Bharat Bhushan Tiwari Case: मामले में न्याय की मांग तेज, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान
बिलौटी गांव में तेरहवीं के दौरान बड़ा ऐलान
Bharat Bhushan Tiwari Case : भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की तेरहवीं के अवसर पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले को लेकर आंदोलन को तेज करने और इसे राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का ऐलान किया गया।
इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल मिश्रा, वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा के संयोजक पंकज त्रिपाठी और हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अनिल कुमार सिंह मौजूद रहे।
तीनों वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक मामले में न्याय नहीं मिलता, तब तक कानूनी लड़ाई और आंदोलन दोनों साथ-साथ जारी रहेंगे।
17 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान
प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने बताया कि 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न्याय की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का एक बड़ा कदम होगा।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से लोगों का समर्थन जुटाकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
अनिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि मामले में हुई न्यायिक जांच पर कई सवाल उठ रहे हैं और इस पूरे प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
अनिल मिश्रा ने मांग की कि इस मामले में एसपी समेत सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच किसी सिटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन पुलिसकर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में है, उन्हें पहले निलंबित किया जाए और बाद में उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी
वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने कहा कि सरकार को कार्रवाई के लिए 30 जून तक का समय दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इसी कारण सभी संगठनों की सहमति से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि 17 जुलाई को जंतर-मंतर पर श्रद्धांजलि सभा के साथ विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा।
पंकज त्रिपाठी ने कहा कि गांव-गांव और शहर-शहर में हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया गया है ताकि जनसमर्थन जुटाया जा सके।
संगठन और समितियों का गठन
उन्होंने जानकारी दी कि आंदोलन के संचालन के लिए वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा का गठन किया गया है। इसके तहत कुल 18 समितियां बनाई गई हैं।
इसके अलावा 21 अधिवक्ताओं की एक कानूनी समिति भी गठित की गई है, जो मामले की कानूनी रणनीति पर काम करेगी। इस समिति के संयोजक स्वयं पंकज त्रिपाठी हैं, जबकि भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी को उप-संयोजक बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि पूरा आंदोलन संविधान के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा।
कानूनी मोर्चे पर मजबूत पैरवी का दावा
हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि संगठन पूरी तरह कानूनी और संवैधानिक तरीके से न्याय की लड़ाई लड़ेगा।
उन्होंने कहा कि परिवार की मूल तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे और हत्या से जुड़े साक्ष्यों को एकत्र करने के लिए अलग टीम गठित की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में मजबूत पैरवी कर दोषियों को सख्त सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
पुलिस का पक्ष और एनकाउंटर का दावा
बता दें कि 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर हुआ था। प्राथमिकी के अनुसार एसटीएफ के एक जवान ने आत्मरक्षा में चार राउंड फायरिंग की थी, जिससे उसे गोली लगी।
पुलिस का दावा है कि कई बार आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बावजूद आरोपी ने फायरिंग जारी रखी। इस दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष ने भी एक राउंड फायरिंग की थी।
प्राथमिकी में यह भी उल्लेख है कि आरोपी के एक हाथ में मोबाइल और दूसरे हाथ में पिस्टल थी। पुलिस के अनुसार उसने पहले पिस्टल फेंकी, लेकिन बाद में फिर से उठाकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी।
निष्कर्ष
भरत भूषण तिवारी मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गंभीर रूप लेता जा रहा है। आंदोलनकारियों ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का ऐलान किया है, वहीं पुलिस अपने एनकाउंटर को आत्मरक्षा की कार्रवाई बता रही है।
आने वाले दिनों में 17 जुलाई को प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
