समय-सीमा में प्रकरणों का निराकरण नहीं करने पर अधिकारियों पर कार्रवाई, ₹8,500 का अर्थदंड
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अनूपपुर जिला प्रशासन की कार्रवाई; जन्म-मृत्यु पंजीयन से जुड़े प्रकरणों में देरी पर अधिकारियों पर जुर्माना, तीन दिन में चालान जमा करने के निर्देश
संवाददाता : अभिषेक द्विवेदी
अनूपपुर। मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के अंतर्गत अधिसूचित सेवाओं को निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध नहीं कराने के मामलों में अनूपपुर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। कलेक्टर रत्नाकर झा के आदेशानुसार अपर कलेक्टर बलवीर रमन द्वारा समय-सीमा से बाहर हुए प्रकरणों को लेकर संबंधित पदाभिहित अधिकारियों पर कुल 8 हजार 500 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।
जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार मामला जन्म एवं मृत्यु के एक वर्ष बाद पंजीयन की अनुमति से संबंधित अधिसूचित सेवाओं के प्रकरणों से जुड़ा है। इन आवेदनों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण और सेवा प्रदाय नहीं किए जाने पर मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के प्रावधानों के तहत संबंधित अधिकारियों पर शास्ति लगाई गई है।
प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को अर्थदंड की राशि जमा कर चालान की एक प्रति आदेश जारी होने के तीन दिवस के भीतर कलेक्ट्रेट स्थित लोक सेवा प्रबंधन विभाग के कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई
मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के तहत नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं निर्धारित अवधि में उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके अंतर्गत अलग-अलग सेवाओं के लिए पदाभिहित अधिकारी और सेवा प्रदान करने की समय-सीमा निर्धारित की जाती है।
अनूपपुर जिले में ऐसे ही कुछ प्रकरण निर्धारित समय-सीमा से बाहर पाए गए। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर संबंधित मामलों की समीक्षा की गई और जिम्मेदार अधिकारियों पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अर्थदंड लगाने की कार्रवाई की गई।
आदेश में कहा गया है कि जन्म एवं मृत्यु के एक वर्ष बाद पंजीयन की अनुमति से संबंधित अधिसूचित सेवाओं का समय पर निराकरण नहीं किए जाने के कारण शास्ति अधिरोपित की गई है।
धारा 7(1)(क) के तहत लगाई गई शास्ति
जिला प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार संबंधित पदाभिहित अधिकारियों के खिलाफ मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 की धारा 7(1)(क) के तहत कार्रवाई की गई है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य अधिसूचित सेवाओं के आवेदनों का तय अवधि में निराकरण सुनिश्चित करना और सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों को अनावश्यक रूप से प्रतीक्षा करने की स्थिति से बचाना है।
लोक सेवा गारंटी व्यवस्था में समय-सीमा का विशेष महत्व है। किसी अधिसूचित सेवा के लिए आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी करते हुए तय समय में आवेदन का निराकरण किया जाए।
विशाल रत्नम् पर ₹6 हजार का अर्थदंड
आदेश के अनुसार नायब तहसीलदार पुष्पराजगढ़, वृत्त दमेहड़ी विशाल रत्नम् पर कुल 6 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। संबंधित मामलों में यह सबसे अधिक अर्थदंड है।
प्रशासन द्वारा समय-सीमा से बाहर हुए प्रकरणों की समीक्षा के बाद अलग-अलग अधिकारियों पर प्रकरणों के अनुसार अर्थदंड की राशि निर्धारित की गई।
इस कार्रवाई से प्रशासन ने संकेत दिया है कि लोक सेवा गारंटी के अंतर्गत आने वाले आवेदनों को तय समय में निपटाने में लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
मिथिला प्रसाद पटेल पर ₹1,500 की शास्ति
आदेश में नायब तहसीलदार कोतमा, वृत्त आमाडांड मिथिला प्रसाद पटेल पर 1 हजार 500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
