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बिहार में फिर से चल सकता है मोदी का जादू , 130 सीटे मिलने की संभावना

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Published On: 12 November 2025
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इस बार बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान हुआ — पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को संपन्न हुआ। पहले चरण में

121 सीटों पर 65.08 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि दूसरे चरण में 122 सीटों पर 68.76 प्रतिशत वोट पड़े। इस तरह कुल मिलाकर 66.9 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 1951 के बाद का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस साल बंपर वोटिंग हुई, जिसमे मतदाताओं ने नया इतिहास रच दिया है। मतदाताओं ने चुनाव प्रणाली पर भरोसा जताते हुए अपना योग दान दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार इतना अधिक मतदान हुआ है। बता दे की कुल मतदान 66.9% दर्ज किया गया, जो 1951 के बाद का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।

एनडीए को 130 से 167 सीटों तक का अनुमान :

एग्जिट पोल नतीजों के मुताबिक एनडीए को 130 से 167 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि कांग्रेस और राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 70 से 108 सीटों के बीच दिखाया गया है। राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को 0 से 5 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।
सर्वे एजेंसियों का मत है कि इस बार एनडीए को महिलाओं, ईबीसी और अति पिछड़ा वर्ग के वोटरों का व्यापक समर्थन मिला है।

सर्वे एजेंसियों के अनुमान एक नजर में :

विभिन्न मीडिया चैनलों और एजेंसियों ने एग्जिट पोल्स जारी किये जिसमे एनडीए की लगातार बढ़त दिखाई गई है।

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लगभग सभी सर्वेक्षणों में एनडीए को आरामदायक बहुमत दिखाया गया है। सबसे अधिक अनुमान मैट्राइज और पीमार्क एजेंसी ने दिया है, जिनमें एनडीए की सीटें 147 से 167 के बीच बताई गई हैं।

2020 के चुनावों से तुलना :

2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को 37.26 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 125 सीटें मिली थीं, जबकि महागठबंधन को 37.23 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 110 सीटें हासिल हुई थीं।
तब दोनों गठबंधनों के बीच वोट शेयर में मात्र 0.03 प्रतिशत का अंतर था, जिससे मुकाबला बेहद कांटे का बन गया था। इस बार हालांकि मतदान का रुझान और महिला मतदाताओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि एनडीए को बढ़त दिला सकती है।

चुनावी समीकरण और मुद्दे

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार एनडीए को “डबल इंजन सरकार” की उपलब्धियों, विकास परियोजनाओं और सुशासन के मुद्दों का लाभ मिल सकता है। वहीं, महागठबंधन ने बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया।
युवाओं में सरकारी नौकरियों की मांग और शिक्षा व्यवस्था सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी विकास और स्थानीय मुद्दों पर जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की कोशिश की, हालांकि एग्जिट पोल्स में इसका असर सीमित दिखा।

क्या फिर नीतीश- मोदी का जादू चलेगा?

नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की जोड़ी इस चुनाव में एनडीए की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। भाजपा और जदयू के बीच तालमेल को लेकर शुरुआती संशय के बावजूद दोनों दलों ने संयुक्त रैलियों और विकास के एजेंडे के सहारे अपने समर्थक आधार को मजबूत किया।
दूसरी ओर, तेजस्वी यादव ने अपने अभियान में बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दों को केंद्र में रखा, जिससे महागठबंधन को युवा वर्ग का समर्थन मिला। हालांकि, वोटिंग ट्रेंड एनडीए के पक्ष में झुका हुआ दिख रहा है।

अब नजरें 14 नवंबर की मतगणना पर

बिहार की सियासी तस्वीर अब 14 नवंबर को पूरी तरह साफ होगी, जब मतगणना शुरू होगी।
एग्जिट पोल्स के नतीजे भले ही एनडीए की जीत के संकेत दे रहे हों, लेकिन बिहार की राजनीति के इतिहास में अक्सर नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं।
रिकॉर्ड वोटिंग और बढ़ती महिला भागीदारी ने इस बार चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है। अब देखना यह है कि क्या नीतीश कुमार एक बार फिर सत्ता में वापसी करेंगे या तेजस्वी यादव जनता के जनादेश को अपने पक्ष में मोड़ पाएंगे।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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