Atal Progress -Way: कोटा से इटावा तक विकास की नई राह
राजस्थान के कोटा से उत्तर प्रदेश के इटावा तक प्रस्तावित 404 किलोमीटर लंबे Atal Progress -Way परियोजना ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। यह प्रोजेक्ट लंबे समय से चर्चा में रहा है और अब राज्य सरकार के संकेत के बाद इसे पुराने रूट अलाइनमेंट पर ही आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है।
इस परियोजना को देश के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है, जो न केवल राज्यों को जोड़ेगा बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा देगा।
जमीन सत्यापन की प्रक्रिया फिर शुरू
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मुरैना जिले के करीब 90 गांवों में पहले से चिन्हित जमीन का दोबारा सत्यापन शुरू कर दिया है। इसके अलावा श्योपुर के 48 और भिंड के 23 गांवों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
करीब तीन साल पहले जिन जमीनों को अधिग्रहण के लिए चिन्हित किया गया था, उनका दोबारा सर्वे इसलिए किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस दौरान जमीन का स्वामित्व बदला है या नहीं।
सत्यापन के बाद संबंधित किसानों के नाम, गांव और जमीन का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
दावे-आपत्तियों के बाद मिलेगा मुआवजा
प्रशासन ने साफ किया है कि सत्यापन के बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद किसानों के बैंक खातों में सीधे मुआवजे की राशि ट्रांसफर की जाएगी।
इस योजना के तहत कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देने का प्रावधान है। हालांकि, कुछ किसान संगठनों ने इस मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए असंतोष भी जताया है।
रूट बदलने पर हुआ था बड़ा विरोध
साल 2020 में इस परियोजना का प्रारंभिक सर्वे किया गया था और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी। लेकिन इसी दौरान केंद्र सरकार ने रूट अलाइनमेंट में बदलाव कर दिया।
नए रूट के कारण कई नए क्षेत्रों की जमीन प्रभावित होने लगी, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ गई। सबलगढ़ से पोरसा तक कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए।
स्थिति को देखते हुए अप्रैल 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
तीन साल बाद फिर शुरू हुआ प्रोजेक्ट
करीब तीन साल तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद अब इस परियोजना को फिर से शुरू किया गया है। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे पुराने रूट पर लागू करने के निर्देश दिए हैं।
यह प्रोजेक्ट करीब 23,645 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इसे तेजी से पूरा किया जाए ताकि क्षेत्र में विकास को गति मिल सके।
पुराने रूट से किसानों को राहत
पुराने रूट अलाइनमेंट को लागू करने से किसानों को बड़ा फायदा मिला है।
- अब केवल 90 गांवों के लगभग 2089 किसानों की 488 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होगी।
- जबकि नए रूट में 96 गांवों के 14,137 किसानों की 935 हेक्टेयर से अधिक जमीन प्रभावित होने वाली थी।
इस फैसले से करीब 12 हजार किसानों की 450 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन बच जाएगी।
यह निर्णय किसानों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
बीहड़ क्षेत्र में विकास की उम्मीद
Atal Progress -Wayका मार्ग चंबल के बीहड़ क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जो लंबे समय से विकास से दूर रहे हैं।
यह एक्सप्रेस-वे कोटा से शुरू होकर श्योपुर, मुरैना और भिंड होते हुए इटावा तक पहुंचेगा। इस मार्ग में कई ऐसे गांव शामिल हैं जहां अभी तक सड़क और कनेक्टिविटी की स्थिति कमजोर है।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद:
- परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी
- व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
- पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
इस प्रोजेक्ट से न केवल सड़क संपर्क बेहतर होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
बेहतर कनेक्टिविटी के कारण:
- कृषि उत्पादों की मार्केट तक पहुंच आसान होगी
- छोटे व्यवसायों को विस्तार का मौका मिलेगा
- निवेश को बढ़ावा मिलेगा
इसके अलावा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हो सकेगी।
पर्यावरण और चुनौतियां
हालांकि यह परियोजना विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं।
- भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद
- पर्यावरणीय प्रभाव
- स्थानीय लोगों का पुनर्वास
सरकार और प्रशासन इन चुनौतियों से निपटने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं।
किसानों की मांग और सरकार की भूमिका
किसानों ने मुआवजे को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि उन्हें बाजार मूल्य के अनुसार उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि पारदर्शिता के साथ पूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और किसानों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
निष्कर्ष: विकास और संतुलन की राह
Atal Progress -Way केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास की एक बड़ी पहल है।
पुराने रूट पर प्रोजेक्ट को लागू करने का निर्णय किसानों और विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो यह न केवल मध्य प्रदेश और राजस्थान बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए भी विकास की नई संभावनाएं लेकर आएगी।