उनसे संबंधित प्रकरण भी जन्म एवं मृत्यु के एक वर्ष बाद पंजीयन की अनुमति से जुड़ी अधिसूचित सेवा के समय-सीमा में निराकरण नहीं होने से संबंधित बताए गए हैं।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि लोक सेवा गारंटी के दायरे में आने वाले मामलों में आवेदकों को समय पर सेवा उपलब्ध हो और लंबित प्रकरणों की संख्या कम की जाए।
दो अन्य अधिकारियों पर ₹500-₹500 का जुर्माना
जारी आदेश के अनुसार नायब तहसीलदार कोतमा, वृत्त बिजुरी लवतेन्द्र सिंह पर 500 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।
इसी तरह नायब तहसीलदार पुष्पराजगढ़, वृत्त खमरौंध सोहनलाल कोल पर भी 500 रुपये की शास्ति लगाई गई है।
जिला प्रशासन की प्रेस विज्ञप्ति में कुल छह पदाभिहित अधिकारियों पर ₹8,500 का अर्थदंड लगाए जाने का उल्लेख है। हालांकि उपलब्ध विवरण में चार अधिकारियों के नाम और उन पर लगाए गए अर्थदंड की राशि का ही स्पष्ट उल्लेख किया गया है। प्रकाशित विवरण के अनुसार इन चार अधिकारियों पर लगाई गई राशि का कुल योग भी ₹8,500 होता है।
जन्म-मृत्यु पंजीयन से जुड़े थे प्रकरण
प्रशासन के मुताबिक कार्रवाई उन अधिसूचित सेवाओं से संबंधित है, जिनमें जन्म अथवा मृत्यु के एक वर्ष बाद पंजीयन की अनुमति प्रदान की जानी थी।
जन्म और मृत्यु का पंजीयन कई प्रशासनिक एवं व्यक्तिगत कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होता है। संबंधित प्रमाण-पत्रों की आवश्यकता शिक्षा, सरकारी योजनाओं, संपत्ति, पेंशन और अन्य कानूनी अथवा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पड़ सकती है।
ऐसे में इनसे जुड़े आवेदनों का समय पर निराकरण नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। लोक सेवा गारंटी व्यवस्था का उद्देश्य भी यही है कि नागरिकों को अधिसूचित सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
तीन दिन के भीतर जमा करना होगा चालान
अर्थदंड अधिरोपित किए जाने के साथ संबंधित अधिकारियों को राशि जमा कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
आदेश के अनुसार शास्ति की निर्धारित राशि जमा कराने के बाद उसका चालान आदेश जारी होने के तीन दिवस के भीतर कलेक्ट्रेट स्थित लोक सेवा प्रबंधन विभाग कार्यालय में जमा कराना होगा।
इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
समय पर सेवा देना पदाभिहित अधिकारियों की जिम्मेदारी
लोक सेवा गारंटी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को जवाबदेह और समयबद्ध बनाना है। इसके तहत नागरिकों को यह अधिकार मिलता है कि अधिसूचित सेवाओं का आवेदन करने के बाद उनका मामला निर्धारित अवधि के भीतर निपटाया जाए।
इसके लिए प्रत्येक अधिसूचित सेवा के लिए संबंधित पदाभिहित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाती है। समय-सीमा का पालन नहीं होने की स्थिति में अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार जवाबदेही निर्धारित की जा सकती है।
अनूपपुर जिला प्रशासन द्वारा की गई वर्तमान कार्रवाई को भी इसी व्यवस्था के तहत देखा जा रहा है।
लंबित प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण पर प्रशासन का जोर
समय-सीमा से बाहर हुए प्रकरणों में अर्थदंड लगाए जाने की कार्रवाई के माध्यम से प्रशासन ने अधिसूचित सेवाओं के समयबद्ध निराकरण पर जोर दिया है।
लोक सेवा गारंटी व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है, जब संबंधित अधिकारी आवेदनों की नियमित निगरानी करें और तय अवधि में नागरिकों को सेवा प्रदान करें। प्रकरणों में अनावश्यक देरी होने पर न केवल आवेदकों को परेशानी होती है, बल्कि सरकारी सेवाओं की प्रभावशीलता भी प्रभावित होती है।
अनूपपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद संबंधित अधिकारियों को शास्ति की राशि निर्धारित अवधि में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह कार्रवाई अन्य पदाभिहित अधिकारियों के लिए भी निर्धारित समय-सीमा में प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने का संदेश देती है।
