पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जहां अपने विकास कार्यों और योजनाओं से बने एक बड़े ‘लाभार्थी वर्ग’ के सहारे जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं तेजस्वी यादव अपने मजबूत M+Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण और युवाओं के समर्थन से सत्ता में वापसी को लेकर आश्वस्त हैं। दोनों खेमों के दावों के बीच वोटों का अंकगणित बेहद दिलचस्प हो गया है।
पहले चरण के मतदान के बाद जहां दोनों गठबंधन अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, वहीं महागठबंधन ने वोट चोरी की आशंका भी जताई है। आरजेडी ने चुनाव आयोग से ईवीएम में छेड़छाड़ की शिकायत की है, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी हरियाणा और महाराष्ट्र का उदाहरण देकर ऐसी चिंता जाहिर कर चुके हैं।
नीतीश का ‘लाभुक’ वोट बैंक: 4 करोड़ का आंकड़ा
नीतीश कुमार की सबसे बड़ी ताकत उनका तैयार किया हुआ लाभार्थी वर्ग है। राज्य के कुल 7.42 करोड़ मतदाताओं में से करीब 4 करोड़ से ज्यादा लोग सीधे तौर पर उनकी किसी न किसी योजना से लाभान्वित हुए हैं। ये आंकड़े एनडीए की उम्मीदों को पंख लगाते हैं।
योजनाओं के लाभार्थी:
- बिजली बिल में 125 यूनिट की छूट: 1.67 करोड़ उपभोक्ता
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन: 1.13 करोड़ से अधिक लाभार्थी
- महिला उद्यमी योजना (10 हजार रुपये): 1.21 करोड़ महिलाएं
विश्लेषकों का मानना है कि यह विशाल लाभार्थी वर्ग जाति और धर्म की सीमाओं से परे जाकर नीतीश कुमार के पक्ष में मतदान कर सकता है। इसके अलावा, यह भी माना जा रहा है कि ये लाभार्थी अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी प्रभावित कर सकते हैं, जिससे एनडीए को सीधा फायदा मिल सकता है।
तेजस्वी को M+Y और युवाओं से उम्मीद
दूसरी ओर, तेजस्वी यादव की चुनावी रणनीति मुख्य रूप से दो स्तंभों पर टिकी है। पहला, आरजेडी का परंपरागत M-Y समीकरण, जिसमें करीब 14% यादव और 17% मुस्लिम मतदाता शामिल हैं। यह 31% का वोट बैंक तेजस्वी का सबसे मजबूत आधार माना जाता है। 2020 के चुनाव में भी यह दिखा था जब जेडीयू के 11 मुस्लिम उम्मीदवारों में से एक भी नहीं जीत सका था।
तेजस्वी की दूसरी बड़ी उम्मीद युवा मतदाता हैं। सरकारी नौकरी का वादा युवाओं को आकर्षित कर रहा है। 17 महीने के अपने छोटे कार्यकाल में नौकरियों की शुरुआत करने से तेजस्वी के प्रति युवाओं का भरोसा बढ़ा है। हालांकि नीतीश सरकार भी 10 लाख नौकरियों और एक करोड़ रोजगार का वादा कर रही है, लेकिन इस मामले में युवा तेजस्वी पर अधिक विश्वास करते दिख रहे हैं।
महिला और युवा वोटर किधर?
इस चुनाव में महिला और युवा वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। नीतीश कुमार को महिलाओं के एकमुश्त वोट मिलने की उम्मीद है, खासकर 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता के बाद। वहीं, तेजस्वी ने 30,000 रुपये देने का वादा किया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि महिलाएं किसके वादे पर ज्यादा भरोसा करती हैं।
युवाओं का झुकाव भले ही तेजस्वी की ओर दिख रहा हो, लेकिन वे किसी एक खेमे से बंधे नहीं हैं। उनकी पसंद अंतिम समय में बदल सकती है। पिछले चुनाव में लगभग 54 सीटें ऐसी थीं जहां हार-जीत का अंतर 5,000 से कम वोटों का था। इनमें से 11 सीटों पर तो फैसला 1,000 से भी कम वोटों से हुआ था। ऐसे में वोटों का हल्का सा भी बिखराव नतीजों को पूरी तरह पलट सकता है।
