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Bengal Election 2026: हिंसा के बावजूद TMC और BJP के बीच कड़ी टक्कर, दो चरणों में 294 सीटों पर मतदान, SIR विवाद भी गरम

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Published On: 30 March 2026
Bengal

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West Bengal विधानसभा चुनाव 2026: एक व्यापक दृष्टि

देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में अप्रैल 2026 में विधानसभा चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। इनमें West Bengal , असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं। इन पांचों राज्यों में चुनाव होना निश्चित रूप से राष्ट्रीय राजनीति पर असर डालेगा, लेकिन सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर है। पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं और यहाँ की राजनीति हमेशा से ही जटिल और संवेदनशील रही है।

इस बार चुनाव केवल दो चरणों में होंगे। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को मतदान के लिए निर्धारित है। मतगणना 4 मई को होगी। पिछली कई बार बंगाल में चुनाव कई चरणों में होते थे, जैसे 6, 7 या 8 चरण, लेकिन इस बार केवल दो चरण होने से चुनावी प्रक्रिया अधिक केंद्रित और तीव्र हो गई है।

चुनावी हिंसा और सुरक्षा का इतिहास

पश्चिम बंगाल में चुनाव हमेशा से ही हिंसा के कारण चर्चा में रहे हैं। राज्य में राजनीतिक हमलों, झगड़ों और हिंसक घटनाओं का इतिहास गहरा रहा है।

  • सरपंच से लेकर लोकसभा चुनाव तक राजनीतिक हिंसा आम बात रही है।
  • पिछले कुछ वर्षों में चुनाव के दौरान कई लोग घायल या मृत हो चुके हैं।

इस बार भी मुर्शिदाबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच हिंसा की खबरें आईं। इस हिंसा के दौरान कई दुकानों में आग लगी, तोड़फोड़ हुई और लूटपाट भी की गई। इस तरह की घटनाएं चुनावी माहौल को संवेदनशील बनाती हैं और सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग को राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने होंगे। पुलिस बल और केंद्रीय paramilitary units की उपस्थिति महत्वपूर्ण होगी।

राजनीतिक दल और उनकी स्थिति

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्य रूप से तीन बड़ी पार्टियाँ सक्रिय हैं:

  1. टीएमसी (TMC) – ममता बनर्जी की पार्टी
  2. भारतीय जनता पार्टी (BJP)
  3. कांग्रेस और लेफ्ट

टीएमसी का दबदबा

तेजस्विनी और लोकप्रिय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की TMC राज्य में सत्ता में है। पार्टी ने पिछले वर्षों में हर चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत की है। TMC की रणनीति में मुख्य रूप से स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और जातीय समीकरणों को प्राथमिकता दी जाती है।

बीजेपी की चुनौती

भले ही बीजेपी ने देश के कई राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत की है, पश्चिम बंगाल अभी भी उनके लिए अभेद्य किला बना हुआ है।

  • 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पार्टी ने कई राज्यों में सफलता हासिल की।
  • असम और त्रिपुरा में बीजेपी सरकारें बनी, हरियाणा और बिहार में पकड़ मजबूत हुई।
  • लेकिन पश्चिम बंगाल में पार्टी को सत्ता तक पहुँचने में कठिनाई हुई।

2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 200 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था, पर उन्हें मात्र 77 सीटें ही मिलीं। इसके बावजूद पार्टी ने प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया था और सत्ता के लिए पूरी तैयारी कर रही है।

कांग्रेस और लेफ्ट की स्थिति

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट की स्थिति कमजोर रही है।

  • पिछले चुनावों में कांग्रेस और लेफ्ट दोनों का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा।
  • कभी बंगाल में दबदबा रखने वाली लेफ्ट पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई।
  • इस बार भी ये दल सत्ता के लिए निर्णायक भूमिका निभाने की कोशिश करेंगे, लेकिन उनकी भूमिका सीमित रहने की संभावना है।

उम्मीदवारों की घोषणा और प्रत्याशी

पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है।

  • बहरामपुर से अधीर रंजन और ममता बनर्जी के सामने प्रदीप प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया।
  • अन्य जिलों में भी कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा पूरी कर दी है।

BJP और TMC दोनों ने भी अपने उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी कर दी है। TMC ने मुख्य रूप से स्थानीय लोकप्रिय नेताओं को चुना है, जबकि बीजेपी ने नए और युवा नेताओं को टिकट दिया है।

SIR (Special Intensive Revision) को लेकर विवाद

इस बार चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) को लेकर विवाद भी गर्माया।

  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR के खिलाफ केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा।
  • उन्होंने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
  • ममता ने सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से दलीलें दीं और SIR प्रक्रिया की आलोचना की।

SIR विवाद ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा मतदाताओं की धारणाओं और रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।

चुनावी रणनीति और प्रमुख मुद्दे

पश्चिम बंगाल चुनाव में मुख्य रूप से तीन मुद्दे दिखाई दे रहे हैं:

  1. सुरक्षा और हिंसा का मुद्दा – चुनावी हिंसा को रोकना चुनौतीपूर्ण है।
  2. स्थानीय विकास और जनकल्याण योजनाएं – TMC ने पिछले वर्षों में कई विकास योजनाएं लागू की हैं।
  3. राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव – बीजेपी का लक्ष्य राज्य में सत्ता प्राप्त करना है, जबकि कांग्रेस और लेफ्ट सीमित प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का चुनाव राजनीतिक रूप से निर्णायक होगा और TMC, बीजेपी और अन्य पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

  • हिंसा और सुरक्षा चिंता के बावजूद मतदान प्रक्रिया केंद्रित और तीव्र होगी।
  • बीजेपी, कांग्रेस और TMC सभी सत्ता पर कब्जा करने के लिए रणनीति बना रही हैं।
  • SIR और अन्य प्रशासनिक निर्णय चुनावी माहौल और मतदाता निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।

राज्य की राजनीति हमेशा से ही संवेदनशील रही है, और इस बार भी चुनाव के परिणाम राजनीतिक समीकरण और राष्ट्रीय राजनीति दोनों को प्रभावित करेंगे।

पश्चिम बंगाल के चुनाव के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि TMC अपनी सत्ता बनाए रख पाएगी या बीजेपी पहली बार राज्य में मजबूती से स्थापित होगी। चुनावी हिंसा, प्रशासनिक निर्णय और प्रत्याशियों की लोकप्रियता निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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