बिहार चुनाव 2025: मोदी की हुंकार, शाह का प्रहार और तेजस्वी की चुनौती — आज का ‘सुपर फ्राइडे’ बना चुनावी टर्निंग पॉइंट
पटना, 24 अक्टूबर 2025:
बिहार आज पूरी तरह चुनावी रंग में रंगा हुआ है। विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण से पहले यह शुक्रवार नेताओं की रैलियों का सबसे व्यस्त और प्रभावशाली दिन साबित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव — सभी आज बिहार की धरती से अपनी-अपनी रणनीति और चुनावी एजेंडा जनता के सामने रख रहे हैं।
🔶 बिहार चुनाव 2025 का संदर्भ
राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं — पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा 11 नवंबर को। नतीजे 14 नवंबर 2025 को घोषित होंगे।
मतदान से पहले यह शुक्रवार नेताओं के लिए जनसमर्थन जुटाने का निर्णायक दिन बन गया है। सभी दलों ने अपनी-अपनी ताकत झोंक दी है ताकि पहले चरण के मतदान से पहले जनता का रुख अपने पक्ष में मोड़ा जा सके।
🟠 पीएम मोदी की बिहार रैली: कर्पूरीग्राम से विकास का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कर्पूरीग्राम (समस्तीपुर) से की। उन्होंने सामाजिक न्याय के प्रतीक और पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह श्रद्धांजलि सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश था — कि भाजपा और एनडीए अब सामाजिक न्याय की राजनीति को भी अपने एजेंडा में प्रमुखता से रख रहे हैं।
मोदी ने अपने भाषण में कहा,
“कर्पूरी ठाकुर ने समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त किया, अब हम उसी मिशन को विकास के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। बिहार अब जंगलराज नहीं, विकासराज चाहता है।”
🕛 मोदी की दो बड़ी रैलियाँ: समस्तीपुर और बेगूसराय में जनसैलाब
- समस्तीपुर (12:15 बजे): यहाँ मोदी ने जनता से अपील की कि बिहार में “स्थिर सरकार और सतत विकास” के लिए एनडीए को वोट दें।
- बेगूसराय (2:00 बजे): इस रैली में प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि “महागठबंधन के वादे खोखले हैं, वे सिर्फ सत्ता के लिए साथ आए हैं।”
उन्होंने अपने भाषणों में केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं — प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, जल जीवन मिशन, लाड़ली बहना जैसी महिला सशक्तिकरण योजनाओं — का उल्लेख किया और दावा किया कि “इनसे बिहार की तस्वीर बदली है”।
मोदी के मंच पर स्थानीय नेताओं की भारी मौजूदगी रही और दोनों रैलियों में भीड़ का जोश यह संकेत दे रहा था कि एनडीए का प्रचार अभियान अब पूर्ण गति पकड़ चुका है।
🔵 अमित शाह की दो रैलियाँ: ‘जंगलराज’ बनाम ‘विकासराज’ की जंग
प्रधानमंत्री की रैलियों के समानांतर गृहमंत्री अमित शाह ने आज सीवान और बक्सर जिलों में दो बड़ी जनसभाएँ कीं।
सीवान की सभा में उन्होंने कहा —
“तेजस्वी यादव का मतलब है — टिकट परिवार के लिए, नौकरी डील के लिए। भाजपा का मतलब है — काम, कानून और विकास।”
शाह ने लोगों से कहा कि 14 नवंबर को बिहार की “चौथी दिवाली” मनाई जाएगी, जब जनता जंगलराज की वापसी को रोककर मोदी के विकास के रास्ते को चुनेगी।
उनके भाषण में भावनात्मक अपील और सख्त राजनीतिक संदेश दोनों झलके — कानून-व्यवस्था, रोजगार, बुनियादी ढांचे और महिला सुरक्षा पर जोर दिया गया।
