Baramati विमान हादसा: को-पायलट शांभवी पाठक का आखिरी संदेश और ग्वालियर से जुड़े यादें
Baramati/ ग्वालियर।
28 जनवरी 2026 की सुबह महाराष्ट्र के Baramati में एक भीषण विमान हादसा हुआ, जिसमें महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। इस दुर्घटना में शामिल थीं विमान की को-पायलट शांभवी पाठक, जिनका संबंध मध्य प्रदेश के ग्वालियर से था। शांभवी पाठक की मौत ने उनके परिवार और पूरे शहर को झकझोर दिया है। इस हादसे की दुखद घटना से जुड़ी सबसे मार्मिक कहानी है शांभवी द्वारा अपने दादी मीरा पाठक को भेजा गया अंतिम संदेश।
शांभवी पाठक का ग्वालियर से जुड़ाव
शांभवी पाठक का जन्म ग्वालियर के मुरार इलाके में हुआ था। उनकी दादी, मीरा पाठक, ग्वालियर के बसंत विहार इलाके में अकेली रहती हैं। दादी ने बताया कि शांभवी का बचपन यहीं बीता और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर में ही पूरी की। शांभवी ने 7वीं और 8वीं कक्षा तक ग्वालियर में पढ़ाई की। इसके बाद उनके माता-पिता के साथ वह दिल्ली चली गईं, जहां उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की।
शांभवी ने दिल्ली में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और विमानन क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रशिक्षण लिया। दादी मीरा पाठक के अनुसार, अब ग्वालियर में कोई नहीं रहता, शांभवी के माता-पिता दिल्ली में रहते हैं, और शांभवी अपने पेशे में सफलता हासिल कर रही थीं। ग्वालियर में उनकी दादी के साथ बिताए गए बचपन की यादें हमेशा उनके साथ थीं।
हादसे से पहले शांभवी का आखिरी संदेश
हादसे की सुबह, शांभवी ने अपने दादी मीरा पाठक को सोशल मीडिया व्हाट्सएप के माध्यम से संदेश भेजा। सुबह 6.34 बजे भेजे गए संदेश में शांभवी ने लिखा, “हाय, दद्दा… गुड मॉर्निंग,” और साथ में इमोजी भी भेजा। मीरा पाठक ने रिप्लाई करते हुए लिखा, “गुड मॉर्निंग, चीनी।” शांभवी को प्यार से अपनी दादी मीरा ‘चीनी’ कहती थीं।
मीरा पाठक ने इस संदेश के बारे में कहा कि यह बेहद असामान्य था। उन्होंने बताया, “वो कभी ऐसा नहीं करती थी। मुझे नहीं पता कि उसे उस समय किसी तरह का इंट्यूशन हुआ या फिर किसी चीज़ का अंदेशा, लेकिन यह मैसेज मुझे बेहद भावुक कर गया। मुझे अब भी याद है कि मैसेज मिलने के बाद मुझे कोई शक नहीं था कि कुछ गड़बड़ होने वाली है।”
करीब दो घंटे बाद, सुबह 8.46 बजे, मीरा पाठक को पता चला कि बारामती में विमान क्रैश हो गया है और शांभवी उसमें शामिल थी। इस खबर ने उन्हें पूरी तरह से स्तब्ध कर दिया। मीरा ने कहा कि हादसे की खबर सुनते ही उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
हादसे का विस्तृत विवरण
Baramati में बुधवार, 28 जनवरी को सुबह एक निजी विमान क्रैश हो गया। इस विमान में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार, को-पायलट शांभवी पाठक और अन्य तीन लोग सवार थे। विमान क्रैश होने से सभी यात्री घटनास्थल पर ही मारे गए। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, विमान टेक-ऑफ के दौरान तकनीकी खराबी या रनवे की समस्या के कारण हादसा हुआ।
शांभवी पाठक इस विमान में को-पायलट के रूप में कार्यरत थीं। हादसे के बाद उनके परिवार और शहर में शोक का माहौल है। ग्वालियर से लेकर दिल्ली तक लोग शांभवी के व्यक्तित्व और पेशेवर कौशल की चर्चा कर रहे हैं।
दादी मीरा पाठक की यादें
मीरा पाठक ने बताया कि शांभवी बचपन से ही बुद्धिमान और मेहनती बच्ची थीं। शांभवी ने ग्वालियर में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद दिल्ली में अपने माता-पिता के साथ पढ़ाई जारी रखी। उनकी पढ़ाई में हमेशा प्रथम स्थान रहा और उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
मीरा पाठक ने बताया कि शांभवी हमेशा उनके लिए विशेष रूप से प्यारी थी। वह अपने दादी के साथ बिताए गए पलों को कभी नहीं भूलती थी। मीरा ने कहा, “वो अपने जीवन में बहुत मेहनती और अनुशासित थी। उसने हमेशा अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत की।”
दादी ने शांभवी के आखिरी संदेश को बेहद मार्मिक बताया। उन्होंने कहा कि इस संदेश ने उन्हें कुछ अलग महसूस कराया। “शांभवी ने मुझे इस तरह संदेश कभी नहीं भेजा था। मुझे नहीं पता कि उस समय उसे किसी तरह का पूर्वाभास था या नहीं, लेकिन यह मैसेज अब मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा।”
शांभवी पाठक का करियर
शांभवी पाठक ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद विमानन क्षेत्र में करियर बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने पायलट बनने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण लिया और को-पायलट के रूप में सेवा देने लगीं। उनके पेशेवर जीवन में अनुशासन और समर्पण स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था।
उनके सहकर्मियों ने बताया कि शांभवी हमेशा अपने काम में पूरी लगन और ईमानदारी से जुड़ी रहती थीं। उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाया। उनकी करियर यात्रा में कई लोग उनकी प्रेरणा के रूप में उनका उदाहरण देते थे।
हादसे की प्रतिक्रिया और शोक
Baramati विमान हादसे की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। शांभवी पाठक के परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों ने उनके अचानक चले जाने पर गहरा दुःख व्यक्त किया। ग्वालियर और दिल्ली में शांभवी के प्रियजनों में शोक की स्थिति है।
मीरा पाठक ने मीडिया से बातचीत में कहा, “शांभवी हमारे लिए बहुत खास थी। उसकी अचानक मृत्यु से हम सभी स्तब्ध हैं। हमें गर्व है कि वह अपने करियर में इतनी सफल रही, लेकिन उसका जाना हमारे लिए अपूरणीय क्षति है।”
शहर के लोग भी शांभवी के बचपन और करियर के बारे में चर्चा कर रहे हैं। उन्हें याद है कि शांभवी बचपन में कितनी होशियार और समझदार बच्ची थी।
निष्कर्ष
Baramati विमान हादसा न केवल एक राजनीतिक और तकनीकी त्रासदी है, बल्कि यह शांभवी पाठक जैसे प्रतिभाशाली और मेहनती युवा की खोई हुई जिंदगी की कहानी भी है। उनके अंतिम संदेश ने उनके प्रियजनों के दिलों को छू लिया और उनके व्यक्तित्व की झलक दिखाई।
शांभवी पाठक की यह कहानी यह याद दिलाती है कि जीवन कितना अनिश्चित है और हमें अपने प्रियजनों के साथ हर पल का मूल्य समझना चाहिए। उनके साहस, मेहनत और करियर की उपलब्धियां हमेशा प्रेरणा के रूप में याद रखी जाएंगी।
