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Bhopal में ‘किन्नर जिहाद’ का आरोप: किन्नरों ने जबरन धर्म परिवर्तन का किया खुलासा

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Published On: 10 February 2026
Bhopal Transgender Community Raises Alarm Over Alleged Forced Islamic Conversion
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Bhopal में ‘किन्नर जिहाद’ का आरोप, हिंदू किन्नरों का दावा – जबरन धर्म परिवर्तन और मांस खिलाने की बातें

Bhopal में किन्नरों से जुड़े एक विवादित मामले ने सामाजिक और धार्मिक बहस को फिर से उकसाया है। हिंदू किन्नरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें जबरन मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें कलमा पढ़ने, मांस खाने और धार्मिक अभ्यास करने के लिए दबाव बनाया गया। इस मामले ने “किन्नर जिहाद” के रूप में चर्चा पाई है, जिसे उन्होंने लव जिहाद और लैंड जिहाद के बाद एक नया विषय बताया है।

किन्नरों के आरोप

Bhopal के हिंदू किन्नरों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे सनातनी किन्नर हैं, लेकिन कुछ समूहों के दबाव में उन्हें जबरन मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। किन्नर अखाड़ा के संस्थापक ऋषि अजय दास ने बताया कि उनका अखाड़ा 2016 में इस उद्देश्य से बनाया गया था कि जिन हिंदू किन्नरों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया था, वे अपने मूल धर्म में लौट सकें।

ऋषि अजय दास का दावा है कि कुछ किन्नरों ने जिहादियों के सहयोग से उनके अभियान को रोका, और परिणामस्वरूप 90% हिंदू किन्नरों का इस्लामीकरण हो चुका है। उनका कहना है कि जैसे लव जिहाद देश में एक विवादित मुद्दा है, वैसे ही अब “किन्नर जिहाद” भी सामने आया है।

कथित गतिविधियों का विवरण

किन्नर अखाड़ा के प्रमुख ने आरोप लगाया कि मुस्लिम किन्नर बनाने के लिए जबरन कलमा पढ़ाया जाता है, मांस खिलाया जाता है और अन्य धार्मिक क्रियाओं में भाग लेने के लिए दबाव डाला जाता है। साथ ही उनका दावा है कि कुछ किन्नरों के साथ अत्याचार किए गए और उनके ऊपर नियंत्रण के लिए गुट और गुंडों को लगाया गया।

हिंदू किन्नर काजल ठाकुर ने भी व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। उनका कहना है कि उन्हें जन्मनाम काजल से बदलकर जावेद कर दिया गया और उनके दो आधार कार्ड बनवाए गए। उन्होंने बताया कि कई किन्नरों को धर्म परिवर्तन करने के लिए बार-बार दबाव बनाया गया। काजल का दावा है कि अब वे अपने घर लौट चुके हैं और सनातनी धर्म में ही रहना चाहते हैं।

धर्म परिवर्तन पर दबाव और कथित फंडिंग

अखाड़ा प्रमुख का यह भी दावा है कि धर्म परिवर्तन अभियान के पीछे वित्तीय और बाहरी नेटवर्क भी हैं। उनका कहना है कि किन्नर जिहाद के लिए फंडिंग पाकिस्तान और बांग्लादेश से आती है। इसके अलावा, उनका कहना है कि धर्म परिवर्तन के बाद किन्नरों के ऊपर दबाव डाला जाता है कि वे फंड वापस भेजें। हालांकि, इन दावों पर कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

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सामाजिक और कानूनी पहलू

कृषि और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि किन्नरों से जुड़े ऐसे आरोपों को बहुत सतर्कता से देखा जाना चाहिए। किन्नर समुदाय पहले से ही समाज में भेदभाव और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है। धर्म परिवर्तन और जबरन प्रभाव के आरोप संवेदनशील हैं और इन्हें कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से जांच की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में उचित जांच के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना समाज में तनाव बढ़ा सकता है। सरकारी एजेंसियों और सामाजिक संगठनों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किन्नरों के अधिकार सुरक्षित रहें और किसी भी व्यक्ति पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव न डाला जाए।

किन्नर समुदाय की प्रतिक्रिया

किछ हिंदू किन्नर संगठन इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठा रहे हैं और अपने सदस्यों को वापस उनके मूल धर्म में लौटाने का अभियान चला रहे हैं। उनका दावा है कि कई किन्नरों ने अब अपने मूल धर्म में लौटने का निर्णय लिया है और वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार हैं।

किन्नर काजल ने विशेष रूप से कहा कि उनके समुदाय को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका मानना है कि धार्मिक और आर्थिक दबाव के कारण उनका जीवन मुश्किल हो गया है। उन्होंने भोपालवासियों और हिंदू समुदाय से सहयोग की अपील की है।

निष्कर्ष

Bhopal में सामने आया “किन्नर जिहाद” का मामला सामाजिक और धार्मिक संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है। हिंदू किन्नरों के आरोपों के अनुसार, उन्हें जबरन धर्म परिवर्तन और अन्य धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है।

यह मामला एक बार फिर देश में धर्म, समाज और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों पर बहस को सामने लाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि मीडिया और सामाजिक संस्थाएं निष्पक्ष रहकर मामले की जांच और जागरूकता फैलाने का काम करें।

किन्नर समुदाय का कहना है कि वे अपने अधिकारों और मूल धर्म के साथ रहना चाहते हैं। इस मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार, सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी व्यक्ति पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव न डाला जाए और समुदाय के अधिकारों की रक्षा हो।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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