फर्जी आधार और पासपोर्ट मामले में 100 से अधिक लोग STF के रडार पर
असम और बंगाल समेत कई राज्यों में भेजी गईं पांच विशेष टीमें
Bhopal। बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा कथित तौर पर फर्जी तरीके से आधार कार्ड तैयार कर पासपोर्ट बनवाने के मामले की जांच अब व्यापक स्तर पर पहुंच गई है। मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मामले में 100 से अधिक संदिग्ध लोगों को अपने रडार पर लिया है। संदिग्धों की गिरफ्तारी और नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए STF ने पांच विशेष टीमें गठित की हैं, जिन्हें असम, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में भेजा गया है।
पासपोर्ट बनवाने वालों से भी होगी पूछताछ
जांच के दौरान STF की नजर केवल फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों पर ही नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी है, जिनके नाम से संदिग्ध पासपोर्ट जारी हुए हैं। पुलिस अब पासपोर्ट सत्यापन की प्रक्रिया की भी बारीकी से जांच कर रही है।
जिन पुलिसकर्मियों ने इन पासपोर्ट के लिए भौतिक सत्यापन किया था, उनसे भी पूछताछ की जाएगी। जांच में यह देखा जा रहा है कि सत्यापन के दौरान संबंधित व्यक्तियों की वास्तविक पहचान की जांच की गई थी या नहीं और पुराने पहचान दस्तावेजों का परीक्षण किया गया था या नहीं।
अब तक 70 संदिग्ध पासपोर्ट सामने आए
STF की जांच में अब तक करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट सामने आने की जानकारी है। इनमें से 40 पासपोर्ट भोपाल के अन्नानगर स्थित एक ही बौद्ध मठ के पते पर बनाए जाने की बात सामने आई है। वहीं डबरा में भी इसी तरह एक ही बौद्ध मठ के पते पर 17 संदिग्ध पासपोर्ट तैयार किए गए।
जांच एजेंसी को आशंका है कि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट तैयार किए गए हो सकते हैं। बैतूल से 11 तथा छिंदवाड़ा और पांढुर्णा से एक-एक संदिग्ध पासपोर्ट की जानकारी भी जांच के दायरे में है।
चार आरोपित गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी
मामले में अब तक चार आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। शुरुआती तौर पर गिरफ्तार किए गए आरोपितों में रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी के नाम सामने आए हैं। दोनों के असम के कामरूप जिले में रहने की जानकारी के बाद STF की एक टीम वहां भी भेजी गई है।
जांच में सामने आया है कि विप्लव अधिकारी ने कथित तौर पर इसी पासपोर्ट के जरिए कंबोडिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया की यात्रा की थी। वहीं रियाल चौधरी को नेटवर्क का प्रमुख आरोपी बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने डबरा के 17 लोगों के पासपोर्ट और संबंधित दस्तावेज तैयार कराने में भूमिका निभाई।
एक मोबाइल नंबर से बने कई पासपोर्ट
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि डबरा से बनाए गए सभी 17 संदिग्ध पासपोर्ट में एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा रियाल चौधरी द्वारा कथित तौर पर गुम होने का आधार बनाकर अपने नाम से चार बार पासपोर्ट बनवाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।
पुलिस सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली पुलिस सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। STF यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी पहचान और दस्तावेजों के बावजूद संबंधित आवेदकों का सत्यापन कैसे पूरा हुआ।
जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क का दायरा मध्य प्रदेश के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों तक कितना फैला हुआ है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ संदिग्ध लोगों और फर्जी दस्तावेजों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
