Bharat Tiwari Encounter Case: भोजपुर के बिलौटी गांव में महापंचायत, FIR के बाद बढ़ा विवाद, कई राज्यों से जुटी भीड़
फर्जी एनकाउंटर के आरोपों को लेकर बड़ा जन आंदोलन
Bharat Tiwari के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार के भोजपुर जिले में बड़ा जन आंदोलन देखने को मिल रहा है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में बुधवार को आयोजित महापंचायत को लेकर पूरे इलाके में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से लोगों का आना लगातार जारी है।
महापंचायत को लेकर स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर है और सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।
बिलौटी गांव में महापंचायत का आयोजन
महापंचायत का आयोजन बिलौटी गांव स्थित प्राचीन कुंडवा शिव मंदिर परिसर में बुधवार दोपहर 12 बजे किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, यह महापंचायत केवल एक परिवार के न्याय की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सामाजिक न्याय, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और कानून के राज की बहाली के मुद्दे से जोड़ा जा रहा है।
इस दौरान भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी। साथ ही आगे के आंदोलन की रणनीति और रूपरेखा पर भी चर्चा की जाएगी।
36 बिरादरियों की भागीदारी का दावा
आयोजकों का दावा है कि इस महापंचायत में “36 बिरादरियों” को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए गांव-गांव संपर्क अभियान चलाया गया है और अधिक से अधिक लोगों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
महापंचायत में सामाजिक संगठनों, युवाओं, बुद्धिजीवियों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की भी संभावना है। आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
प्रशांत किशोर की मौजूदगी की संभावना
सूत्रों के अनुसार, जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर के भी इस महापंचायत में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यदि वे कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो यह आयोजन राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इस मामले को पहले से ही व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
महापंचायत में संभावित भारी भीड़ को देखते हुए भोजपुर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है और पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या पुलिस-जनता टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पुलिसकर्मियों को धमकियां, हाई अलर्ट पर प्रशासन
इस मामले से जुड़े तनाव के बीच पुलिस कर्मियों को जान से मारने की धमकियां मिलने की भी खबरें सामने आई हैं। इसके बाद भोजपुर पुलिस ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
एनकाउंटर केस में पांच पुलिसकर्मियों पर FIR
महापंचायत से एक दिन पहले एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया, जब पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
यह कार्रवाई मृतक भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन के आधार पर की गई। उन्होंने 18 जून को एसपी भोजपुर को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि उनके बेटे का फर्जी एनकाउंटर किया गया।
मां आशा देवी के गंभीर आरोप
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने अपने आवेदन में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 17 जून की सुबह पुलिस टीम, जिसमें शाहपुर थाना प्रभारी और जगदीशपुर एसडीपीओ शामिल थे, उनके घर पहुंची और बेटे को साथ ले गई।
आशा देवी के अनुसार, पुलिस ने कहा था कि जवइनियां गांव में बाढ़ से जुड़ी समस्या की जानकारी देनी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे भरत तिवारी ने बाद में फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी और हथियार जमीन पर रखकर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने गोली चला दी।
“सरेंडर के बाद भी गोली मारी गई” – परिजनों का दावा
परिजनों का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बावजूद पुलिस ने भरत तिवारी को घेरकर गोली मारी। दावा किया गया है कि उन्हें पांच गोलियां लगीं, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।
आशा देवी ने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित कार्रवाई थी और इसमें उच्च पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि घटना से पहले उनके पति काशीनाथ तिवारी को पुलिस ने हिरासत में लेकर थाने में रखा था।
न्याय और जांच की मांग तेज
परिवार ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
महापंचायत को इसी मांग के समर्थन में एक बड़ा जनमंच माना जा रहा है, जहां आगे की रणनीति तय की जाएगी।
निष्कर्ष
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब केवल एक कानूनी विवाद नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। बिलौटी गांव में हो रही महापंचायत इस पूरे मामले का केंद्र बन गई है।
एक ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अलर्ट है, तो दूसरी ओर परिवार और समर्थक निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर एकजुट हो रहे हैं।
अब सभी की नजर इस महापंचायत और इसके बाद उठने वाले राजनीतिक और कानूनी कदमों पर टिकी हुई है।
