टाइगर रिज़र्व में नाइट सफारी बंद होने के बाद बांधवगढ़ और मध्य प्रदेश के अन्य रिज़र्व में पर्यटन व्यवसाय को नया आयाम देने के लिए विलेज टूरिज़्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब पर्यटक जंगल के बीच बसे छोटे गांवों में जाकर स्थानीय जीवनशैली, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि आज के पर्यटक सिर्फ वन्यजीव देखने नहीं आते, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को महसूस करना चाहते हैं। इसी कारण बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व ने गांवों को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
रांछा और डोभा जैसे गांव अब पर्यटन के प्रमुख स्थल बन रहे हैं। रांछा गांव में पर्यटक होमस्टे में रहकर आदिवासी जीवन, पारंपरिक झोपड़ियां और गांव की सुबह-शाम का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। वहीं डोभा गांव में लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और कारीगरी को करीब से देखा जा सकता है। इन गांवों में होमस्टे स्थानीय परिवारों द्वारा संचालित हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजगार मिलता है और पर्यटन का अनुभव और भी असली बनता है।

विलेज टूरिज़्म केवल ठहरने तक सीमित नहीं है। बांधवगढ़ प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि पर्यटक गांव के पारंपरिक व्यंजन जैसे मंगौड़ी, रसाज, दालपूरी, महुए के लाटा, मौहरी ब्रेकरी और स्थानीय लड्डू का स्वाद भी ले सकें। यह पहल न केवल पर्यटन अनुभव को बढ़ाएगी, बल्कि महिलाओं और परिवारों के लिए आर्थिक अवसर भी प्रदान करेगी।
इसके अलावा, जोहिला फॉल और ज्वालामुखी गेट जैसे स्थलों को विकसित किया गया है, जिससे पर्यटक पैदल भ्रमण और साइकिल ट्रेकिंग का आनंद भी ले सकते हैं। विलेज टूरिज़्म से स्थानीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आया है, ग्रामीण परिवार होमस्टे, स्थानीय भोजन और हस्तशिल्प से आय अर्जित कर रहे हैं। नाइट सफारी बंद होने के बाद यह पहल पर्यटन की कमी को पूरा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्थायी आर्थिक अवसर प्रदान कर रही है।
