भोपाल के कोलार में अचानक धंसी सड़क, गड्ढे में समाईं कई गाड़ियां; आठ मंजिला इमारत के रहवासियों में दहशत
दानिशकुंज स्थित आम्रवेली परिसर के बाहर हुआ हादसा, क्रेन की सहायता से निकाले गए वाहन; निर्माण गुणवत्ता और कैचमेंट क्षेत्र में अनुमति पर उठे सवाल
भोपाल। राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र में शनिवार को सड़क धंसने की बड़ी घटना सामने आई। दानिशकुंज स्थित आम्रवेली परिसर के बाहर सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे वहां खड़ी कई गाड़ियां गहरे गड्ढे में समा गईं। हादसा होते ही परिसर में अफरा-तफरी मच गई और आसपास रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।
सड़क धंसने वाला स्थान आठ मंजिला आवासीय इमारत के ठीक पास बताया जा रहा है। इसके कारण भवन में रहने वाले परिवारों में अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारी और राहत दल मौके पर पहुंचे। सड़क के गड्ढे में फंसे वाहनों को क्रेन की मदद से बाहर निकालने की कार्रवाई की गई।
बारिश के बीच अचानक जमीन में समाईं गाड़ियां
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय सड़क के किनारे कई वाहन खड़े थे। जमीन धंसने के साथ सड़क का हिस्सा नीचे चला गया और वाहन भी गड्ढे में फंस गए। घटना की तस्वीरों में सड़क का बड़ा भाग क्षतिग्रस्त और वाहन उसमें फंसे दिखाई दे रहे हैं।
सड़क धंसने का स्पष्ट कारण तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। माना जा रहा है कि लगातार बारिश, जमीन के नीचे पानी का रिसाव, कमजोर जल निकासी अथवा सड़क के नीचे की मिट्टी बहने जैसी परिस्थितियां इसका कारण हो सकती हैं। हालांकि किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अधिकारियों से सड़क के नीचे मौजूद सीवेज, पानी अथवा ड्रेनेज लाइन की स्थिति की जांच करने की मांग की गई है। यह भी पता लगाया जाना आवश्यक होगा कि कहीं पाइपलाइन में रिसाव के कारण जमीन अंदर से खोखली तो नहीं हो गई थी।
आठ मंजिला इमारत के पास हादसे से बढ़ी चिंता
घटनास्थल के पास आम्रवेली परिसर की आठ मंजिला इमारत स्थित होने के कारण मामला अधिक गंभीर माना जा रहा है। रहवासियों को आशंका है कि सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर होने का असर आसपास की जमीन और भवन की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल सड़क की मरम्मत करके मामले को समाप्त नहीं किया जाए। भवन की नींव, परिसर की रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज व्यवस्था और आसपास की मिट्टी की स्थिति की तकनीकी जांच भी कराई जाए।
रहवासियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक क्षतिग्रस्त क्षेत्र को चारों तरफ से सुरक्षित किया जाना चाहिए, जिससे कोई व्यक्ति या वाहन गड्ढे के पास न पहुंच सके। विशेष रूप से रात के समय पर्याप्त रोशनी, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड लगाने की आवश्यकता बताई गई है।
निर्माण गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद सड़क और परिसर के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि संबंधित परिसर का निर्माण लगभग सात वर्ष पहले हुआ था। इतने कम समय में सड़क धंसने की घटना ने उपयोग की गई निर्माण सामग्री, मिट्टी के भराव और इंजीनियरिंग मानकों को लेकर संदेह पैदा किया है।
तकनीकी जांच में यह पता लगाया जाना जरूरी होगा कि सड़क का निर्माण किस एजेंसी ने किया था और निर्माण से पहले जमीन की भार क्षमता का परीक्षण किया गया था या नहीं। साथ ही, बरसात के पानी की निकासी के लिए तैयार किया गया ड्रेनेज सिस्टम पर्याप्त था या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
यदि सड़क के नीचे भराव वाली मिट्टी का इस्तेमाल किया गया था, तो उसके उचित दबाव और परतों की मजबूती से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ सकता है। किसी भूमिगत नाले या प्राकृतिक जल प्रवाह मार्ग को बाधित किए जाने की स्थिति में भारी बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव का खतरा बढ़ जाता है।
कलियासोत के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण का दावा
घटना के बाद कलियासोत नदी और जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में हुए निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है और यहां निर्माण से पहले विशेष नियमों एवं अनुमतियों का पालन किया जाना आवश्यक था।
स्थानीय स्तर पर NGT के रेड जोन और जलग्रहण क्षेत्र से संबंधित नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि संबंधित परिसर कैचमेंट, बफर या प्रतिबंधित क्षेत्र की किस सीमा में आता है, इसकी पुष्टि आधिकारिक राजस्व एवं पर्यावरणीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही की जा सकती है।
हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कलियासोत और केरवा जलाशयों की सीमा, फुल टैंक लेवल तथा आसपास के प्रतिबंधित निर्माण क्षेत्र का वैज्ञानिक सीमांकन करने पर जोर दिया है। ऐसे में आम्रवेली परिसर के दस्तावेजों और स्वीकृत नक्शे का संबंधित जलाशय के आधिकारिक मानचित्र से मिलान करने की मांग उठ रही है।
भवन और सड़क की संयुक्त तकनीकी जांच की मांग
रहवासियों ने प्रशासन, नगर निगम और नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से पूरे मामले की संयुक्त जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि भवन निर्माण की अनुमति, स्वीकृत नक्शा, भूमि उपयोग, पर्यावरणीय मंजूरी, ड्रेनेज प्लान और सड़क निर्माण से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
जांच के दौरान भू-तकनीकी विशेषज्ञों से जमीन की मजबूती का परीक्षण कराने की आवश्यकता भी बताई जा रही है। इसके लिए मिट्टी के नमूने, भूमिगत जल की स्थिति और आसपास के प्राकृतिक जल प्रवाह का अध्ययन किया जा सकता है।
यदि विशेषज्ञों को इमारत या आसपास की जमीन पर किसी प्रकार का खतरा दिखाई देता है, तो रहवासियों की सुरक्षा के लिए तत्काल एहतियाती कदम उठाना आवश्यक होगा। प्रशासन को क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत से पहले घटना का मूल कारण पता करना होगा, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति न बने।
जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि जांच में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों, निर्माण एजेंसी अथवा बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लोगों का सवाल है कि घनी आबादी और बहुमंजिला इमारत के पास सड़क कैसे धंस गई और संबंधित विभागों ने पहले खतरे के संकेतों पर ध्यान क्यों नहीं दिया।
फिलहाल वाहनों को निकालने और क्षतिग्रस्त स्थान को सुरक्षित करने का काम किया जा रहा है। सड़क धंसने के वास्तविक कारण, निर्माण अनुमति और कैचमेंट क्षेत्र से जुड़े आरोपों की स्थिति विस्तृत तकनीकी तथा प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
