असम में बाढ़ का कहर जारी, पुनर्वास और मरम्मत पर खर्च हो सकते हैं 1,000 करोड़ से ज्यादा
कई इलाकों में पानी घटा, लेकिन तबाही का असर बरकरार
गुवाहाटी। Assam में बाढ़ का पानी कई इलाकों में धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन इससे हुई तबाही का असर अभी भी गंभीर बना हुआ है। राज्य सरकार का प्रारंभिक अनुमान है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, क्षतिग्रस्त मकानों और संपत्तियों की मरम्मत तथा जरूरी सुविधाओं को बहाल करने में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बुधवार को गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि केंद्र सरकार ने असम को पुनर्वास और राहत कार्यों में हर संभव मदद देने का भरोसा दिया है। सरकार का फोकस अब तत्काल राहत के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को दोबारा सुरक्षित तरीके से बसाने पर है।
9 अगस्त से शुरू हुआ नुकसान का सर्वे
मुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन करने के लिए 9 अगस्त से विशेष सर्वेक्षण अभियान शुरू किया गया है। शुरुआती चरण में 8,000 से अधिक परिवारों का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस सर्वे में करीब 150 करोड़ रुपये के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान सामने आया है।
सरकार के अनुसार यह आंकड़ा अंतिम नहीं है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे का काम लगातार जारी है और नुकसान का वास्तविक आकलन सभी क्षेत्रों से आंकड़े मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा।
30 अगस्त तक चलेगा सर्वे अभियान
राज्य सरकार का विशेष सर्वेक्षण अभियान 30 अगस्त तक चलने की योजना है। इस दौरान ऊपरी असम के सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में करीब 50 से 60 हजार परिवारों को सर्वे में शामिल किया जाएगा।
सर्वे के दौरान मकानों, निजी संपत्तियों, कृषि, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट सितंबर तक तैयार हो सकती है।
कई इलाकों में लगभग हर घर प्रभावित
बाढ़ ने ऊपरी असम के कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपालिखुटी, मजगांव और कमल चापोरी जैसे क्षेत्रों में स्थिति बेहद खराब रही है। कुछ स्थानों पर लगभग हर घर बाढ़ से प्रभावित हुआ है।
ऐसे इलाकों में प्रभावित परिवारों को केवल मुआवजा देने के बजाय सरकार स्थायी आवास उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। इसके लिए केंद्र सरकार से बातचीत की जा रही है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में कम नुकसान उठाना पड़े।
64 हजार परिवारों को मिली 15 हजार रुपये की सहायता
बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सहायता राशि वितरित की है। मुख्यमंत्री के मुताबिक करीब 64 हजार परिवारों को 15-15 हजार रुपये की प्रारंभिक सहायता दी जा चुकी है।
इसके अलावा अगले कुछ दिनों में 31,212 लोगों को भी यह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्थिक मदद मिल सके।
धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण के लिए भी सहायता
बाढ़ के कारण शिवसागर और चराइदेव जिलों में कई नामघर भी प्रभावित हुए हैं। सरकार ने इन धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण के लिए सहायता देने का निर्णय लिया है।
जानकारी के अनुसार, 20 अगस्त से प्रभावित नामघरों के पुनर्निर्माण के लिए प्रत्येक को 1.5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही बाढ़ से क्षतिग्रस्त आंगनबाड़ी केंद्रों के पुनर्निर्माण के लिए सरकार करीब 11.3 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है।
बारिश का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं
असम में बाढ़ का पानी घटने के बावजूद मौसम की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। बुधवार को भी कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर रही। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में बारिश का अनुमान जताया है।
बारिश के कारण राज्य के चार जिलों में करीब 1.12 लाख लोगों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। ऐसे में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है।
सहायक नदियों ने बढ़ाई परेशानी
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि इस बार ऊपरी असम में बाढ़ की तबाही के पीछे ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने बताया कि दिखो नदी के कारण कई क्षेत्रों में स्थिति गंभीर हुई।
इसके अलावा धानसिरी और डोरिका नदियों ने भी कई इलाकों में मुश्किलें बढ़ाईं। सरकार अब बाढ़ नियंत्रण की रणनीति में केवल ब्रह्मपुत्र नदी पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उसकी सहायक नदियों पर भी विशेष ध्यान देने की तैयारी कर रही है।
सरकार का फोकस अब स्थायी पुनर्वास पर
बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाना और उनके मकानों तथा संपत्तियों को दोबारा तैयार करना है। राज्य सरकार का मानना है कि नुकसान का अंतिम आंकड़ा शुरुआती अनुमान से काफी अधिक हो सकता है।
इसी वजह से सरकार तत्काल राहत के साथ दीर्घकालिक पुनर्वास योजना तैयार करने पर जोर दे रही है। स्थायी आवास, बुनियादी सुविधाओं की बहाली और क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्तियों की मरम्मत इस योजना के प्रमुख हिस्से हो सकते हैं।
केंद्र से सहायता की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार ने असम के पुनर्वास कार्यों में हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। अब राज्य सरकार विस्तृत सर्वे और नुकसान की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर केंद्र के सामने आवश्यक सहायता का प्रस्ताव रखेगी।
सरकार के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ बाढ़ से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत उपलब्ध कराना है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में ऐसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए स्थायी उपाय करने हैं।
सितंबर में सामने आ सकता है नुकसान का पूरा आंकड़ा
राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सर्वे के पूरा होने के बाद सितंबर तक बाढ़ से हुए नुकसान की विस्तृत तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। इसके आधार पर पुनर्वास और मरम्मत के लिए आवश्यक बजट का निर्धारण किया जाएगा।
फिलहाल शुरुआती सर्वे में करीब 150 करोड़ रुपये का नुकसान सामने आया है, लेकिन सरकार का अनुमान है कि राहत, पुनर्वास और संपत्तियों की मरम्मत का कुल खर्च 1,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
असम में बाढ़ का पानी भले ही कई क्षेत्रों में कम हो रहा हो, लेकिन हजारों परिवारों के सामने सामान्य जीवन दोबारा शुरू करने की चुनौती बनी हुई है। सरकार अब राहत से आगे बढ़कर स्थायी पुनर्वास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी में है।
