पेड़ों की कटाई और खनन पर Supreme Court सख्त, आदेशों की अनदेखी पर नाराज़गी
अरावली पर्वतमाला में खनन गतिविधियों को लेकर सुप्रीम Court ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई अहम सुनवाई में कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि अवैध खनन एक गंभीर अपराध है, जिसके पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव भयानक, दीर्घकालिक और लगभग अपूरणीय हो सकते हैं। शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है और तब तक केंद्र सरकार व संबंधित राज्यों को अपनी-अपनी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
शुरुआती स्तर पर ही सामने आईं गंभीर चिंताएं: CJI
सुनवाई की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) से कहा कि कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कुछ गंभीर चिंता के बिंदु चिन्हित किए हैं, जिन पर केंद्र सरकार की सक्रिय सहायता जरूरी है। CJI ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी के खिलाफ लड़ाई नहीं है, बल्कि समस्या की जड़ तक पहुंचने और स्थायी समाधान निकालने का प्रयास है। इसी क्रम में Court ने एमिकस क्यूरी से एक विस्तृत नोट दाखिल करने को कहा और यह भी स्पष्ट किया कि जब तक आगे के निर्देश नहीं आते, तब तक पहले से लागू व्यवस्थाएं और आदेश जारी रहेंगे।
राजस्थान में अब भी जारी है खनन और पेड़ों की कटाई
राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया कि जस्टिस ओका की 2024 की पीठ द्वारा दिए गए आदेशों के बावजूद राज्य में अब भी खनन पट्टे जारी किए जा रहे हैं और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो रही है। इस पर CJI ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, हमारे आदेश बिल्कुल स्पष्ट हैं। दुर्भाग्य से अवैध खनन और भ्रष्टाचार अब भी मौजूद है। राज्य सरकार को अपनी मशीनरी सक्रिय करनी होगी। अवैध खनन किसी भी हाल में रोका जाना चाहिए, यह एक अपराध है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि यदि कहीं अवैध खनन की ठोस जानकारी है, तो उसकी प्रतिनिधि शिकायत ASG कार्यालय में दी जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि जब मामला पहले ही सुओ मोटो लिया जा चुका है, तो नई-नई रिट याचिकाएं दायर कर सुनवाई को भटकाने से बचा जाए।
स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन के संकेत
ASG ने Court को बताया कि इस पूरे मामले में केंद्रीय सशक्त समिति (CEC), एमिकस क्यूरी की सहायता करेगी। इस पर CJI ने कहा कि अब समय आ गया है कि वन, खनन, पर्यावरण और अन्य तकनीकी क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक साथ बैठकर इस संवेदनशील मुद्दे पर काम करें। Court ने संकेत दिया कि एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और बहु-विषयक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी, जो सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम करेगी, ताकि अरावली से जुड़े सभी पहलुओं पर समग्र और वैज्ञानिक दृष्टि से विचार किया जा सके।
100 मीटर नियम पर रोक जारी
सुप्रीम Court ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अरावली क्षेत्र को लेकर पहले दिए गए उस आदेश पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी, जिसमें 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने की बात कही गई थी। कोर्ट ने दोहराया कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में किसी भी प्रकार की ढिलाई भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों पर सीधा असर डालती है। इसलिए जब तक सभी पहलुओं पर गहराई से विचार नहीं हो जाता, तब तक कोई भी जल्दबाजी नहीं की जाएगी।
अरावली की परिभाषा पर कानूनी बहस
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अरावली पर्वतमाला को एक सख्त और सीमित परिभाषा में बांधना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि भूगर्भीय दृष्टि से इसमें कई उप-टेक्टॉनिक संरचनाएं भी शामिल हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रारंभिक और अलग से सुनवाई की मांग की। इस पर CJI ने कहा कि यदि एमिकस क्यूरी या केंद्र सरकार की ओर से कोई महत्वपूर्ण पहलू छूट गया है, तो उस पर सभी पक्षों को पूरा अवसर दिया जाएगा, ताकि फैसला संतुलित और न्यायसंगत हो।
सुप्रीम Court के प्रमुख निर्देश
सुनवाई के अंत में Court ने कुछ अहम निर्देश जारी किए—
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सभी पक्ष चार सप्ताह के भीतर विस्तृत नोट और रिपोर्ट दाखिल करें
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एमिकस क्यूरी और केंद्र सरकार पर्यावरण, वन और खनन विशेषज्ञों के नाम सुझाएं
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प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगी
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राजस्थान सरकार यह सुनिश्चित करे कि अवैध खनन तुरंत और पूरी तरह रोका जाए
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दिसंबर में दिया गया पिछला आदेश अगले निर्देश तक लागू रहेगा
Court ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘वन’ और ‘अरावली’ की परिभाषाओं को अलग-अलग रखा जाएगा। जहां ‘वन’ की परिभाषा व्यापक होगी, वहीं ‘अरावली’ को अपेक्षाकृत संकीर्ण और विशिष्ट दायरे में देखा जाएगा।
