Bhopal Petrol Pump Test: भोपाल में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, पेट्रोल पंप के नोजल से 50 एमएल कम पेट्रोल निकला, अवैध गैस रिफिलिंग मशीन भी जब्त
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और ईंधन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने शनिवार को शहर के विभिन्न पेट्रोल पंपों और गैस रिफिलिंग केंद्रों पर व्यापक जांच अभियान चलाया। इस दौरान एक पेट्रोल पंप पर हर पांच लीटर पेट्रोल में 50 मिलीलीटर कम ईंधन निकलने की पुष्टि हुई, जिसके बाद संबंधित नोजल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। वहीं एक अन्य पेट्रोल पंप के डीजल टैंक में पानी मिलने का मामला भी सामने आया। इसके अलावा माता मंदिर क्षेत्र में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से वाहनों में अवैध रूप से गैस भरने का गोरखधंधा पकड़ा गया, जहां से गैस ट्रांसफर मशीन और सिलेंडर जब्त किए गए।
यह कार्रवाई खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण अभियान के तहत की गई, जिसका उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर माप-तौल की शुद्धता, ईंधन की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना था।
उपभोक्ताओं के हित में चलाया गया विशेष जांच अभियान
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, समय-समय पर पेट्रोल पंपों की जांच इसलिए की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ग्राहकों को निर्धारित मात्रा में ईंधन मिले और किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के निर्देशन में गठित टीम ने शहर के कई प्रमुख पेट्रोल पंपों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पेट्रोल और डीजल के स्टॉक, डिस्पेंसिंग मशीन, माप-तौल की सटीकता, लाइसेंस की शर्तों तथा सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच की गई।
अभियान के दौरान सामने आई अनियमितताओं के आधार पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित उपकरणों को सील किया और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।
कमला पार्क स्थित पेट्रोल पंप पर मिली प्रशासनिक अनियमितता
निरीक्षण के दौरान टीम सबसे पहले कमला पार्क स्थित योर सर्विस स्टेशन (HPCL) पहुंची।
यहां पेट्रोल और डीजल के स्टॉक की जांच की गई, जिसमें रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर निर्धारित सीमा के भीतर पाया गया। हालांकि निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को एक प्रशासनिक अनियमितता मिली।
जांच में पाया गया कि पेट्रोल पंप के विस्फोटक (Explosive) लाइसेंस में जितनी डिस्पेंसिंग यूनिट की अनुमति दी गई थी, उससे दो अतिरिक्त यूनिट संचालित की जा रही थीं।
खाद्य विभाग ने इसे लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन माना और संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। विभागीय अधिकारियों ने पेट्रोल पंप संचालक से इस संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा है।
आरके पेट्रोलियम पंप पर सामने आई गंभीर गड़बड़ी
निरीक्षण दल ने इसके बाद पीएंडटी चौराहे स्थित आरके पेट्रोलियम पेट्रोल पंप की जांच की।
यहां स्टॉक रिकॉर्ड में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं मिली, लेकिन मशीनों की तकनीकी जांच के दौरान दो महत्वपूर्ण अनियमितताएं सामने आईं।
सबसे पहले अधिकारियों ने पाया कि डीजल टैंक में लगभग 116 लीटर पानी मौजूद था। विभाग के अनुसार, डीजल में पानी की मौजूदगी वाहन इंजनों के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है और इससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अधिकारियों ने तत्काल निर्देश दिए कि टैंक से पूरा पानी निकालने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बाद ही डीजल की बिक्री दोबारा शुरू की जाए।
हर पांच लीटर पर 50 एमएल कम निकला पेट्रोल
आरके पेट्रोलियम पंप पर जांच के दौरान सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब माप-तौल परीक्षण में पाया गया कि एक पेट्रोल नोजल से हर 5 लीटर पर लगभग 50 मिलीलीटर कम पेट्रोल निकल रहा था।
सरकारी मानकों के अनुसार पेट्रोल और डीजल वितरण में निर्धारित सीमा से अधिक अंतर स्वीकार्य नहीं होता।
जैसे ही विभागीय टीम ने इस गड़बड़ी की पुष्टि की, संबंधित नोजल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
