बरखा का आगमन पर आधारित अजय सिंह शेखावत (अनमोल), नागदा की सुंदर हिंदी कविता पढ़ें। बारिश, हरियाली, इंद्रधनुष, खेत, प्रकृति और सावन के मनमोहक दृश्यों का भावपूर्ण चित्रण।
बरखा का आगमन
बरखा का आगमन केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रकृति के नवजीवन का उत्सव है। वर्षा की पहली फुहार के साथ धरती का कण-कण जीवंत हो उठता है। पेड़-पौधे हरियाली की नई चादर ओढ़ लेते हैं, खेतों में नई उम्मीदें अंकुरित होती हैं और वातावरण में माटी की सौंधी सुगंध मन को आनंद से भर देती है। प्रस्तुत कविता में कवि अजय सिंह शेखावत (अनमोल), नागदा ने वर्षा ऋतु की सुंदरता को अत्यंत सरल, मधुर और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया है।
प्रकृति का अनुपम सौंदर्य
घन-घन करते घोर गगन में,
नटखट काले बादल छाए।
नवजीवन देने धरती को,
संग बरखा की बूँदें लाए॥
कहीं डाल पर कोयल गाती,
कहीं नाचते मोर हैं।
कल-कल करके नदियाँ बहतीं,
झरने करते शोर हैं॥
ठंडी पवन के झोंके जब,
धीमी आहें भरते हैं।
कोमल-सा स्पर्श कराते,
शीतल मन को करते हैं॥
खुशियों का मनमोहक मेला,
लगता सारी गलियों में।
पौधों की मुस्कानें दिखतीं,
नन्हीं-नन्हीं कलियों में॥
घोर गगन में इंद्रधनुष,
अपने रंग फैलाता है।
दृश्य अनुपम प्रकृति का,
सबका मन हर्षाता है॥
खेतों में फसलें लहरातीं,
वसुंधरा होती पावन।
माटी की सौंधी खुशबू से,
गमक उठे सब वन-उपवन॥
पत्ते सर-सर कर लहराते,
भँवरे गुन-गुन राग सुनाते।
हरियाली धरती पर छाई,
बरखा आज बरसने आई॥
निष्कर्ष
बरखा का आगमन केवल वर्षा का वर्णन नहीं है, बल्कि प्रकृति, जीवन और आनंद का उत्सव है। यह कविता पाठकों को हरियाली, शीतलता, इंद्रधनुष, खेतों की लहराती फसलों और मिट्टी की सौंधी खुशबू का जीवंत अनुभव कराती है। कवि अजय सिंह शेखावत (अनमोल), नागदा ने सरल भाषा में वर्षा ऋतु के मनोहारी दृश्यों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है, जो प्रत्येक आयु वर्ग के पाठकों को प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा देती है।
रचनाकार: अजय सिंह शेखावत (अनमोल)
स्थान: नागदा
