आश्वासनों के दलदल में फंसी पोहर की सड़क, चुनाव बहिष्कार और चक्का जाम भी रहा बेअसर
Betul । प्रभात पट्टन विकासखंड के ग्राम पंचायत सहनगांव अंतर्गत आने वाले ग्राम पोहर में सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्षों से पक्की सड़क की मांग को लेकर ग्रामीण संघर्ष करते आ रहे हैं, लेकिन बार-बार मिलने वाले आश्वासनों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। इसी क्रम में अब जिला पंचायत सदस्य उर्मिला गव्हाडे ने गुरुवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए वायगांव से पोहर तक सड़क निर्माण का काम जल्द से जल्द शुरू कराने की मांग की है।
बारिश में बन जाता है सबसे बड़ा संकट
ग्रामीणों के लिए वायगांव से पोहर को जोड़ने वाला यह मुख्य मार्ग बारिश के मौसम में सबसे बड़ी परेशानी का सबब बन जाता है। सड़क कच्ची होने के कारण बारिश के दिनों में इस पर भारी कीचड़ और दलदल जमा हो जाता है, जिससे आवागमन करना बेहद मुश्किल हो जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्कूली बच्चों, आम ग्रामीणों और वाहन चालकों को रोजाना इसी दुर्गम रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के दौरान कई बार वाहन कीचड़ में बुरी तरह फंस जाते हैं, जिससे न केवल आवागमन में देरी होती है, बल्कि दुर्घटना का खतरा भी लगातार बना रहता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अभिभावकों में हमेशा चिंता बनी रहती है।
सड़क के लिए चुनाव बहिष्कार तक कर चुके ग्रामीण
यह पहला मौका नहीं है जब ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर आवाज उठाई हो। इससे पहले भी सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण कई बार आंदोलन कर चुके हैं। सबसे उल्लेखनीय घटना पंचायत चुनाव के दौरान हुई थी, जब सड़क नहीं बनने से नाराज ग्रामीणों ने मतदान का सामूहिक बहिष्कार करने का बड़ा कदम उठाया था। यह घटना उस समय प्रशासनिक हलकों में भी काफी चर्चा का विषय बनी थी।
चुनाव बहिष्कार का मामला तत्कालीन कलेक्टर के संज्ञान में आने के बाद प्रशासन हरकत में आया था। एसडीएम मुलताई सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने गांव का दौरा किया और ग्रामीणों को यह आश्वासन दिया था कि चुनाव संपन्न होने के बाद गांव में पक्की सड़क का निर्माण करवाया जाएगा। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों में एक उम्मीद जगी थी, लेकिन यह उम्मीद जल्द ही टूट गई।
इसके बाद पिछले वर्ष एक बार फिर ग्रामीणों ने सड़क की मांग को लेकर चक्का जाम जैसा उग्र प्रदर्शन भी किया, ताकि प्रशासन का ध्यान उनकी समस्या की ओर आकर्षित किया जा सके। लेकिन इतने बड़े आंदोलनों के बावजूद अब तक सड़क निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है, जिससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी है।

सड़क स्वीकृत, फिर भी काम अटका
जिला पंचायत सदस्य उर्मिला गव्हाडे ने इस पूरे मामले पर महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि बायगांव-पोहर मार्ग के डामरीकरण को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिला पंचायत से पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। इसके बावजूद विभागीय प्रक्रिया में देरी के चलते यह महत्वपूर्ण कार्य अब तक लंबित पड़ा हुआ है। उन्होंने इस देरी पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर से मांग की है कि वे संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी कर निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराएं।
गव्हाडे ने कहा कि जब सड़क निर्माण को शासन स्तर पर पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, तो फिर विभागीय लापरवाही के कारण इसमें देरी होना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह किया है।
ग्रामीणों ने दी दोबारा आंदोलन की चेतावनी
गांव के निवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण को शासन स्तर पर स्वीकृति मिलने के बावजूद यदि काम शुरू नहीं होता है, तो यह उनके साथ बार-बार किए गए वादों और आश्वासनों की सरासर अनदेखी है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि प्रशासन उनकी बुनियादी समस्या के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा है।
गुस्साए ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने अब तक हर संभव तरीके से – चाहे वह चुनाव बहिष्कार हो या चक्का जाम – प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं, ठोस कार्रवाई नहीं। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस बार ग्रामीणों की मांग पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और कब तक वायगांव-पोहर मार्ग पर पक्की सड़क का सपना साकार होता है।

