Anuppur में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ सीमा से आए तीन हाथियों के दल ने NH-43 तक पहुंचकर यातायात प्रभावित किया और आधा दर्जन घरों में तोड़फोड़ की। पढ़ें पूरी खबर।
Anuppur में हाथियों का आतंक: 3 हाथियों के दल ने मचाई भारी तबाही, NH-43 तक पहुंचने से दहशत
संभाग ब्यूरो प्रमुख: सुनील रैदास |
Anuppur में हाथियों का आतंक
Anuppur में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ सीमा से आया तीन हाथियों का दल पिछले आठ दिनों से बरबसपुर और भोलगढ़ के जंगलों में विचरण कर रहा है। शनिवार को यह दल राष्ट्रीय राजमार्ग-43 (NH-43) के समीप पहुंच गया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात रोकना पड़ा। वन विभाग, पुलिस और यातायात पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सुरक्षा व्यवस्था संभाली और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी।
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीण रातभर जागकर अपने घरों और खेतों की रखवाली कर रहे हैं।
NH-43 तक पहुंचा हाथियों का दल
शनिवार दोपहर एक बड़ा नर हाथी अपने दो साथियों के साथ वन क्षेत्र स्थित तालाब में पानी पीने पहुंचा। इसके बाद तीनों हाथी भोलगढ़ बस स्टैंड और वाटर शेड तालाब के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-43 के किनारे काफी देर तक घूमते रहे।
हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग, कोतवाली पुलिस और यातायात पुलिस ने एहतियातन कुछ समय के लिए हाईवे पर वाहनों की आवाजाही रोक दी। हाथियों के जंगल की ओर लौटने के बाद यातायात सामान्य किया गया।
आधा दर्जन घरों में तोड़फोड़
पिछले तीन दिनों के दौरान अनूपपुर में हाथियों का आतंक ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। हाथियों ने भोलगढ़ गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में आधा दर्जन से अधिक कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचाया।
भोजन की तलाश में हाथियों ने घरों में रखे अनाज को बर्बाद कर दिया। कई स्थानों पर घरेलू सामान भी क्षतिग्रस्त हुआ। ग्रामीणों के अनुसार हाथियों ने खेतों में लगी फसलों, सब्जियों तथा पेड़-पौधों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
किसानों को भारी आर्थिक नुकसान
हाथियों के लगातार विचरण से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। खेतों में लगी धान, सब्जियां तथा अन्य फसलें रौंद दी गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि फसलें पहले ही मौसम की मार झेल रही थीं, अब हाथियों के कारण आर्थिक संकट और बढ़ गया है। कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है।
वन विभाग की लगातार निगरानी
वन परिक्षेत्राधिकारी ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जैसे ही हाथियों का दल मुख्य मार्ग के समीप पहुंचा, तुरंत सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई।
वन विभाग की टीम ग्रामीणों को लगातार सतर्क रहने, जंगल की ओर अकेले नहीं जाने तथा हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रही है।
ग्रामीणों में दहशत
Anuppur में हाथियों का आतंक इतना बढ़ गया है कि ग्रामीण रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों की आवाजाही पर नियंत्रण के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
मुआवजे की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- फसलों का शीघ्र सर्वे कराया जाए।
- मकानों के नुकसान का तत्काल मुआवजा दिया जाए।
- हाथियों की निगरानी बढ़ाई जाए।
- प्रभावित गांवों में वन विभाग की विशेष टीम तैनात की जाए।
- लोगों को समय-समय पर अलर्ट जारी किए जाएं।
प्रशासन की अपील
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि—
- हाथियों के पास जाने की कोशिश न करें।
- फोटो या वीडियो बनाने के लिए भीड़ न लगाएं।
- रात में जंगल या खेतों की ओर अकेले न जाएं।
- किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
निष्कर्ष
Anuppur में हाथियों का आतंक फिलहाल ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है, लेकिन स्थायी समाधान की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द राहत और मुआवजे की व्यवस्था करेगा ताकि उन्हें हुए नुकसान की भरपाई हो सके।