इसके साथ ही विभाग ने मशीन की तकनीकी जांच और कैलिब्रेशन रिपोर्ट भी मांगी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह तकनीकी खराबी थी या जानबूझकर की गई छेड़छाड़।
उपभोक्ताओं को हो सकता था बड़ा आर्थिक नुकसान
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी पेट्रोल पंप पर लगातार कम ईंधन दिया जाए तो प्रतिदिन सैकड़ों उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
पहली नजर में 50 मिलीलीटर की कमी मामूली लग सकती है, लेकिन यदि प्रतिदिन हजारों लीटर ईंधन की बिक्री होती है तो यह कमी बड़ी वित्तीय अनियमितता का रूप ले सकती है।
इसी कारण विभाग ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करता है।
माता मंदिर क्षेत्र में पकड़ी गई अवैध गैस रिफिलिंग
निरीक्षण अभियान के दौरान खाद्य विभाग की टीम को माता मंदिर क्षेत्र में एक और बड़ी अनियमितता मिली।
जांच के दौरान अधिकारियों ने एक जर्जर मकान में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से मोटर संचालित मशीन के माध्यम से वाहनों में गैस भरने की तैयारी पकड़ी।
यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी वैध अनुमति के संचालित की जा रही थी, जो सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत खतरनाक मानी जाती है।
मौके से गैस ट्रांसफर मशीन और सिलेंडर जब्त
कार्रवाई के दौरान विभाग ने मौके से भारत गैस के दो घरेलू एलपीजी सिलेंडर और एक 1 हॉर्स पावर गैस ट्रांसफर मोटर जब्त की।
अधिकारियों ने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग केवल घरेलू कार्यों के लिए किया जा सकता है। इनका व्यावसायिक उपयोग या वाहनों में गैस भरना नियमों के विरुद्ध है।
ऐसी गतिविधियां आग, विस्फोट और गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी से बढ़ सकता है बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर से वाहनों में गैस भरना अत्यंत जोखिमपूर्ण कार्य है।
इस प्रकार की अवैध रिफिलिंग के दौरान यदि थोड़ी सी भी गैस रिसाव हो जाए तो आग लगने या विस्फोट जैसी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।
इसी वजह से सरकार ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करती है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि जांच के दौरान सामने आए तीनों मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 तथा अन्य संबंधित नियमों के तहत प्रकरण दर्ज किए जाएंगे।
सभी मामलों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
यदि जांच में अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित संचालकों के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
विभाग ने पेट्रोल पंप संचालकों को दिए निर्देश
निरीक्षण के बाद विभाग ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से अपनी मशीनों का कैलिब्रेशन कराएं, लाइसेंस की शर्तों का पालन करें तथा ईंधन की गुणवत्ता बनाए रखें।
इसके साथ ही अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इसी प्रकार के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए?
खाद्य विभाग ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि यदि किसी पेट्रोल पंप पर कम ईंधन मिलने, मशीन में गड़बड़ी, गुणवत्ता पर संदेह या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता दिखाई दे तो उसकी तुरंत शिकायत संबंधित विभाग में करें।
उपभोक्ता माप-तौल की जांच के लिए पेट्रोल पंप पर उपलब्ध 5 लीटर टेस्ट मेजर का उपयोग करने की मांग भी कर सकते हैं। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो उसकी सूचना प्रशासन को देने पर कार्रवाई की जाती है।
निष्कर्ष
भोपाल में खाद्य विभाग द्वारा चलाए गए इस विशेष जांच अभियान में सामने आई अनियमितताएं यह दर्शाती हैं कि ईंधन वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी बनाए रखना कितना आवश्यक है। एक ओर जहां पेट्रोल पंप पर कम पेट्रोल मिलने और डीजल टैंक में पानी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की गई, वहीं दूसरी ओर घरेलू गैस सिलेंडरों से अवैध गैस रिफिलिंग का खुलासा भी हुआ। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। आने वाले समय में भी इस प्रकार के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे ताकि उपभोक्ताओं को सही मात्रा और गुणवत्ता का ईंधन उपलब्ध कराया जा सके।
