बसंतोत्सव प्रकृति का नवजागरण बना उल्लास, ज्ञान और कला का संगम। चोइथराम महाविद्यालय में दीप प्रज्वलन, रंगोली, काव्यपाठ और हैंडीक्राफ्ट कार्यशाला की भव्य प्रस्तुति।
बसंतोत्सव प्रकृति का नवजागरण: उत्सव का आरंभ
बसंतोत्सव प्रकृति का नवजागरण केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा, आशा और सृजनशीलता का संदेश लेकर आता है। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर चोइथराम महाविद्यालय में इसी भावना के साथ बसंतोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। प्रकृति के नवजागरण, ज्ञान और उल्लास को समर्पित इस कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विविध गतिविधियों के साथ हुई, जिसने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया।
दीप प्रज्वलन और पौराणिक कथाओं से संदेश
संस्था की प्राचार्य डॉ. रीता जैन ने बसंत पंचमी के महत्व को पौराणिक कथाओं के माध्यम से विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि बसंत ऋतु केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, बल्कि मन और विचारों में भी नई चेतना का संचार करती है।
विशेष अतिथि आर्टिस्ट गीतांजाली वरमोड़े के साथ उन्होंने दीप प्रज्वलित कर बसंत पंचमी पर्व का विधिवत आवाह्न किया। दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरे सभागार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

सरस्वती वंदना और सांस्कृतिक प्रस्तुति
कार्यक्रम का आरंभ कॉलेज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। सुंदर नृत्य और भावपूर्ण भाव-भंगिमाओं के साथ देवी सरस्वती की वंदना ने उपस्थित सभी अतिथियों और विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बसंतोत्सव प्रकृति का नवजागरण की भावना को इन प्रस्तुतियों ने जीवंत कर दिया। संगीत, नृत्य और रंगों के माध्यम से प्रकृति के सौंदर्य और ज्ञान की महिमा को दर्शाया गया।
रंगोली, तोरण और काव्य पाठ प्रतियोगिता
बसंतोत्सव प्रकृति का नवजागरण के अंतर्गत विद्यार्थियों ने रंगोली में पुष्प सज्जा थीम आधारित प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक डिजाइनों से बनी रंगोलियों ने पूरे परिसर को प्रकृति के उत्सव में बदल दिया।
इसके साथ ही तोरण डेकोरेशन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने रचनात्मकता और परंपरा का सुंदर मेल प्रस्तुत किया। काव्य पाठ प्रतियोगिता में प्रकृति और आध्यात्मिकता के विषय पर रचनाएँ सुनाई गईं, जिसने श्रोताओं के मन को छू लिया।

हैंडीक्राफ्ट वर्कशॉप: कला का जीवंत अनुभव
इस आयोजन का एक विशेष आकर्षण रहा हैंडीक्राफ्ट वर्कशॉप। विशेष अतिथि आर्टिस्ट गीतांजलि द्वारा बटिक, मधुबनी, मिरर वर्क और ब्लॉक प्रिंटिंग का प्रशिक्षण आर्ट्स के विद्यार्थियों को दिया गया।
विद्यार्थियों ने न केवल इन कलाओं को सीखा, बल्कि स्वयं बनाकर भी देखा। यह अनुभव उनके लिए सीखने के साथ-साथ आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भी रहा।
सम्मान समारोह और आभार प्रदर्शन
सभी प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को विशेष अतिथि गीतांजाली वरमोड़े एवं प्राचार्य डॉ. रीता जैन द्वारा पुरस्कृत किया गया। विजेताओं के चेहरों पर गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।
आयोजन का सफल संचालन सहा. प्रा. जयश्री पाठक, सहा. प्रा. हेमलता चौधरी एवं डॉ. आरती पालीवाल द्वारा किया गया। समस्त फैकल्टी के अथक प्रयास से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अंत में प्राचार्य ने मैनेजमेंट, फैकल्टी और सभी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

निष्कर्ष: शिक्षा और संस्कृति का संगम
बसंतोत्सव प्रकृति का नवजागरण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सृजनशीलता का संगम था। विद्यार्थियों को मंच मिला, कला को पहचान मिली और प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना मजबूत हुई।
यह आयोजन यह संदेश देता है कि जब ज्ञान, कला और परंपरा एक साथ आती हैं, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित होता है।

