Ashoknagar में खाद-यूरिया वितरण व्यवस्था में बदलाव, अब ई-टोकन नहीं ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर मिलेगा खाद
राहुल जैन की रिपोर्ट।
सोमवार से लागू होगी नई व्यवस्था, किसानों को साथ लाने होंगे पावती, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर
Ashoknagar जिले के किसानों के लिए खाद और यूरिया वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। आगामी सोमवार से जिले में रासायनिक खाद और यूरिया प्राप्त करने के लिए लागू ई-टोकन प्रणाली को समाप्त कर दिया जाएगा। अब किसानों को पुरानी पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत किसानों को खाद और यूरिया वितरण केंद्रों एवं सहकारी समितियों पर पहुंचकर कतार में लगना होगा। खाद का वितरण ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के सिद्धांत के आधार पर किया जाएगा। प्रशासन के इस निर्णय से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें ई-टोकन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
ई-टोकन व्यवस्था में आ रही थीं कई समस्याएं
जिले में पिछले कुछ समय से खाद और यूरिया का वितरण ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा था। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को लंबी कतारों से बचाना और वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना था।
हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में ई-टोकन प्रणाली को लेकर कई व्यवहारिक समस्याएं सामने आ रही थीं। किसानों को सर्वर डाउन, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
कई किसान तकनीकी जानकारी के अभाव या ई-टोकन उपलब्ध नहीं होने के कारण समय पर खाद प्राप्त नहीं कर पा रहे थे। इसका असर उनकी खेती की तैयारियों पर भी पड़ रहा था। किसानों की परेशानियों और स्थानीय स्तर पर उठ रही मांगों को देखते हुए जिला प्रशासन ने ई-टोकन व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
दस्तावेजों का सत्यापन रहेगा अनिवार्य
हालांकि अब किसानों को ई-टोकन की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन खाद वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दस्तावेजों का सत्यापन जारी रहेगा।
खाद और यूरिया प्राप्त करने के लिए किसानों को तीन प्रमुख दस्तावेज साथ लाने होंगे—
- कृषि भूमि की मूल किताब (पावती) — भूमि स्वामित्व और रकबे के सत्यापन के लिए।
- आधार कार्ड — किसान की पहचान सुनिश्चित करने के लिए।
- मोबाइल नंबर — वितरण प्रक्रिया में जानकारी दर्ज करने के लिए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित दस्तावेजों के बिना किसी भी किसान को खाद या यूरिया उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
कालाबाजारी रोकने के लिए होगी जांच
प्रशासन ने कहा है कि खाद वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाएगा। दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसान को खाद की बोरी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक किसानों तक खाद पहुंचाना और कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण रखना है। अधिकारियों ने सभी वितरण केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि खाद वितरण के दौरान पूरी पारदर्शिता और व्यवस्था बनाए रखें।
किसानों को समय पर पहुंचने की अपील
नई व्यवस्था के अनुसार अब किसानों को खाद लेने के लिए वितरण केंद्रों और समितियों पर समय से पहुंचना होगा। जो किसान पहले पहुंचेगा और कतार में अपना स्थान बनाएगा, उसे सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे आवश्यक दस्तावेज लेकर ही केंद्रों पर पहुंचे, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
वितरण केंद्रों पर व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वितरण केंद्रों पर भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्रों पर किसानों की कतार, दस्तावेज जांच और खाद वितरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। नई व्यवस्था से किसानों को सरल प्रक्रिया के माध्यम से खाद मिलने की उम्मीद है।
किसानों के लिए राहत की उम्मीद
खाद और यूरिया वितरण में बदलाव को लेकर किसानों में राहत की उम्मीद जताई जा रही है। कई किसान लंबे समय से ई-टोकन प्रणाली में आ रही तकनीकी परेशानियों के कारण परेशान थे। अब ऑफलाइन व्यवस्था लागू होने से उन्हें सीधे वितरण केंद्र पहुंचकर खाद लेने की सुविधा मिलेगी।
हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमों का पालन सभी किसानों को करना होगा। सोमवार से लागू होने वाली नई व्यवस्था के बाद खाद वितरण प्रक्रिया किस तरह संचालित होती है, इस पर किसानों और प्रशासन दोनों की नजर रहेगी।
