बाल ब्रह्मचारी संत बसंत जी महाराज चातुर्मास Silwani के तहत संत बसंत जी महाराज का नगर आगमन धूमधाम से हुआ। तारण तरण जैन समाज ने भव्य स्वागत किया, गांधी चौक से निकली शोभायात्रा चैतालय जी पहुंची जहां धर्मसभा एवं शांति पाठ का आयोजन हुआ।
बाल ब्रह्मचारी संत बसंत जी महाराज चातुर्मास Silwani : भव्य स्वागत के साथ हुआ नगर आगमन
रिपोर्ट: वैभव जैन मस्ताना, Silwani संवाददाता
- चातुर्मास का धार्मिक महत्व
Silwani । बाल ब्रह्मचारी संत बसंत जी महाराज चातुर्मास सिलवानी के शुभ अवसर पर तारण तरण जैन समाज के पूज्य बाल ब्रह्मचारी संत बसंत जी महाराज का नगर में मंगल प्रवेश अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। चातुर्मास के लिए संत श्री के सिलवानी आगमन को लेकर समाज के सभी वर्गों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
नगर में प्रवेश के दौरान समाज के वरिष्ठजनों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने संत श्री का भव्य स्वागत किया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने चरण वंदना कर उनका अभिनंदन किया तथा पुष्प वर्षा कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
समाज में दिखा अद्भुत उत्साह
संत श्री के नगर आगमन को लेकर कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। समाज के सभी सदस्यों ने मिलकर स्वागत की भव्य व्यवस्था की। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, युवाओं ने शोभायात्रा की व्यवस्था संभाली तथा बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि चातुर्मास के दौरान संत श्री के सान्निध्य में धार्मिक प्रवचन, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना का लाभ मिलेगा।
गांधी चौक से निकली भव्य शोभायात्रा
संत श्री का स्वागत जुलूस गांधी चौक से प्रारंभ हुआ। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने जयघोष करते हुए संत श्री का अभिनंदन किया। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई चैतालय जी पहुंची, जहां धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
धर्मसभा एवं शांति पाठ
चैतालय जी पहुंचने के बाद पूज्य बाल ब्रह्मचारी संत बसंत जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्मसभा के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने धर्म, संयम, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला।
धर्मसभा के उपरांत शांति पाठ का वाचन संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने संत श्री से आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन में धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
चातुर्मास का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान संत एक स्थान पर विराजमान होकर धर्मोपदेश देते हैं। इस अवधि में श्रद्धालु अधिक से अधिक धार्मिक गतिविधियों, स्वाध्याय, तप, संयम एवं सेवा कार्यों में भाग लेते हैं। सिलवानी में संत बसंत जी महाराज के चातुर्मास से पूरे नगर का वातावरण धर्ममय और भक्तिमय हो गया है।
