भोपाल में जमीन खाली नहीं होने से मेट्रो का काम अटका, मुआवजा मिलने के बाद भी 12 से ज्यादा मकान खाली नहीं
Bhopal Metro Project: बोगदा पुल से करोंद तक मेट्रो निर्माण में भूमि बनी बाधा, पातरा पुल से बरखेड़ी के बीच प्रभावित मकान मालिकों को मुआवजा मिलने के बावजूद नहीं हटे निर्माण; सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था पर भी असर
भोपाल। राजधानी भोपाल में मेट्रो परियोजना का काम कुछ हिस्सों में जमीन खाली नहीं होने के कारण प्रभावित हो रहा है। बोगदा पुल से करोंद तक प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर में पातरा पुल से बरखेड़ी के बीच मेट्रो निर्माण और सड़क चौड़ीकरण की जद में आए दो दर्जन से अधिक मकानों के मालिकों को मुआवजा दिया जा चुका है। इसके बावजूद 12 से ज्यादा मकान अब तक खाली नहीं किए गए हैं।
प्रभावित लोगों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि पहुंचने के बाद भी मकान खाली नहीं होने से उन्हें हटाने और जमीन मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को सौंपने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसका असर मेट्रो निर्माण के साथ सड़क चौड़ीकरण और आसपास की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
पातरा पुल से बरखेड़ी के बीच फंसा मामला
पातरा पुल से बरखेड़ी तक का क्षेत्र मेट्रो परियोजना और सड़क चौड़ीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस हिस्से में निर्माण कार्य के लिए जिन मकानों और जमीन की आवश्यकता है, उन्हें खाली कराने की प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है।
जानकारी के अनुसार दो दर्जन से अधिक प्रभावित मकान मालिकों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया की जा चुकी है। मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से राशि संबंधित लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है, लेकिन इनमें से 12 से अधिक मकान अब भी खाली नहीं हुए हैं।
ऐसे में संबंधित निर्माणों को हटाकर जमीन परियोजना के लिए उपलब्ध कराने का काम अटका हुआ है।
मुआवजा मिलने के बाद भी क्यों खाली नहीं हो रहे मकान?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुआवजा मिलने के बावजूद प्रभावित मकान खाली क्यों नहीं हो रहे हैं। कई परिवारों को अपने लिए वैकल्पिक आवास और सामान स्थानांतरित करने जैसी व्यावहारिक व्यवस्थाएं करनी पड़ रही हैं। प्रशासन जमीन जल्द खाली कराने के प्रयास में जुटा है।
जब तक प्रभावित मकान पूरी तरह खाली नहीं होते और आवश्यक कार्रवाई के बाद जमीन मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को नहीं सौंपी जाती, तब तक इस हिस्से में निर्माण कार्य की रफ्तार प्रभावित रहने की आशंका है।
मेट्रो के साथ सड़क चौड़ीकरण भी प्रभावित
भूमि उपलब्ध नहीं होने का असर केवल मेट्रो परियोजना तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण का काम भी इससे जुड़ा हुआ है। मकानों को हटाए बिना सड़क के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
भोपाल में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इस क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल जमीन संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं होने से काम प्रभावित है।
काजीकैंप में बैरिकेडिंग से रोजाना जाम
मेट्रो निर्माण से जुड़े कार्यों और बैरिकेडिंग के कारण काजीकैंप क्षेत्र में यातायात की समस्या भी बढ़ी है। सड़क संकरी होने और निर्माण गतिविधियों के कारण वाहन चालकों को रोजाना जाम का सामना करना पड़ रहा है।
व्यस्त समय में समस्या और बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही के बीच उपलब्ध सड़क का हिस्सा कम होने से यातायात की रफ्तार धीमी हो जाती है।
स्थानीय लोगों और इस मार्ग से नियमित गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए निर्माण कार्य में देरी सीधे तौर पर परेशानी का कारण बन रही है।
प्रशासन का दावा- 15 दिनों में जमीन खाली कराने का प्रयास
प्रशासन की ओर से प्रभावित जमीन को जल्द खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है। संबंधित एसडीएम के अनुसार आगामी 15 दिनों के भीतर जमीन खाली कराने का प्रयास किया जा रहा है।
यदि तय अवधि में प्रभावित मकान खाली हो जाते हैं और जमीन मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को सौंप दी जाती है, तो निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हालांकि जमीन खाली कराने की वास्तविक समयसीमा प्रभावित परिवारों की स्थिति और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी।
बोगदा पुल-करोंद कॉरिडोर के लिए जमीन अहम
बोगदा पुल से करोंद तक मेट्रो का प्रस्तावित मार्ग शहर के महत्वपूर्ण और घनी आबादी वाले हिस्सों से जुड़ा है। ऐसे क्षेत्रों में बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध कराना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।
मेट्रो के लिए जरूरी भूमि मिलने के बाद ही संबंधित हिस्सों में निर्माण गतिविधियां पूरी गति से आगे बढ़ाई जा सकती हैं। इसी कारण पातरा पुल-बरखेड़ी क्षेत्र में लंबित जमीन का मामला परियोजना के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।
फिलहाल प्रशासन के सामने प्रभावित मकानों को खाली कराकर जमीन मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को सौंपने की चुनौती है। जमीन उपलब्ध होने के बाद मेट्रो और सड़क चौड़ीकरण के लंबित कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
