Bhopal Atal Awas Scheme Scam : सरकारी योजना के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़,
अटल आवास योजना के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, भोपाल पुलिस ने खोली परत-दर-परत साजिश
Bhopal Atal Awas Scheme Scam : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी आवास योजनाओं के नाम पर चल रहे एक बड़े ठगी रैकेट का टीटी नगर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अटल आवास योजना के तहत लोगों को सस्ते फ्लैट दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
पुलिस ने भोपाल निवासी प्रवीण उर्फ प्रमिला तिवारी और रायसेन निवासी पवन शर्मा को गिरफ्तार किया है। दोनों से पूछताछ में ऐसे कई खुलासे हुए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि यह सिर्फ दो लोगों का मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क है।
शिकायत से शुरू हुई जांच, सामने आया बड़ा फ्रॉड
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब कोटरा सुल्तानाबाद निवासी प्रतीक सोनी ने टीटी नगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि उसे अटल आवास योजना के तहत सस्ते फ्लैट दिलाने का झांसा देकर ठगी की गई है।
प्रतीक सोनी ने बताया कि उनकी मुलाकात करीब तीन साल पहले नगर निगम कार्यालय में प्रमिला तिवारी से हुई थी। उस समय बातचीत के दौरान प्रमिला ने खुद को सरकारी आवास योजना से जुड़ा हुआ बताकर भरोसा दिलाया कि वह उन्हें योजना के तहत फ्लैट दिला सकती है।
धीरे-धीरे आरोपी ने पीड़ित से संपर्क बढ़ाया और प्रक्रिया के नाम पर पैसे लेना शुरू कर दिया।
1.80 लाख रुपये की ठगी, नकद और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन दोनों शामिल
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने पीड़ित से कुल 1.80 लाख रुपये की ठगी की। इसमें 1.50 लाख रुपये नकद और 30 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से लिए गए थे।
आरोपी ने पैसे लेने के बाद पीड़ित को एक फर्जी रसीद भी दी, जिससे उसे भरोसा रहे कि उसका फ्लैट आवंटन प्रक्रिया में है। इस फर्जी रसीद को देखकर पीड़ित को लंबे समय तक गुमराह किया गया।
जब पीड़ित ने नगर निगम कार्यालय जाकर जानकारी ली, तो वहां साफ हुआ कि उसके नाम पर किसी भी तरह की फ्लैट अलॉटमेंट प्रक्रिया दर्ज ही नहीं थी। इसके बाद उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
गिरोह की कार्यप्रणाली: सरकारी दफ्तरों में बनाते थे संपर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह लोगों को निशाना बनाने के लिए सरकारी दफ्तरों और नगर निगम कार्यालय जैसे स्थानों को चुना करता था।
आरोपी प्रमिला तिवारी अक्सर ऐसे स्थानों पर लोगों से संपर्क बनाती थी, जहां सरकारी योजनाओं से जुड़े कामकाज के लिए लोग आते थे। वहीं से वह लोगों को निशाना बनाकर उन्हें कम कीमत में फ्लैट दिलाने का लालच देती थी।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह विश्वास जीतने के लिए पहले छोटी-छोटी जानकारी देता था और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम की मांग करता था।
पुलिस की जांच में खुला संगठित नेटवर्क
टीटी नगर थाना निरीक्षक गौरव सिंह दोहर के अनुसार, यह मामला केवल दो आरोपियों तक सीमित नहीं है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हैं, जो अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे थे।
पुलिस का कहना है कि कुछ लोग दस्तावेज तैयार करने में मदद करते थे, कुछ लोग फर्जी रसीद बनाने में और कुछ लोग ग्राहकों को आकर्षित करने में लगे हुए थे।
अब तक इस गिरोह के खिलाफ तीन से चार औपचारिक शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जबकि आशंका है कि और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।
पवन शर्मा की भूमिका भी जांच के घेरे में
रायसेन निवासी पवन शर्मा को इस मामले में सह-आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को शक है कि वह पैसों के लेन-देन और नेटवर्क विस्तार में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कुल कितने लोगों से ठगी की गई है और इस गिरोह की पहुंच किन-किन शहरों तक फैली हुई है।
पुराने विवादों से भी जुड़ा है मामला
जांच के दौरान आरोपी प्रवीण उर्फ प्रमिला तिवारी का एक पुराना विवाद भी सामने आया है। करीब 9 महीने पहले उसने जहांगीराबाद थाने में चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उसने एक कार्यवाहक डीएसपी पर गंभीर आरोप लगाए थे।
उस समय पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर जांच की थी। बाद में मामला स्पष्ट होने के बाद उस शिकायत को लेकर विभागीय कार्रवाई भी हुई थी।
अब पुलिस इस पुराने घटनाक्रम को भी इस केस के संदर्भ में जांच रही है ताकि आरोपी की पृष्ठभूमि को पूरी तरह समझा जा सके।
पुलिस की अगली कार्रवाई: रिमांड बढ़ाने की तैयारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी प्रमिला तिवारी की रिमांड 19 जून 2026 को पूरी हो रही है। ऐसे में पुलिस उसे दोबारा रिमांड पर लेने के लिए अदालत में आवेदन करेगी।
पुलिस का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई और अहम नाम और लेन-देन के सबूत सामने आ सकते हैं। इसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अन्य पीड़ितों के सामने आने की संभावना
पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई लोगों को निशाना बना चुका है। अभी तक केवल कुछ शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी ने भी इस तरह की ठगी का अनुभव किया है, तो वह तुरंत पुलिस को सूचना दे।
सरकारी योजनाओं के नाम पर बढ़ते फ्रॉड पर सवाल
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े को कैसे रोका जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी और जल्दी लाभ पाने की इच्छा के कारण लोग ऐसे गिरोहों के जाल में फंस जाते हैं। वहीं, ऐसे मामलों में फर्जी दस्तावेज और रसीदें लोगों को लंबे समय तक भ्रमित करती हैं।
पुलिस की अपील: सतर्क रहें, सत्यापन जरूरी
भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी योजना के तहत फ्लैट, जमीन या अन्य लाभ लेने से पहले पूरी जानकारी और आधिकारिक सत्यापन जरूर करें।
किसी भी व्यक्ति को बिना सरकारी प्रक्रिया के पैसे न दें और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत शिकायत करें।
निष्कर्ष
भोपाल में अटल आवास योजना के नाम पर सामने आया यह ठगी मामला एक सुनियोजित और संगठित फ्रॉड की ओर इशारा करता है। पुलिस की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज कर दी गई है और पुलिस पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हुई है।
