अनूपपुर के मलगा में बरतराई खदान के पास जमीन धंसी, 900 स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
कोलियरी क्षेत्र में अचानक भू-धंसाव से ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन से जांच और सुरक्षा व्यवस्था की मांग
अनूपपुर।
जिले के मलगा गांव स्थित बरतराई खदान क्षेत्र के समीप अचानक जमीन धंसने की घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में चिंता का माहौल बन गया है। कोलियरी क्षेत्र में हुए इस भू-धंसाव ने न केवल स्थानीय ग्रामीणों को भयभीत कर दिया है, बल्कि पास में संचालित एक बड़े विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 900 छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, जमीन अचानक फट गई और देखते ही देखते मिट्टी कई फीट नीचे धंस गई। घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों में डर का वातावरण है। लोगों का कहना है कि खदान क्षेत्र होने के कारण जमीन के अंदर लगातार बदलाव हो रहे हैं, जिसके चलते भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की आशंका बनी हुई है।
बरतराई खदान क्षेत्र के पास अचानक हुआ भू-धंसाव
जानकारी के अनुसार, यह घटना मलगा गांव के मुख्य मार्ग पर स्थित गेट के पास हुई। बताया जा रहा है कि धंसी हुई जमीन चिंता सिंह पाव की जमीन के आसपास स्थित क्षेत्र में देखी गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, जमीन के एक हिस्से में अचानक दरारें दिखाई दीं और इसके बाद मिट्टी का बड़ा हिस्सा नीचे बैठ गया। कुछ ही समय में वहां गहरे गड्ढे बन गए, जिन्हें देखकर स्थानीय लोग घबरा गए।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। लोगों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते इस क्षेत्र की जांच नहीं की गई तो आने वाले समय में खतरा और बढ़ सकता है।
विद्यालय के पास भू-धंसाव से बढ़ी चिंता
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस स्थान पर जमीन धंसी है, उसके आसपास एक विद्यालय संचालित है। इस विद्यालय में प्रतिदिन करीब 900 से अधिक बच्चे अध्ययन करने पहुंचते हैं।
भू-धंसाव की घटना के बाद अभिभावकों में भय का माहौल देखा जा रहा है। कई माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। यदि विद्यालय के आसपास की जमीन कमजोर हो चुकी है तो पहले वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए और उसके बाद ही सुरक्षा से जुड़े निर्णय लिए जाने चाहिए।
लोगों का कहना है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
ग्रामीणों ने खदान गतिविधियों पर उठाए सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में संचालित खदानों के कारण जमीन के अंदर खाली स्थान बन रहे हैं, जिसके चलते भू-धंसाव जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन गतिविधियों के प्रभावों की नियमित जांच होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आसपास रहने वाले लोगों एवं संस्थानों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
लोगों ने कहा कि खनन क्षेत्र में काम करने वाली एजेंसियों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे समय-समय पर क्षेत्र का निरीक्षण करें और संभावित खतरों को पहले ही चिन्हित करें।
हालांकि, भू-धंसाव के वास्तविक कारणों की पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रशासन और कॉलरी प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और कॉलरी प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजकर जमीन की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि भू-धंसाव का कारण क्या है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में आक्रोश
विद्यालय के आसपास उत्पन्न स्थिति को लेकर अभिभावकों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि बच्चों को प्रतिदिन ऐसे क्षेत्र में भेजना चिंता का विषय है, जहां जमीन धंसने जैसी घटना हो चुकी है।
अभिभावकों ने कहा कि प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि विद्यालय क्षेत्र की सुरक्षा जांच कराई जाए और यदि कहीं भी खतरे की संभावना हो तो तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
वैज्ञानिक जांच से ही स्पष्ट होगा वास्तविक खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, खनन क्षेत्रों में भू-धंसाव कई कारणों से हो सकता है। इनमें भूमिगत खदानों की स्थिति, जमीन के अंदर खाली स्थान, जल स्तर में बदलाव और भू-गर्भीय परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं।
इसलिए इस घटना का सही कारण जानने के लिए भू-वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञों की जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच में देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर आम लोगों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
बड़ी दुर्घटना से पहले सतर्कता जरूरी
मलगा क्षेत्र में हुई इस घटना ने एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए और भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रबंधन की होगी।
लोगों का कहना है कि किसी भी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से सुरक्षा उपाय करना अधिक जरूरी है।
फिलहाल दहशत में ग्रामीण, प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
घटना के बाद मलगा गांव और आसपास के क्षेत्र के लोग भय के माहौल में हैं। ग्रामीणों को चिंता है कि यदि जमीन धंसने की प्रक्रिया आगे भी जारी रही तो आसपास के क्षेत्रों में खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल लोगों की नजर प्रशासन और कॉलरी प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करेगी और सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
