Bhopal E-Bus का इंतजार बढ़ा, 29 जुलाई के बाद यात्रियों के साथ शुरू होगा ट्रायल रन
27 जुलाई से प्रस्तावित ट्रायल टला, अब 29 जुलाई के बाद चलेगी बसें
भोपाल। राजधानी Bhopal E-Bus का इंतजार कर रहे यात्रियों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) ने 27 जुलाई से प्रस्तावित यात्रियों के साथ ई-बसों के ट्रायल रन को फिलहाल टाल दिया है। अब 29 जुलाई के बाद दो निर्धारित रूटों पर यात्रियों के साथ ई-बसों का परीक्षण शुरू किया जाएगा।
बीसीएलएल अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल रन के दौरान यात्रियों को सामान्य सार्वजनिक परिवहन की तरह ही बसों में सफर करना होगा और इसके लिए निर्धारित किराया देकर टिकट लेना अनिवार्य रहेगा। इस परीक्षण का उद्देश्य केवल बस संचालन ही नहीं, बल्कि टिकटिंग सिस्टम, किराया संग्रह और यात्री सुविधाओं की व्यवस्था को भी परखना है।
पहले चरण में 10 ई-बसों का होगा संचालन
बीसीएलएल ने पहले 27 जुलाई से 10 इलेक्ट्रिक बसों को दो रूटों पर यात्रियों के साथ चलाने की योजना बनाई थी। लेकिन परिचालन कार्यक्रम में बदलाव के कारण इसे आगे बढ़ा दिया गया है।
अब 29 जुलाई के बाद 10 ई-बसें दो प्रमुख मार्गों पर चलेंगी। ट्रायल के दौरान बसों की गति, यात्रियों की संख्या, समय-सारिणी, स्टॉपेज और संचालन व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल सफल रहने के बाद अगस्त महीने से ई-बसों का नियमित संचालन शुरू करने की तैयारी है।
इन दो रूटों पर शुरू होगा ट्रायल
पहले चरण में ई-बसों का परीक्षण इन दो रूटों पर किया जाएगा—
- चिरायु अस्पताल से बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन होते हुए बैरागढ़-चिचली तक।
- चिरायु अस्पताल से बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन होते हुए रेलवे कोच फैक्ट्री तक।
इन दोनों मार्गों पर यात्रियों की सुविधा और बस संचालन की व्यवहारिक स्थिति को समझने के लिए परीक्षण किया जाएगा।
भोपाल में चलेंगी 245 इलेक्ट्रिक बसें
राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुल 245 ई-बसों के संचालन की योजना बनाई गई है। इसमें 100 बसें प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत और 145 बसें भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) की होंगी।
पीएम ई-बस सेवा के तहत आने वाली 100 बसों में से 21 बसें भोपाल पहुंच चुकी हैं। आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से अन्य बसों को भी शहर की सड़कों पर उतारा जाएगा।
12 रूट किए गए हैं तय
ई-बसों के संचालन के लिए शहर और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाले 12 रूट तय किए गए हैं। इनमें सबसे लंबा रूट सीहोर से रातापानी तक का होगा, जिसकी लंबाई 68.5 किलोमीटर है।
वहीं सबसे छोटा रूट कोच फैक्ट्री से गोल-जोड़ तक का होगा, जिसकी लंबाई 28 किलोमीटर है।
प्रमुख रूटों में शामिल हैं—
- सीहोर से रातापानी – 68.5 किमी
- फंदा से मंडीदीप – 65.3 किमी
- बिलखिरिया से सीहोर – 61.5 किमी
- परवलिया सड़क से औबेदुल्लागंज – 56.8 किमी
- सीहोर से कटारा बायपास तिराहा – 53.7 किमी
- सूखी सेवनिया से भोजपुर – 49 किमी
- कोच फैक्ट्री से गोल-जोड़ – 28 किमी
बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में बनेंगे डिपो
ई-बसों के संचालन के लिए दो डिपो तैयार किए जा रहे हैं। इनमें बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर डिपो शामिल हैं। इन डिपो से बसों के संचालन, चार्जिंग और रखरखाव की व्यवस्था की जाएगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी ई-बसें
नई इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए कई आधुनिक तकनीकें उपलब्ध होंगी। इनमें एयर कंडीशनिंग, जीपीएस आधारित रियल टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल टिकटिंग और मोबाइल ऐप के माध्यम से पास बनाने की सुविधा शामिल होगी।
बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए पांच सीसीटीवी कैमरे, एआई आधारित पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम, पैनिक बटन, स्टॉप बटन, एलईडी यात्री सूचना प्रणाली और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम भी लगाए जाएंगे।
दिव्यांग यात्रियों के लिए ऑटोमेटिक हाइड्रोलिक व्हीलचेयर लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन अधिक सुविधाजनक और समावेशी बन सकेगा।
रोजाना 180 किलोमीटर चलेंगी बसें
अनुबंध के अनुसार प्रत्येक ई-बस को प्रतिदिन न्यूनतम 180 किलोमीटर चलाना अनिवार्य होगा। बस संचालन के लिए ऑपरेटर को 58.14 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाएगा।
इसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग हिस्सेदारी तय की गई है। योजना का उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था तैयार करना है।
यात्रियों के लिए बढ़ेगी सुविधा
ई-बस सेवा शुरू होने से भोपाल के यात्रियों को बेहतर, आरामदायक और प्रदूषण मुक्त परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। शहर में बढ़ते यातायात दबाव और प्रदूषण को देखते हुए इलेक्ट्रिक बसों को सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।
बीसीएलएल सीईओ अंजू अरुण कुमार ने बताया कि अभी दो दिन तक बिना यात्रियों के ट्रायल रन जारी रहेगा। इसके बाद 29 जुलाई से दो रूटों पर यात्रियों के साथ परीक्षण शुरू होगा और यात्रियों को निर्धारित टिकट लेकर ही यात्रा करनी होगी।
ई-बसों का सफल संचालन भोपाल की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है और शहर को आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल यातायात प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ाएगा।
