे। जांच एजेंसी के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर और अनुचित लाभ पहुंचाने का यह नेटवर्क कई स्तरों पर सक्रिय था, जिससे यह मामला और अधिक व्यापक और संगठित रूप लेता दिखाई देता है।

इससे यह संकेत मिलता है कि कथित टेंडर घोटाले का दायरा काफी बड़ा था और इसमें विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के जरिए निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। जांच में कई स्तरों पर अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

एजेंसी का मानना है कि यदि यह पैटर्न सही साबित होता है, तो यह मामला केवल एक विभागीय अनियमितता नहीं, बल्कि एक बड़े प्रशासनिक नेटवर्क से जुड़ा गंभीर भ्रष्टाचार का उदाहरण हो सकता है। फिलहाल SVU सभी संबंधित दस्तावेजों, लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की संरचना और उसकी कार्यप्रणाली को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।

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छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

रिशु श्री के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों को बड़ी मात्रा में संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 61 संपत्तियों से संबंधित कागजात मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। इन दस्तावेजों में विभिन्न स्थानों पर स्थित भूमि और अन्य अचल संपत्तियों का विवरण शामिल है, जिन्हें जांच एजेंसियां संदिग्ध मानकर आगे की पड़ताल कर रही हैं।

इसके अलावा छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये के गहने और बड़ी मात्रा में नकदी भी जब्त की गई है। इस बरामदगी के बाद मामले की गंभीरता और अधिक बढ़ गई है, क्योंकि इतनी बड़ी संपत्ति और धन के स्रोत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच एजेंसी अब इन सभी संपत्तियों की वैधता, खरीद प्रक्रिया और फंड के स्रोत की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन संपत्तियों का संबंध कथित टेंडर घोटाले से हो सकता है। फिलहाल एजेंसी सभी वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह संपत्ति वैध आय से अर्जित की गई है या किसी अवैध गतिविधि का हिस्सा है।

IAS अधिकारियों पर गंभीर आरोप, दो फरार

चार्जशीट में IAS संजीव हंस और पवन कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मौजूद हैं और वे फिलहाल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

इसके अलावा दो अन्य IAS अधिकारियों अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार सागर को भी जांच के दायरे में रखा गया है। दोनों को कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद वे पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए।

हालांकि, उनके खिलाफ अभी तक सीधे आपराधिक साक्ष्य नहीं मिले हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के आरोप जरूर लगाए गए हैं।

ज्योतिष और विदेश यात्राओं से जुड़े दावे भी जांच में

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि रिशु श्री ने कुछ अधिकारियों की विदेश यात्राओं के प्रबंधन में भूमिका निभाई थी। जांच एजेंसी इस पहलू को भी गंभीरता से देख रही है, क्योंकि इससे कथित नेटवर्क के विस्तार और प्रभाव को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा कुछ व्यक्तिगत संबंधों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामलों की भी गहन जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इन गतिविधियों का टेंडर प्रक्रिया से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।

एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान कुछ व्यक्तिगत बातचीत और सलाह से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिन्हें अब विस्तृत जांच के दायरे में शामिल किया गया है। इन दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह समझा जा सके कि क्या इनका उपयोग किसी निर्णय को प्रभावित करने या लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था।

फिलहाल जांच एजेंसी सभी डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू को निष्पक्ष रूप से देखा जा रहा है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि की जाएगी।

ADG का बयान: पूरे नेटवर्क की जांच जारी

ADG पंकज कुमार दरद ने स्पष्ट किया है कि बिहार टेंडर घोटाले की जांच किसी सीमित दायरे तक नहीं है, बल्कि यह एक बड़े और संगठित नेटवर्क से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि अब तक की जांच में जो तथ्य और सबूत सामने आए हैं, वे केवल शुरुआती स्तर के खुलासे हैं और आगे की जांच में और भी गंभीर जानकारियां सामने आने की संभावना है। जांच एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिनकी जांच जारी है। आने वाले समय में इस केस से जुड़े और बड़े नाम और लेन-देन के पैटर्न उजागर हो सकते हैं।

ADG ने दोहराया कि सभी आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी या टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी का उद्देश्य केवल दोषियों को सामने लाना ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

निष्कर्ष

बिहार टेंडर घोटाला राज्य के सबसे बड़े कथित भ्रष्टाचार मामलों में से एक बनकर सामने आया है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) द्वारा दाखिल 4000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार यह पूरा मामला केवल एक विभाग तक सीमित नहीं था, बल्कि कई सरकारी विभागों तक फैला हुआ एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, कमीशनखोरी और प्रभाव का दुरुपयोग किए जाने के आरोप शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एजेंसी का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अभी भी जांच चल रही है, जिससे आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल इस मामले में सभी की निगाहें आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं। विशेष रूप से अदालत में चलने वाली सुनवाई, प्रस्तुत किए जाने वाले अतिरिक्त साक्ष्य और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम मोड़ आ सकते हैं, जो पूरे घोटाले की परतें और खोल सकते हैं।

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कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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