भौराखाती पंचायत में कथित भ्रष्टाचार का मामला पहुंचा मुख्यमंत्री कार्यालय, ग्रामीणों ने मांगी निष्पक्ष जांच
रिपोर्टर: राहुल जैन
विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप, शिकायतकर्ताओं ने दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की मांग उठाई
Ashoknagar। जिले की जनपद पंचायत अशोकनगर अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भौराखाती में कथित भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में अनियमितताओं का मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। पंचायत क्षेत्र में हुए विभिन्न निर्माण कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की राशि खर्च की गई, लेकिन धरातल पर कई कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि रिकॉर्ड में जिन कार्यों को पूर्ण बताया गया है, उनमें से कई कार्य मौके पर अधूरे दिखाई देते हैं।
मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए जांच की मांग की है। अब शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
कागजों में विकास, जमीन पर सवाल उठने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार ग्राम पंचायत भौराखाती में विकास कार्यों के नाम पर कई योजनाओं का संचालन किया गया। इनमें सड़क निर्माण, नाली निर्माण, सामुदायिक भवनों के रखरखाव और अन्य विकास कार्य शामिल हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई कार्य दस्तावेजों में पूरे दिखाए गए हैं, लेकिन मौके पर उनकी गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की आवश्यकता है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ योजनाओं में मजदूरों की उपस्थिति और भुगतान को लेकर भी सवाल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचना चाहिए और प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता होनी चाहिए।
मनरेगा और अन्य योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप
शिकायतकर्ताओं ने मनरेगा सहित अन्य सरकारी योजनाओं में भी गड़बड़ी की आशंका जताई है। उनका कहना है कि मजदूरों के नाम, कार्य दिवस और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ मामलों में ऐसे लोगों के नाम रिकॉर्ड में शामिल होने की संभावना है, जिनकी वास्तविक भागीदारी की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
उन्होंने मांग की है कि पंचायत के सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और रिकॉर्ड की जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाए।
जिला और जनपद स्तर पर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले स्थानीय स्तर पर शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्हें उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय तक जाना पड़ा।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शिकायतों पर केवल जांच प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन अंतिम कार्रवाई तक मामला नहीं पहुंच पाता।
उन्होंने मांग की है कि जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाए, ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात की संभावना न रहे।
पारदर्शिता और जवाबदेही की उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में आने वाला सरकारी पैसा जनता के विकास के लिए होता है। इसलिए उसके उपयोग में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितता होती है तो उसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ता है। खराब सड़कें, अधूरे निर्माण और योजनाओं में गड़बड़ी से आम जनता को नुकसान उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत के सभी कार्यों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि राशि का उपयोग सही तरीके से हुआ है या नहीं।
शिकायतकर्ताओं ने रखीं प्रमुख मांगें
भौराखाती पंचायत मामले में शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं।
इनमें प्रमुख रूप से:
- पंचायत के सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
- सरकारी योजनाओं के भुगतान और रिकॉर्ड की जांच की जाए।
- अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- जांच प्रक्रिया को समय सीमा में पूरा किया जाए।
- भविष्य में पंचायत स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन की जांच के बाद साफ होगी स्थिति
फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव होगी।
यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं ग्रामीणों की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर उचित कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचने के बाद बढ़ी उम्मीदें
भौराखाती पंचायत से जुड़ा मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब इस मामले में गंभीरता से जांच होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य आम जनता को लाभ पहुंचाना है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर किस प्रकार की कार्रवाई करता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।
