भोपाल में Taxi चालकों का अनोखा प्रदर्शन: फटे कपड़े पहन कटोरा लेकर मांगी भीख,
राजधानी भोपाल में ऐप आधारित Taxi सेवाओं के खिलाफ शुक्रवार को टैक्सी चालकों का गुस्सा खुलकर सामने आया। अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में टैक्सी चालक सड़कों पर उतर आए और उन्होंने अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। भोपाल टैक्सी चालक संघ के बैनर तले चालक बोर्ड ऑफिस चौराहे पर एकत्र हुए, जहां उन्होंने फटे कपड़े पहनकर और हाथों में कटोरा लेकर प्रतीकात्मक भीख मांगी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों की नीतियों ने उनकी आर्थिक स्थिति को बेहद खराब कर दिया है और अब उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शन के दौरान चालकों ने जमकर नारेबाजी की और सरकार व प्रशासन से उनकी समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की मांग की। उनका आरोप है कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियां लगातार किराया दरों में कटौती कर रही हैं, जबकि दूसरी ओर ईंधन, वाहन रखरखाव और अन्य खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
आर्थिक संकट से जूझ रहे चालक
प्रदर्शन में शामिल चालकों ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं से अच्छी कमाई हो जाती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। कंपनियों द्वारा कमीशन बढ़ाए जाने और किराए में कटौती किए जाने से उनकी आमदनी लगातार घट रही है।
एक चालक ने कहा कि वर्तमान स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने भावुक होकर बताया कि कई ड्राइवरों के पास नए कपड़े खरीदने तक के पैसे नहीं बचते। यही कारण है कि उन्होंने फटे कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया ताकि प्रशासन और आम जनता तक उनकी परेशानी पहुंच सके।
9 रुपये की कमाई, 11 रुपये का खर्च
भोपाल टैक्सी चालक संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष श्रवण कुमार शर्मा ने बताया कि वर्तमान में ऐप आधारित कंपनियां चालकों को औसतन केवल 9 रुपये प्रति किलोमीटर का किराया दे रही हैं। इसके विपरीत एक वाहन को सड़क पर चलाने का खर्च लगभग 11 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके अलावा वाहन की सर्विसिंग, इंश्योरेंस, टैक्स और अन्य खर्च भी बढ़ गए हैं। ऐसे में चालक हर किलोमीटर पर घाटे में काम करने को मजबूर हैं।
किस्त भरें या परिवार चलाएं?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अधिकांश टैक्सी चालक बैंक ऋण लेकर वाहन खरीदते हैं। हर महीने उन्हें वाहन की ईएमआई भी चुकानी पड़ती है। मौजूदा कमाई में चालक या तो अपने परिवार का खर्च चला सकते हैं या फिर बैंक की किस्त भर सकते हैं।
कई चालकों ने बताया कि कमाई इतनी कम हो गई है कि दोनों जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना लगभग असंभव हो गया है। कुछ ड्राइवरों पर बैंक ऋण का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे वे मानसिक तनाव का भी सामना कर रहे हैं।
कंपनियों पर नियमों की अनदेखी का आरोप
टैक्सी चालक संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले ने ऐप आधारित कंपनियों पर परिवहन विभाग के नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब इन सेवाओं की शुरुआत हुई थी, तब आरटीओ और परिवहन विभाग द्वारा तय नियमों का पालन किया जाता था।
लेकिन समय के साथ कंपनियों ने अपनी मनमानी शुरू कर दी। उनका आरोप है कि अब कई मामलों में न्यूनतम किराया दरों का पालन नहीं किया जा रहा है और ड्राइवरों को कम भुगतान किया जा रहा है। इससे हजारों चालक प्रभावित हो रहे हैं।
लंबे समय से कर रहे हैं मांग
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रशासन और परिवहन विभाग के सामने अपनी समस्याएं रख रहे हैं। कई बार ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
चालकों का कहना है कि उन्हें हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। यही वजह है कि अब उन्होंने सार्वजनिक प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है।
सरकार से क्या है मांग?
प्रदर्शन कर रहे चालकों की मुख्य मांग है कि सरकार द्वारा पूर्व में निर्धारित न्यूनतम किराया दरों को सख्ती से लागू कराया जाए। उनका कहना है कि यदि किराया दरों को नियमानुसार लागू किया जाए तो ड्राइवरों को राहत मिल सकती है।
इसके अलावा उन्होंने ऐप कंपनियों के कमीशन ढांचे की समीक्षा करने और ड्राइवरों के हितों की रक्षा के लिए नई नीतियां बनाने की भी मांग की है।
चक्का जाम की चेतावनी
टैक्सी चालक संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। संघ का कहना है कि जरूरत पड़ने पर भोपाल में ऐप आधारित टैक्सी और ऑटो सेवाओं को पूरी तरह बंद किया जा सकता है।
चालकों का दावा है कि यदि चक्का जाम किया गया तो इसका असर हजारों यात्रियों पर पड़ेगा और शहर की परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए सरकार और प्रशासन को समय रहते समाधान निकालना चाहिए।
यात्रियों पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चालक लंबे आंदोलन पर जाते हैं तो इसका सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ेगा। वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोग रोजाना ओला, उबर और अन्य ऐप आधारित सेवाओं का उपयोग करते हैं।
ऐसे में सेवाएं बाधित होने पर लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, छात्र और हवाई अड्डे या रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को अधिक दिक्कत हो सकती है।
निष्कर्ष
भोपाल में टैक्सी चालकों द्वारा किया गया यह अनोखा प्रदर्शन उनकी आर्थिक परेशानियों को उजागर करता है। फटे कपड़े पहनकर और कटोरा लेकर भीख मांगने का प्रतीकात्मक विरोध इस बात का संकेत है कि चालक खुद को आर्थिक संकट में घिरा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार पर है कि वह चालकों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो राजधानी में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।
