Bharat–France राफेल डील निर्णायक मोड़ पर, वायुसेना को मिल सकते हैं 114 लड़ाकू विमान
Bharat–France के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने वाली एक बड़ी डिफेंस डील आकार लेती दिखाई दे रही है। भारतीय वायुसेना की लंबे समय से चली आ रही लड़ाकू विमानों की कमी को दूर करने के लिए भारत जल्द ही राफेल फाइटर जेट्स की बड़ी खेप खरीद सकता है। इस संभावित समझौते के तहत भारतीय वायुसेना को कम से कम 114 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अगले महीने प्रस्तावित Bharat दौरे से पहले इस डील को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच सकती है। माना जा रहा है कि यह डील न केवल Bharat की रक्षा क्षमताओं को मजबूती देगी, बल्कि मेक इन इंडिया पहल को भी बड़ा प्रोत्साहन देगी।
भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी जरूरत
भारतीय वायुसेना इस समय स्क्वाड्रन की भारी कमी से जूझ रही है। जहां स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन है, वहीं मौजूदा संख्या 30 के आसपास सिमट गई है। ऐसे में पुराने मिग-21, मिग-27 और जगुआर जैसे विमानों के चरणबद्ध रिटायरमेंट के बाद नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरत और भी बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में राफेल लड़ाकू विमान वायुसेना के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरे हैं। पहले ही 36 राफेल विमान भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुके हैं, जिन्होंने अपनी मारक क्षमता, मल्टी-रोल क्षमता और अत्याधुनिक तकनीक से खुद को साबित किया है।

G2G समझौते के तहत खरीद का प्रस्ताव
भारतीय वायुसेना ने सरकार से सरकार-से-सरकार (G2G) मॉडल के तहत राफेल विमानों की बड़ी संख्या में खरीद का प्रस्ताव रखा है। यह मॉडल पारदर्शिता, समयबद्धता और रणनीतिक भरोसे के लिहाज से अहम माना जाता है। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि अंतिम रूप से कितने विमान खरीदे जाएंगे, लेकिन रक्षा सूत्रों का कहना है कि वायुसेना की न्यूनतम आवश्यकता 114 लड़ाकू विमानों की है। यह डील मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोजेक्ट के तहत आगे बढ़ सकती है।
Bharat में होगा राफेल का निर्माण
इस डील की सबसे अहम और रणनीतिक विशेषता यह है कि राफेल विमानों का निर्माण Bharat में किया जाएगा। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि देश को उन्नत एयरोस्पेस तकनीक भी हासिल होगी। पिछले साल जून में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन के बीच एक अहम समझौता हुआ था। इसके तहत Bharat में राफेल फाइटर जेट के फ्यूजलेज (मुख्य ढांचा) का निर्माण किया जाएगा।
हैदराबाद बनेगा राफेल निर्माण का हब
TASL हैदराबाद में एक अत्याधुनिक निर्माण सुविधा स्थापित कर रही है। इस संयंत्र में राफेल के फ्यूजलेज के चार प्रमुख हिस्सों का निर्माण किया जाएगा। यह सुविधा न केवल भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि डसॉल्ट एविएशन को मिलने वाले वैश्विक ऑर्डरों के लिए भी उत्पादन करेगी। सूत्रों के मुताबिक, यह संयंत्र वित्तीय वर्ष 2028 तक पूरी तरह परिचालन में आ सकता है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 24 फ्यूजलेज होगी, जिससे Bharat वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बन जाएगा।
60% तक Bharat में होगा वैल्यू एडिशन
रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस डील के तहत राफेल निर्माण का करीब 60 प्रतिशत मूल्य Bharat में ही जोड़ा जाएगा।
हैदराबाद में फ्यूजलेज निर्माण संयंत्र के अलावा:
-
Bharat में इंजन निर्माण संयंत्र
-
उत्तर प्रदेश के जेवर में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) हब
जैसी परियोजनाएं पहले से ही मौजूद हैं या विकास के चरण में हैं। इससे भारत को दीर्घकालिक तकनीकी लाभ और रोजगार के बड़े अवसर मिलेंगे।
अरबों यूरो की हो सकती है यह डील
इस प्रस्तावित डील की अनुमानित लागत 10 अरब यूरो या उससे अधिक हो सकती है। पिछले साल Bharat ने भारतीय नौसेना के लिए 24 राफेल मरीन विमानों के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। उस डील से इस नई वायुसेना डील के लिए एक बेंचमार्क कीमत तय मानी जा रही है। हालांकि, अंतिम कीमत विमानों की संख्या, हथियार प्रणालियों, रखरखाव पैकेज और तकनीकी हस्तांतरण पर निर्भर करेगी।
डील को मंजूरी की प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, इस बड़ी रक्षा खरीद के लिए कई चरणों की मंजूरी जरूरी होगी:
-
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से औपचारिक मंजूरी
-
कीमत और शर्तों पर विस्तृत बातचीत
-
कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से अंतिम स्वीकृति
-
वार्षिक रक्षा बजट में पर्याप्त वित्तीय प्रावधान
इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही डील पर अंतिम हस्ताक्षर किए जाएंगे।
Bharat–France रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा बल
Bharat–France के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है। दोनों देश आतंकवाद विरोध, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में करीबी साझेदार हैं। राफेल डील इस साझेदारी को और गहराई देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता Bharat को न केवल सैन्य रूप से मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद रक्षा निर्माता के रूप में भी स्थापित करेगा।
