Betul में साइबर फ्रॉड का बड़ा पर्दाफाश
Betul पुलिस ने एक संगठित ऑनलाइन बेटिंग और साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 9.84 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा किया है। यह गिरोह दुबई से संचालित हो रहा था और इसके लिए भारत में स्थानीय एजेंट काम कर रहे थे। पुलिस ने अब तक छह मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल और अन्य वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं।
एसपी वीरेंद्र जैन ने बताया कि यह कार्रवाई पुराने साइबर फ्रॉड मामलों की जांच के दौरान सामने आई नई जानकारियों के आधार पर की गई। पूछताछ में आरोपियों ने गिरोह की कार्यप्रणाली और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संचालन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। पुलिस ने अब नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच शुरू कर दी है।
Betul में गिरोह की कार्यप्रणाली और नेटवर्क
जांच में यह सामने आया कि गिरोह का पूरा नेटवर्क दुबई से संचालित होता था। वहां से अवैध सट्टा साइटें चलाई जाती थीं और भारत में एजेंट इसके लेन-देन को संभालते थे। मुख्य आरोपी ब्रजेश महाजन को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उसने दुबई से साइटों की मास्टर आईडी खरीदी और भारत में 25 हजार से 2 लाख रुपये की कीमत पर बेची।
अंकित राजपूत पूरे नेटवर्क का कैश ऑपरेटर था, जबकि अमित अग्रवाल के माध्यम से उसकी मुलाकात ब्रजेश महाजन से हुई थी। राजेंद्र राजपूत की भूमिका मुख्य खातों से पैसे निकालने और कैश ट्रांजेक्शन को आगे बढ़ाने में थी। इस तरह गिरोह ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने अवैध संचालन को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया।
गिरफ्तारी की क्रमवार कार्रवाई
पुलिस ने कार्रवाई की शुरुआत 20 नवंबर 2025 को की, जब राजा उर्फ आयुष चौहान, अंकित राजपूत और नरेंद्र सिंह राजपूत को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 7 दिसंबर 2025 को इंदौर निवासी अमित अग्रवाल को हिरासत में लिया गया। अंततः 11 दिसंबर 2025 को राजेंद्र राजपूत और ब्रजेश महाजन को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 एटीएम कार्ड, कई पासबुक, चार मोबाइल फोन और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए। इसके साथ ही ब्रजेश महाजन की कार और दो मोबाइल फोन भी पुलिस के कब्जे में आए। इस कार्रवाई से गिरोह की कार्यप्रणाली और वित्तीय लेन-देन का पूरा नेटवर्क उजागर हुआ।
गिरोह की आर्थिक गतिविधियाँ और जीवनशैली
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने धोखाधड़ी से कमाई का इस्तेमाल महंगे मकान, लग्जरी कारों और आलीशान जीवनशैली में किया। पुलिस ने बताया कि आरोपी सक्रिय बेटिंग साइटों के लिंक और लेन-देन रिकॉर्ड के माध्यम से अवैध कमाई को नियंत्रित कर रहे थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड न केवल आर्थिक नुकसान करता है, बल्कि स्थानीय और वैश्विक वित्तीय सिस्टम की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पहचान कर रही है।

भविष्य की जांच और कदम
बैतूल पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अब मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, अन्य एजेंट और अवैध साइटों की पहचान पर है। इसके साथ ही पुलिस साइबर फ्रॉड के और मामलों की रोकथाम के लिए नए कदम उठा रही है।
एसपी वीरेंद्र जैन ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में मिली जानकारियों के आधार पर भविष्य में साइबर अपराध नियंत्रण और वित्तीय सुरक्षा के लिए विशेष कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड को भी भारतीय पुलिस गंभीरता से ले रही है।
