मलेशिया में किया गौ-पूजन, सांचौर की गौशालाओं में भिजवाया गुड़-चारा; सेवा कार्यों से मनाया विशेष दिन
जालोर (मुकेश सोलंकी)। आधुनिक जीवनशैली और पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच जालोर जिले के हाड़ेचा निवासी और वर्तमान में मलेशिया में रह रहीं समाजसेवी Ansi Devi Jain भामाशाह रमेश कुमार जैन ने भारतीय संस्कारों और सेवा भावना की अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने अपना जन्मदिवस भव्य आयोजन या दिखावे से दूर रहकर गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों को समर्पित किया।
आज जहां बड़ी संख्या में लोग जन्मदिवस को महंगे आयोजनों और तड़क-भड़क के साथ मनाते हैं, वहीं अणसी देवी जैन ने भारतीय परंपराओं का पालन करते हुए इस विशेष अवसर को सेवा और पुण्य कार्यों से जोड़ा। उन्होंने केक काटने जैसी पाश्चात्य परंपराओं से दूरी बनाते हुए समाज और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।
मलेशिया में रहकर भी मातृभूमि से जुड़ाव कायम
अणसी देवी जैन वर्तमान में मलेशिया में निवास करती हैं, लेकिन अपनी जन्मभूमि और भारतीय संस्कृति के प्रति उनका लगाव आज भी उतना ही मजबूत है। उन्होंने अपने जन्मदिवस की शुरुआत मलेशिया में धार्मिक स्थलों के दर्शन और विधि-विधान के साथ गौ-पूजन कर की।
उन्होंने विदेश में रहते हुए भी अपनी मातृभूमि के प्रति जिम्मेदारी को नहीं भुलाया। सांचौर क्षेत्र की गौशालाओं में गौमाता के लिए गुड़ और पौष्टिक चारे की व्यवस्था करवाकर उन्होंने गौसेवा का संदेश दिया।
सात समंदर पार से अपनी जन्मभूमि की गौशालाओं के लिए किया गया यह सेवा कार्य क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। सामाजिक संगठनों और गौशाला संचालकों ने उनके इस प्रयास की सराहना की।
गौसेवा को बताया सबसे बड़ा पुण्य कार्य
अणसी देवी जैन ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौसेवा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि जीवन के शुभ अवसरों को केवल व्यक्तिगत खुशी तक सीमित रखने के बजाय यदि इन्हें समाज और जीव सेवा से जोड़ा जाए तो इससे आत्मिक संतोष प्राप्त होता है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि वे अपने विशेष अवसरों पर जरूरतमंदों की सहायता, गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दें। इससे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए किया पौधारोपण
गौसेवा के साथ-साथ अणसी देवी जैन ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया। उन्होंने अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर फलदार और छायादार पौधे लगाए।
उन्होंने पौधारोपण के साथ उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
धार्मिक आयोजन और प्रसाद वितरण भी किया
जन्मदिवस के अवसर पर उन्होंने धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया और आमजन में प्रसाद का वितरण किया। पूरा आयोजन सादगी, श्रद्धा और सेवा भावना से परिपूर्ण रहा।
उन्होंने कहा कि दिखावे और फिजूलखर्ची के बजाय यदि जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को सेवा कार्यों से जोड़ा जाए तो समाज में बेहतर संदेश जाता है।
भारतीय संस्कृति और संस्कारों को अपनाने का संदेश
अणसी देवी जैन ने कहा कि हमारी वास्तविक पहचान हमारी संस्कृति, संस्कार और सेवा भावना से होती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ अपनी भारतीय परंपराओं और मूल्यों को भी बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि जन्मदिवस जैसे अवसर केवल उत्सव मनाने के लिए नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के अवसर भी होते हैं।
समाज में हुई सराहना
अणसी देवी जैन के इस प्रेरणादायी प्रयास की प्रवासी भारतीय समाज सहित जालोर-सांचौर क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों और गौशाला संचालकों ने प्रशंसा की है।
लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में जब युवा वर्ग अक्सर दिखावे और भौतिक आकर्षण की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में अणसी देवी जैन का सेवा आधारित जन्मदिवस आयोजन समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।
उनके इस कार्य से यह संदेश मिलता है कि खुशी के अवसरों को समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और जीव कल्याण से जोड़कर जीवन को और अधिक सार्थक बनाया जा सकता है।
