भगवान बलराम जन्मोत्सव में गूंजा कृषि संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
सारंगपुर के ग्राम पांदा में श्री घरणीघर भगवान जन्मोत्सव एवं बलराम कृषि महोत्सव का भव्य आयोजन, मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने चल समारोह में लिया हिस्सा; ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण
कार्यक्रम के दौरान गांव का वातावरण धार्मिक जयकारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, श्रद्धालु और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। भगवान बलराम के जन्मोत्सव को कृषि और किसान जीवन से जोड़ते हुए खेती, जल, मिट्टी और पर्यावरण के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने की भगवान बलराम की पूजा-अर्चना
चल समारोह के दौरान मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने भगवान श्री बलराम की विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और किसानों की उन्नति की कामना की।
इसके बाद मंत्री डॉ. टेटवाल ग्राम पांदा स्थित श्री घरणीघर राधाकृष्ण मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने दर्शन-पूजन कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने धार्मिक जयकारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
कृषि और किसान जीवन के प्रतीक हैं भगवान बलराम
श्री बलराम कृषि महोत्सव को धार्मिक आयोजन के साथ भारतीय कृषि परंपरा और किसान जीवन से जोड़कर भी देखा गया। भगवान श्री बलराम को हल, कृषि और धरती से जुड़े श्रम का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीण अंचलों में इसी कारण उनके जन्मोत्सव का विशेष महत्व है।
महोत्सव के दौरान किसानों के योगदान, कृषि संस्कृति और अन्नदाता के सम्मान का संदेश दिया गया। खेती को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
कृषि परंपराओं से नई पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत
मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसान और कृषि को हमेशा सम्मान का स्थान मिला है। ग्रामीण जीवन और भारतीय अर्थव्यवस्था में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि खेत, जल, मिट्टी और प्रकृति के संरक्षण के बिना समृद्ध कृषि की कल्पना नहीं की जा सकती। ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी कृषि परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति से परिचित कराने का अवसर मिलता है।
बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से किसानों की मेहनत, धरती के प्रति उनके जुड़ाव और कृषि परंपराओं को सम्मान देने का संदेश दिया गया।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण
धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने शासकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया।
पौधारोपण के माध्यम से जल, भूमि और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। मंत्री ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की।
पौधा लगाना ही नहीं, उसकी देखभाल भी जरूरी
मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि पेड़ पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य से भी जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में पौधारोपण करना चाहिए, लेकिन केवल पौधा लगा देना पर्याप्त नहीं है। उसे बड़ा होने तक सुरक्षित रखने और उसकी देखभाल करने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में जल एवं भूमि संरक्षण को लेकर अधिक जनभागीदारी की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति और कृषि एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं। पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो कृषि व्यवस्था भी मजबूत होगी।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकार का संदेश


ग्राम पांदा में आयोजित कार्यक्रम धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा। इसमें कृषि, किसान और पर्यावरण जैसे सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता से जोड़ा गया।
भगवान श्री बलराम के जन्मोत्सव पर आयोजित कृषि महोत्सव ने ग्रामीण जीवन में खेती और किसान की भूमिका को रेखांकित किया। वहीं पौधारोपण कार्यक्रम के माध्यम से प्रकृति संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।
ग्रामीणों ने भी आयोजन में बढ़-चढ़कर भागीदारी की। चल समारोह के दौरान गांव का वातावरण उत्साह और भक्ति से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री बलराम और श्री घरणीघर भगवान के दर्शन कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि एवं अच्छी फसल की कामना की।
किसानों के सम्मान का दिया संदेश
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान अन्नदाता किसानों की मेहनत और उनके योगदान को भी याद किया गया। कार्यक्रम में यह संदेश सामने आया कि भारतीय कृषि परंपरा केवल खेती की तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की संस्कृति भी है।
मिट्टी, जल, पेड़-पौधे और पशुधन ग्रामीण जीवन एवं कृषि व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं। इनके संरक्षण से ही भविष्य में टिकाऊ और समृद्ध कृषि व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
कृषि संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास
महोत्सव के माध्यम से ग्रामीण अंचल की कृषि संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया गया। भगवान श्री बलराम से जुड़े कृषि संदेशों को याद करते हुए किसानों के सम्मान, मेहनत और धरती के प्रति जिम्मेदारी की भावना को प्रमुखता दी गई।
आयोजन से जुड़े लोगों का कहना था कि इस तरह के कार्यक्रमों से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं मजबूत होने के साथ समाज में पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने को लेकर जागरूकता भी बढ़ती है।
जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद


कार्यक्रम में पूर्व विधायक गुलाब सिंह सुस्तानी, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री मोना सुस्तानी, प्रदेश किसान मोर्चा उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, जनपद अध्यक्ष देवनारायण नागर, मंडल अध्यक्ष गिरवर भंडारी और जनपद उपाध्यक्ष कैलाश नागर सहित भाजपा के विभिन्न पदाधिकारी, कार्यकर्ता, ग्रामीणजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
ग्राम पांदा में आयोजित श्री घरणीघर भगवान जन्मोत्सव एवं बलराम कृषि महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ कृषि, अन्नदाता और प्रकृति के सम्मान का संदेश देते हुए संपन्न हुआ। आयोजन ने जहां भगवान श्री बलराम से जुड़ी कृषि परंपरा को सामने रखा, वहीं पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया।
