Bhartiya Human Rights Cooperative Trust ने ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महिला जागरूकता और रोजगार अभियान शुरू किया
देवास। ग्रामीण महिलाओं के लिए नई पहल
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट (Bhartiya Human Rights Cooperative Trust) ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए एक व्यापक महिला जागरूकता और रोजगार अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का नेतृत्व ट्रस्ट की राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती साधना सेठी कर रही हैं। उनका उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना नहीं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए प्रशिक्षित करना भी है।
आज आयोजित कार्यक्रम में गांव की कई महिलाओं ने भाग लिया, जिनमें से अधिकांश बेरोजगार थीं। ट्रस्ट ने इन महिलाओं को “ग्रामीण बेरोजगार महिला” श्रेणी में पंजीकृत किया और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
महिला रोजगार और प्रशिक्षण का पंजीकरण
ट्रस्ट द्वारा पहले ही चयनित 70 महिलाओं का पंजीकरण पूरा हो चुका है और अगले आठ दिनों में उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा, आज 20 नई महिलाओं को भी पंजीकृत किया गया है। इन महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनके जीवन में स्थायी परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है।
पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को रोजगार से जुड़ी संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि कैसे घर बैठे स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त की जा सकती है और अपने परिवार का भरण-पोषण किया जा सकता है।
महिला जागरूकता अभियान का महत्व
संगठन द्वारा चलाए जा रहे महिला जागरूकता अभियान का उद्देश्य केवल रोजगार ही नहीं है, बल्कि महिलाओं को उनके अधिकारों और समाज में उनकी भूमिका के प्रति भी जागरूक करना है। अभियान के तहत महिलाओं को बताया गया कि उन्हें किस तरह से सरकारी योजनाओं, स्वरोजगार अवसरों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए।
महिलाओं ने इस पहल का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम उन्हें आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता की ओर प्रेरित करते हैं। साथ ही, उन्हें समाज में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी मिलता है।
आगामी कार्यक्रम और विस्तार योजनाएं
ट्रस्ट की योजना है कि यह अभियान केवल एक गांव तक सीमित न रहे। कल यह कार्यक्रम इकलेरा गौशाला, उमर गांव में आयोजित किया जाएगा, जहां लगभग 35 महिलाएं हिस्सा लेंगी। इसके अलावा लोहारदा, कांटा फोड़ और अन्य गांवों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार के अवसरों के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। संगठन ने महिलाओं को इस बात के लिए भी प्रेरित किया कि वे अपने घर, परिवार और समाज में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग और समर्थन
आज के कार्यक्रम में सीता ठाकुर को भी संगठन से जोड़ा गया, जो सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। उनके जुड़ने से ट्रस्ट को और मजबूती मिली है, और महिला सशक्तिकरण के कार्यों को नई दिशा मिली है।
ट्रस्ट के अन्य प्रमुख सदस्य जैसे शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, रामवेश सिंह राजावत, युवराज सिंह राठौर, मनीष गुप्ता, सुरेंद्रप्रकाश यादव, जीवनलाल जैन ने संयुक्त रूप से कहा कि यह अभियान समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक सशक्त पहल है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष का संदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने कार्यक्रम के दौरान कहा:
“भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट का उद्देश्य केवल अधिकारों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को आत्मनिर्भर बनाना भी है। ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वे आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार और समाज को सशक्त बना सकेंगी। ट्रस्ट हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।”
उनका यह संदेश महिलाओं के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर महिलाओं का समाज में बड़ा योगदान होता है और यह अभियान उन्हें नई पहचान दिलाने में मदद करेगा।
महिलाओं का उत्साह और प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने इस पहल का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान उन्हें न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें समाज में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी देते हैं।
महिलाओं ने कहा कि अब वे घर बैठे स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकेंगी। इस प्रकार की पहल से महिलाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है, जिससे वे समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।
भविष्य में विस्तारित प्रयास
संगठन का लक्ष्य केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में कई अन्य गांवों में भी समान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अंतर्गत महिलाओं को उनके अधिकारों, स्वरोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता के अवसरों की जानकारी दी जाएगी।
संगठन का उद्देश्य है कि महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हों, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाएं। इससे उन्हें समाज में सम्मान और पहचान मिलेगी।
संगठन की भूमिका और सामुदायिक समर्थन
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और रोजगार के क्षेत्र में पिछले वर्षों में कई सफल परियोजनाएं संचालित की हैं। संगठन के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण, कौशल विकास और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
आज के कार्यक्रम में स्थानीय समाजसेवी और वरिष्ठ नागरिकों ने भी इस पहल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि समाज में उनके योगदान को भी मान्यता देगा।
समापन और संदेश
इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को जागरूक, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। ट्रस्ट के प्रयास से महिलाएं अपने परिवार और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकेंगी। इस पहल से ना केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और आत्म-सम्मान भी मिलेगा।
ट्रस्ट का यह अभियान एक उदाहरण है कि किस तरह स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव ला सकते हैं।
