भोपाल का 90 डिग्री पुल मामला: हाईकोर्ट ने ठेकेदार को राहत दी, मैनिट से तकनीकी जांच का आदेश
भोपाल, मध्य प्रदेश: राजधानी भोपाल के ऐशबाग इलाके में बने 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। इस पुल को लेकर सरकार ने कई अधिकारियों पर कार्रवाई की और निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। ठेकेदार पुनीत चड्डा ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
मंगलवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ शामिल थे, ने सुनवाई करते हुए ठेकेदार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने ठेकेदार और कंसल्टेंट डायनामिक कंसल्टेंट की ब्लैकलिस्टिंग पर रोक लगाते हुए मामले की तकनीकी जांच का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने मैनिट को दी जांच का निर्देश
हाईकोर्ट ने मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT) के निदेशक को निर्देश दिया कि स्ट्रक्चरल और सिविल इंजीनियरिंग में योग्यता वाले एक वरिष्ठ प्रोफेसर से पुल का निरीक्षण करवा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि पुल का 90 डिग्री मोड़ और अन्य निर्माण कार्य सामान्य ड्रॉइंग के अनुसार हुआ है या नहीं।
कोर्ट ने कहा कि तकनीकी निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD), भोपाल नगर निगम और भोपाल विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंताओं को पूरी मदद करनी होगी। इस निरीक्षण का खर्च लगभग 1 लाख रुपये है, जिसे ठेकेदार वहन करेगा।
ठेकेदार ने कहा – डिजाइन में ही थी गड़बड़ी
ठेकेदार पुनीत चड्डा के वकील प्रवीण दुबे ने कोर्ट को बताया कि पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा दी गई ड्रॉइंग और डिजाइन के अनुसार हुआ है। विभाग ने दावा किया कि निर्माण ड्रॉइंग के अनुसार नहीं हुआ, जिसके आधार पर ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वकील का कहना है कि यदि डिजाइन में गलती थी, तो ठेकेदार को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
प्रशासन और विभाग की प्रतिक्रिया
इस मामले के बाद सरकार ने पुल निर्माण में शामिल दो मुख्य अभियंताओं समेत कुल सात इंजीनियरों को निलंबित किया था। इसके अलावा ठेकेदार को भी ब्लैकलिस्ट किया गया। वहीं, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता पीसी वर्मा का कहना है कि नियम और शर्तों के अनुसार ठेकेदार को कार्य करना था। यदि ड्रॉइंग में गलती थी, तो ठेकेदार को निर्माण कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए था।
सुधार और भविष्य की योजना
ऐशबाग ROB पर निर्माण कार्य में सुधार के लिए रेलवे से अतिरिक्त 5 से 6 फीट जमीन मांगी गई है। इसके साथ ही ब्रिज के मोड़ और डिज़ाइन में सुधार किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में IIT दिल्ली, MANIT भोपाल, School of Planning & Architecture और NHAI के विशेषज्ञों से भी सुझाव लिए जाएंगे, ताकि ट्रैफिक का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 10 सितंबर के लिए तय की है, जब MANIT की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

