बैतूल में पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू, पांच सूत्रीय मांगों को लेकर राजस्व कार्य प्रभावित होने के आसार
बैतूल। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर जिला बेतूल के पटवारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल और धरना आंदोलन शुरू कर दिया है। मंगलवार से प्रारंभ हुए इस आंदोलन में जिले के विभिन्न तहसीलों से बड़ी संख्या में पटवारी शामिल हुए। धरना स्थल पर एकत्रित होकर पटवारियों ने शासन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी पांच सूत्रीय मांगों को तत्काल पूरा करने की मांग की।
पटवारी संघ का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगें शासन के समक्ष लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कई बार ज्ञापन सौंपने, चर्चा करने और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से संघ ने प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाया है। संघ का कहना है कि यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
प्रदेशव्यापी आह्वान पर शुरू हुआ आंदोलन
मध्यप्रदेश पटवारी संघ द्वारा पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे आंदोलन के तहत बेतूल जिले के पटवारियों ने भी कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलन के पहले दिन ही बड़ी संख्या में पटवारी धरना स्थल पर पहुंचे और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के पटवारी अपनी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर एक साथ आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप से उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
क्या हैं पटवारियों की प्रमुख मांगें?
धरना प्रदर्शन के दौरान पटवारी संघ ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए शासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। संघ के अनुसार उनकी प्रमुख मांगें निम्न हैं—
- पटवारी कैडर का रिव्यू कर पदोन्नति और सेवा संरचना में सुधार किया जाए।
- विभागीय परीक्षाओं का नियमित एवं समयबद्ध आयोजन सुनिश्चित किया जाए।
- पटवारियों को लोक सेवक संरक्षण अधिनियम के दायरे में शामिल किया जाए।
- विभिन्न शासकीय योजनाओं में किए गए कार्यों का लंबित मानदेय एवं अन्य वित्तीय भुगतान शीघ्र जारी किया जाए।
- संघ के पदाधिकारियों के स्थानांतरण आदेश निरस्त किए जाएं।
इसके अतिरिक्त संघ ने वेतन विसंगति दूर करने तथा अन्य राज्यों के समान वेतनमान एवं ग्रेड-पे लागू करने की भी मांग उठाई है।
कैडर रिव्यू को बताया सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा
पटवारी संघ का कहना है कि वर्षों से कैडर रिव्यू नहीं होने के कारण पदोन्नति के अवसर सीमित हो गए हैं। इससे कर्मचारियों में निराशा का माहौल है।
संघ का मानना है कि यदि समय-समय पर कैडर रिव्यू किया जाए तो सेवा संरचना मजबूत होगी, पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे और विभागीय कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। इसी कारण संघ ने इसे अपनी सबसे महत्वपूर्ण मांगों में शामिल किया है।
विभागीय परीक्षा नियमित कराने की मांग
पटवारी संघ का कहना है कि विभागीय परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं होने से कर्मचारियों के कैरियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कई पटवारी लंबे समय से परीक्षा आयोजित होने का इंतजार कर रहे हैं।
संघ के अनुसार नियमित परीक्षा होने से योग्य कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा तथा विभाग में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी।
लोक सेवक संरक्षण अधिनियम में शामिल करने की मांग
धरने पर बैठे पटवारियों ने कहा कि राजस्व कार्यों के दौरान उन्हें कई प्रकार के दबाव और विवादों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें पर्याप्त कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
इसी उद्देश्य से संघ ने पटवारियों को लोक सेवक संरक्षण अधिनियम के दायरे में शामिल करने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि इससे वे निष्पक्ष और निर्भीक होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
लंबित मानदेय और वित्तीय भुगतान पर नाराजगी
पटवारी संघ ने विभिन्न शासकीय योजनाओं में किए गए अतिरिक्त कार्यों का भुगतान समय पर नहीं मिलने पर भी असंतोष जताया है।
संघ के अनुसार कई योजनाओं में पटवारियों ने अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन उनके मानदेय और अन्य वित्तीय भुगतान लंबे समय से लंबित हैं। इससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने मांग की कि सभी लंबित भुगतान तत्काल जारी किए जाएं।
वेतन विसंगति दूर करने की मांग
पटवारी संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश के पटवारियों का वेतनमान और ग्रेड-पे अन्य कई राज्यों की तुलना में कम है। जबकि कार्य का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
संघ के अनुसार राजस्व अभिलेखों का संधारण, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, फसल गिरदावरी, प्राकृतिक आपदा सर्वेक्षण, विभिन्न शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन तथा चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी पटवारियों पर रहती है। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
संघ पदाधिकारियों के स्थानांतरण पर भी आपत्ति
पटवारी संघ ने अपने पदाधिकारियों के स्थानांतरण आदेशों पर भी नाराजगी जताई है।
संघ का आरोप है कि संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय पदाधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है, जिससे संगठनात्मक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। संघ ने इन स्थानांतरण आदेशों को निरस्त करने की मांग की है।
राजस्व सेवाओं पर पड़ सकता है असर
पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल का असर जिले की राजस्व सेवाओं पर दिखाई देना शुरू हो सकता है। यदि आंदोलन लंबा चलता है तो आम नागरिकों को विभिन्न सरकारी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
विशेष रूप से नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, आय-निवास एवं अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं में विलंब होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा किसानों से जुड़े कई कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि संघ का कहना है कि आंदोलन सरकार के खिलाफ है, आम जनता के खिलाफ नहीं। यदि शासन शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है।
शासन से शीघ्र वार्ता की मांग
धरना प्रदर्शन के दौरान पटवारी संघ ने राज्य सरकार से अपील की कि वह जल्द से जल्द संघ के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर उनकी मांगों का समाधान निकाले।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान संभव है, लेकिन इसके लिए शासन को गंभीरता दिखानी होगी। यदि वार्ता सफल होती है तो आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है।
पटवारियों ने दी आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

धरने में शामिल पटवारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका कलमबंद आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा हुआ है। यदि आवश्यक हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा तथा प्रदेश स्तर पर आगे की रणनीति भी बनाई जाएगी।
आम नागरिकों से सहयोग की अपील
पटवारी संघ ने जिले के नागरिकों से आंदोलन के दौरान सहयोग की अपील की है। संघ का कहना है कि उनकी मांगें केवल कर्मचारियों के हित तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और प्रभावी राजस्व सेवाओं से भी जुड़ी हुई हैं।
संघ ने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान निकालेगी, जिससे आंदोलन समाप्त हो सके और जिले में राजस्व संबंधी सभी सेवाएं पुनः सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
निष्कर्ष
बैतूल जिले में शुरू हुई पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल ने राजस्व प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर पटवारी अपनी वर्षों पुरानी मांगों के समाधान के लिए आंदोलनरत हैं, वहीं दूसरी ओर लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने की स्थिति में आम नागरिकों और किसानों को राजस्व संबंधी सेवाओं में विलंब का सामना करना पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें राज्य शासन और पटवारी संघ के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि जल्द सकारात्मक पहल होती है तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना बनेगी, अन्यथा यह आंदोलन प्रदेशभर में और व्यापक रूप ले सकता है।
