महिदपुर रोड में भंडारी परिवार की अनूठी उदारता, 52 सिद्धि तप तपस्वियों को समर्पित किया अभिषेक का लाभ
महिदपुर रोड। श्री राजेंद्र सूरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के सानिध्य में बुधवार को धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में साध्वीश्री ने जीवन में इच्छाओं, सुख-दुख और आत्मिक शांति के विषय पर श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम के दौरान भंडारी परिवार ने उदारता और धार्मिक समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेमिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक के अवसर पर प्राप्त अभिषेक के लाभ को 52 सिद्धि तप तपस्वियों को समर्पित किया।
इच्छाओं का जीवन में कभी नहीं होता अंत
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने कहा कि मनुष्य के जीवन में इच्छाओं का कभी अंत नहीं होता। एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी इच्छा जन्म ले लेती है। व्यक्ति संसार में अपने सुख से जितना सुखी नहीं होता, उससे कहीं अधिक दूसरे के सुख को देखकर दुखी हो जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि संसार में कोई भी वस्तु शाश्वत नहीं है। यहां मिलने वाला सुख और दुख दोनों ही क्षणिक हैं। संसार का सुख कुछ समय के लिए होता है, जबकि दुख कई गुना अधिक महसूस होता है। इसलिए मनुष्य को बाहरी सुख के बजाय अपने भीतर मौजूद आत्मिक सुख को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।
शाश्वत सुख आत्मा के भीतर विद्यमान
साध्वीश्री ने कहा कि संसार में सुख और दुख दोनों मिश्रित रूप से आते हैं। परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं, लेकिन आत्मा का स्वरूप शाश्वत है। मनुष्य को बाहरी साधनों के पीछे भागने के बजाय आत्मिक शांति और संतोष की ओर बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वास्तविक सुख वही है जो स्वाधीन हो, किसी दूसरे व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति पर निर्भर न हो। पराधीन सुख स्थायी नहीं हो सकता। धार्मिक साधना, संयम, त्याग और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर मौजूद शाश्वत सुख का अनुभव कर सकता है।
चढ़ावे का लाभ दूसरों को देना पुण्य कार्य
धर्मसभा के दौरान साध्वीश्री ने धार्मिक आयोजनों में प्राप्त चढ़ावे और लाभ को दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करने की भावना को विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक कार्य का लाभ प्राप्त करने के बाद उसे अन्य साधकों या तपस्वियों को समर्पित करना महान पुण्य उपार्जन का कार्य है।
इसी भावना को चरितार्थ करते हुए भंडारी परिवार ने नेमिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक के अवसर पर प्राप्त अभिषेक के लाभ को 52 सिद्धि तप तपस्वियों को समर्पित किया। परिवार के इस निर्णय की उपस्थित श्रद्धालुओं और सकल जैन श्रीसंघ ने सराहना की।

52 सिद्धि तप तपस्वियों को समर्पित किया लाभ
नेमिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर पारसमल, निलेश कुमार, रितेश कुमार एवं अक्षय कुमार भंडारी परिवार, खरवा वालों ने अभिषेक का लाभ लिया। परिवार ने इस धार्मिक लाभ को अपने तक सीमित न रखते हुए 52 सिद्धि तप तपस्वियों को समर्पित कर दिया।
भंडारी परिवार की ओर से किए गए इस कार्य को समाज में त्याग, सेवा और धार्मिक उदारता की भावना का उदाहरण माना गया। धर्मसभा में उपस्थित जैन समाज के सदस्यों ने परिवार के इस कार्य की हृदय से अनुमोदना की और इसे अनुकरणीय बताया।
सकल जैन श्रीसंघ ने की अनुमोदना
भंडारी परिवार द्वारा किए गए इस धार्मिक कार्य के बाद सकल जैन श्रीसंघ की ओर से परिवार के प्रति आभार एवं अनुमोदना व्यक्त की गई। समाजजनों ने कहा कि धार्मिक अवसरों पर प्राप्त लाभ को तपस्वियों और साधकों को समर्पित करने से समाज में सेवा और परस्पर सहयोग की भावना मजबूत होती है।
धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत पुण्य अर्जित करना ही नहीं, बल्कि समाज और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ रहे लोगों के प्रति सम्मान एवं सहयोग की भावना को बढ़ाना भी है। भंडारी परिवार का यह प्रयास इसी भावना को दर्शाता है।
साधार्मिक भक्ति और प्रभावना का आयोजन
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान साधार्मिक भक्ति एवं प्रभावना का भी आयोजन किया गया। संपूर्ण दिवस के धार्मिक कार्यक्रमों का लाभ सुभाष चंद्र एवं संदीप कुमार भंडारी परिवार ने लिया।
इस अवसर पर समाज के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की। साध्वीश्री के मंगल प्रवचनों को श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक सुना और जीवन में आत्मसंयम, संतोष एवं त्याग के महत्व को समझा।
धर्मसभा में मिला आत्मचिंतन का संदेश
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब के प्रवचनों में जीवन की वास्तविकता और आत्मिक सुख पर विशेष जोर रहा। उन्होंने कहा कि मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने में अपना पूरा जीवन लगा देता है, लेकिन वास्तविक शांति और सुख की तलाश बाहर करने के बजाय अपने भीतर करनी चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को इच्छाओं पर नियंत्रण रखने, संतोष का भाव विकसित करने और धार्मिक जीवन के माध्यम से आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। प्रवचन के दौरान संसार की क्षणभंगुरता और आत्मा की शाश्वतता को सरल तरीके से समझाया गया।
चातुर्मास के दौरान धार्मिक गतिविधियां
श्री राजेंद्र सूरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। साध्वीश्री के सानिध्य में होने वाले प्रवचनों और धार्मिक आयोजनों में समाज के श्रद्धालु नियमित रूप से सहभागिता कर रहे हैं।
चातुर्मास जैन परंपरा में साधना, संयम और आत्मचिंतन का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों, तप, स्वाध्याय और सेवा गतिविधियों में भाग लेते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में धार्मिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।
भंडारी परिवार की पहल बनी प्रेरणा
भंडारी परिवार द्वारा अभिषेक के लाभ को 52 सिद्धि तप तपस्वियों को समर्पित करने की पहल ने धार्मिक आयोजन को विशेष बना दिया। परिवार की ओर से किए गए इस कार्य में उदारता के साथ-साथ तप और साधना के प्रति सम्मान की भावना भी दिखाई दी।
धर्मसभा में उपस्थित समाजजनों ने इस पहल को अनुमोदनीय बताते हुए कहा कि जब धार्मिक लाभ को दूसरों के साथ साझा किया जाता है, तो उससे समाज में सेवा, त्याग और सद्भाव की भावना मजबूत होती है।
श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया धर्मलाभ
कार्यक्रम के अंत में सकल जैन श्रीसंघ के श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। साध्वीश्री के मंगल प्रवचनों के साथ धार्मिक अनुष्ठानों और साधार्मिक भक्ति से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
भंडारी परिवार के धार्मिक समर्पण और साध्वीश्री के प्रेरणादायी संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, संतोष और सेवा की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि धार्मिक जीवन केवल पूजा-अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि त्याग, उदारता, सेवा और दूसरों के कल्याण की भावना भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