🔴 जे.पी. नड्डा की अपील: “हर बूथ सबसे मजबूत”
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आज पटना और आसपास के जिलों में बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कीं।
उन्होंने कहा —
“मोदी सरकार की योजनाएँ हर घर तक पहुँची हैं। अब हमारा काम है कि हर मतदाता को मतदान केंद्र तक लाया जाए।”
भाजपा की यह “टॉप टू बूथ स्ट्रेटेजी” (Top to Booth Strategy) आज स्पष्ट दिखाई दी — जहाँ शीर्ष नेतृत्व जनउत्साह पैदा कर रहा है और कार्यकर्ता उसे वोट में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं।
🔴 तेजस्वी यादव का पलटवार: युवाओं और रोजगार पर फोकस
विपक्ष की ओर से राजद नेता तेजस्वी यादव ने आज दरभंगा, मुज़फ़्फ़रपुर, सहरसा और समस्तीपुर में चार बड़ी जनसभाएँ कीं।
उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा और कहा —
“भाजपा के पास सिर्फ झूठे वादे हैं, जबकि हमारे पास युवाओं के रोजगार और किसानों की आय दोगुनी करने की ठोस योजना है।”
समस्तीपुर की सभा में उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा —
“कर्पूरी ठाकुर की विरासत का नाम लेने से कोई कर्पूरी नहीं बन जाता। बिहार की असली लड़ाई सामाजिक न्याय और रोजगार की है।”
महागठबंधन की रणनीति साफ है — वे युवा वोट, महिला मतदाता और एमवाई फैक्टर (मुस्लिम-यादव) को एकजुट करने की कोशिश में हैं।
🟣 बिहार की राजनीति के भूगोल में आज की रैलियों का असर
बिहार में उत्तर बनाम दक्षिण का चुनावी समीकरण हमेशा निर्णायक रहा है।
आज की रैलियाँ इस दिशा में तीन बड़े संकेत देती हैं:
- उत्तर बिहार फोकस: मोदी और शाह दोनों ने उत्तर बिहार (समस्तीपुर, बेगूसराय, सीवान) को प्राथमिकता दी। यहाँ पिछड़े वर्ग और ईबीसी वोट निर्णायक हैं।
- सामाजिक न्याय बनाम विकास: मोदी ने कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देकर संदेश दिया कि भाजपा अब “समग्र सामाजिक प्रतिनिधित्व” वाली पार्टी के रूप में अपनी छवि मजबूत कर रही है।
- स्थानीय बनाम राष्ट्रीय नैरेटिव: तेजस्वी “बिहार का बेटा बनाम दिल्ली का नेता” नैरेटिव गढ़ रहे हैं, जबकि मोदी “स्थिरता बनाम अराजकता” की रेखा खींच रहे हैं।
🟢 सोशल मीडिया पर ‘सुपर फ्राइडे’ का रंग
आज की रैलियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी बवंडर मचा दिया है।
भाजपा के पेजों पर #ModiInBihar, #VikasRajBihar, #SuperFridayBiharElection जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
वहीं, महागठबंधन समर्थक समूहों पर #BadlavKiHawaHai और #TejashwiForBihar जैसे नारे दिख रहे हैं।
डिजिटल कैंपेन के साथ-साथ बीजेपी ने हर जिले में “मोदी परिवार अभियान” चलाया है, जिसका उद्देश्य है “हर घर मोदी, हर मतदाता एनडीए”।
⚖️ निष्कर्ष: बिहार चुनाव 2025 का टर्निंग पॉइंट
24 अक्टूबर 2025 का यह दिन बिहार चुनाव का “Super Friday” बन चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी की सभाओं ने एनडीए के अभियान में नई ऊर्जा भरी है, जबकि तेजस्वी यादव की रैलियों ने विपक्ष को भी सक्रिय किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आज की सभाएँ पहले चरण के मतदान से पहले मतदाताओं की सोच को दिशा देने वाली साबित होंगी।
आने वाले 12 दिन यह तय करेंगे कि क्या बिहार “विकासराज” के पक्ष में वोट करेगा या “सामाजिक न्याय” के नाम पर सत्ता में बदलाव देखेगा।


