अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स में जीता गोल्ड, 80 किलोग्राम वर्ग में दक्षिण कोरियाई बॉक्सर को हराया
फाइनल में किम मिनसियोंग पर 4-0 की जीत, कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद एशियाई खेलों में भी बने चैंपियन
नागोया। भारतीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 80 किलोग्राम भार वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को खेले गए फाइनल में उन्होंने दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग को 4-0 से हराया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित खेलों में इस जीत के साथ अंकुश ने भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक हासिल किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद अब उन्होंने एशियाई खेलों में भी अपनी सफलता दोहराई है।
फाइनल में दिखाया गति और तकनीक का मेल
स्वर्ण पदक मुकाबले में अंकुश ने अपनी गति, फुटवर्क और जवाबी पंचों का प्रभावी इस्तेमाल किया। उन्होंने दक्षिण कोरियाई प्रतिद्वंद्वी के हमलों से बचते हुए साफ पंच लगाए और मुकाबले में बढ़त बनाई। उनके प्रदर्शन के सामने किम मिनसियोंग को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
अंकुश की जीत भारतीय पुरुष मुक्केबाजी के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वह वर्ष 2018 में अमित पंघाल के बाद एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बने हैं। सेमीफाइनल में उन्होंने उज्बेकिस्तान के फजलिद्दीन एरकिनबोएव को 4-1 से हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया था। इस तरह अंतिम दो मुकाबलों में मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराकर उन्होंने अपना अभियान स्वर्ण पदक के साथ पूरा किया।
क्वार्टर फाइनल में ही पक्का कर लिया था पदक
अंकुश ने टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में ताजिकिस्तान के नेक्रुज सलीमोव को सर्वसम्मत निर्णय से 5-0 से हराया था। इस जीत के साथ उनका सेमीफाइनल में स्थान और भारत के लिए पदक सुनिश्चित हो गया था। हालांकि उन्होंने पदक पक्का होने के बाद भी अपने अभियान को आगे बढ़ाया और आखिरकार शीर्ष स्थान हासिल किया।
सलीमोव के खिलाफ मुकाबले में अंकुश शुरुआती दो राउंड में प्रभावी रहे। उन्होंने तेज पंचों और मजबूत रक्षात्मक खेल के सहारे बढ़त बनाई। अंतिम राउंड में ताजिकिस्तान के मुक्केबाज ने वापसी की कोशिश की, लेकिन शुरुआती बढ़त अंकुश को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त रही। उस मुकाबले में उनकी गति और जवाबी हमलों ने प्रतिद्वंद्वी को लगातार चुनौती दी।
हरियाणा से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
अंकुश पंघाल हरियाणा के रहने वाले हैं और पुरुषों के 80 किलोग्राम यानी लाइट हैवीवेट वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं। 13 अगस्त 2005 को जन्मे अंकुश ने लगभग 11 वर्ष की उम्र में मुक्केबाजी शुरू की थी। किसान परिवार से आने वाले इस युवा खिलाड़ी ने घरेलू स्तर से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई है।
उनके करियर में वर्ष 2025 का वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल भी महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। ग्रेटर नोएडा में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीता था। इसके बाद वर्ष 2026 में ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक हासिल किया। अब एशियन गेम्स का गोल्ड उनके अंतरराष्ट्रीय सफर में एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।
भारतीय मुक्केबाजी के लिए स्वर्णिम दिन
अंकुश की सफलता के साथ शुक्रवार भारतीय मुक्केबाजी के लिए खास रहा। उनसे पहले लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग और परवीन हुड्डा ने महिलाओं के 65 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। अंकुश ने पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल करके भारत की मुक्केबाजी में दिन के तीसरे गोल्ड पर मुहर लगाई।
इस परिणाम ने एशियन गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों के सफल अभियान को और मजबूत किया है। अंकुश के लिए यह जीत केवल फाइनल की सफलता नहीं, बल्कि क्वार्टर फाइनल से स्वर्ण पदक तक लगातार आगे बढ़ने का परिणाम है। कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के खिताबों के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में अपनी बढ़ती पहचान को मजबूत किया है।
